Health

फिलीपींस के जुड़वां बच्चों के लिए भगवान बने अपोलो अस्पताल के डॉक्टर, लिवर ट्रांसप्लांट करके बचाई जान, खर्च हुआ ₹2500000

Last Updated:July 09, 2026, 06:16 IST

Delhi Apollo Hospital Liver Transplant: राजधानी दिल्ली में स्थित अपोलो हॉस्पिटल के डाक्टरों ने इतिहास रच दिया है. यहां डॉक्टरों ने फिलीपींस के जुड़वां बच्चों का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया. इस सफल ऑपरेशन को डॉ. अनुपम सिबल और डॉ. नीरव गोयल ने ऐतिहासिक सर्जरी की. जहां बच्चों के माता-पिता को टोटल 25 लाख रुपये खर्च करने पड़े.

ख़बरें फटाफट

नई दिल्ली: फिलीपींस जो कि दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित एक देश है. वहां के 2 जुड़वा मासूम बच्चों के लिए भारत के डॉक्टर भगवान बनकर सामने आए और उन्होंने इन दोनों जुड़वा बच्चों का लिवर ट्रांसप्लांट करके उनकी जान बचाई. जबकि इन दोनों जुड़वा बच्चों का इलाज और ट्रांसप्लांट दक्षिणी पूर्व एशिया के एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं कर सके थे. वहां से ही इस परिवार को भारत के दिल्ली स्थित अपोलो हॉस्पिटल में रेफर किया गया था. अपोलो दिल्ली में किए गए 645 बच्चों के लिवर ट्रांसप्लांट में यह पहला और ऐतिहासिक ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट है, जिसकी चर्चा दुनिया में हो रही है.

आपको बता दें कि इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में फिलीपींस के 23 महीने के जुड़वां भाईयों का लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करके उनकी जान बचाई गई है. यह हॉस्पिटल में आज तक किए गए बच्चों के 645 लिवर ट्रांसप्लांट्स में पहला जुड़वां बच्चों का लिवर ट्रांसप्लांट है. इस लिवर ट्रांसप्लांट को डॉ. अनुपम सिबल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और डॉ. नीरव गोयल जो कि सीनियर कंसल्टैंट एवं हेड ऑफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन हैं, उन्होंने किया.

बच्चों में थी यह बीमारी

डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि इस सर्जरी में 10 से 12 घंटे का वक्त लगा. जुड़वा बच्चों की इस तरह की सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट अभी तक फिलहाल कहीं पर नहीं हुआ है. इसीलिए इस लिवर ट्रांसप्लांट को बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि जुड़वां बच्चों, टायलर और केली का जन्म समय से पहले हो गया था. जन्म के समय उनका वजन केवल 2 किग्रा. और 2.4 किग्रा. था. इससे पहले भी उनके माता-पिता अपने एक बच्चे को खो चुके थे. इन जुड़वां बच्चों के जन्म के दो हफ्ते बाद ही उन दोनों को पीलिया हो गया और उन्हें पीले रंग का मल आने लगा. जांच में सामने आया कि उन्हें एक जन्मजात बाइलियरी विकार कोलेडोकल सिस्ट टाईप 4ए था.

इस जन्मजात विकार में बाईल डक्ट बहुत ज्यादा बड़ी हो जाती है और अगर समय पर इलाज न मिले, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है. इस विकार के कारण दोनों बच्चों का लिवर फेल हो गया. इसके बाद, इन जुड़वां बच्चों को बार-बार गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल ब्लीडिंग होने लगी. पेट में फ्लुइड जमा होने लगा. उनका विकास ठीक से नहीं हो पा रहा था और उन्हें बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ता था. डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बाद भी उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई.  उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर ट्रांसप्लांट था.

मामा और मां ने 20% डोनेट किया लिवर

डॉ. अनुपम सिबल ने बताया कि उनके सामने चुनौती केवल सर्जरी की नहीं थी. बल्कि कुछ ही दिनों में दोनों भाईयों के ट्रांसप्लांट के लिए दो अनुकूल लिविंग डोनर तलाशना बहुत ही मुश्किल था. तब बच्चों की मां और बच्चों के मामा ने 20 से 25% अपने लिवर को डोनेट किया. क्योंकि पिता का लिवर डोनेट करने के लिए फिट नहीं बैठ पा रहा था. टायलर के ट्रांसप्लांट की सर्जरी 15 घंटे से अधिक समय तक चली, वहीं केली की सर्जरी में 13 घंटे से अधिक समय लगा. दोनों सर्जरी में कॉम्प्लेक्स सर्जिकल रिकॉन्स्ट्रक्शन शामिल था.

इन दोनों जुड़वां बच्चों ने अच्छी रिकवरी की और उनका लिवर अब स्वस्थ काम कर रहा है. इस दौरान शिवकुमार पट्टाभिरमन जो कि मैनेजिंग डायरेक्टर, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल हैं उन्होंने कहा कि हर ट्रांसप्लांट के पीछे एक परिवार की उम्मीद छिपी होती है. हम फिलीपींस के इस परिवार के आभारी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के इलाज के लिए हम पर भरोसा करके इतनी दूर यात्रा की.

पेट में ही जन्म लेती है यह बीमारी

डॉ. अनुपम सिबल ने बताया कि यह एक ऐसी बीमारी है, जो पेट में ही हो जाती है. प्रेगनेंसी के दौरान इसीलिए शराब पीना मना किया जाता है और हेल्दी डाइट रखने के लिए कहा जाता है. क्योंकि मां की सेहत से ही बच्चों की सेहत जुड़ी होती है. आपको बता दें कि बच्चों के माता-पिता से बात करने की कोशिश लोकल 18 ने की थी, लेकिन बच्चों के माता-पिता को इंग्लिश और हिंदी दोनों ही नहीं आती थी. इस वजह से उन्होंने बस अपनी भाषा में इतना ही कहा की बच्चों का जो इलाज उन्हें उनके देश में नहीं मिला. वह भारत आकर मिल गया. इसके लिए वहां हमेशा शुक्रगुजार रहेंगे. आपको बता दें कि इस पूरे लिवर ट्रांसप्लांट पर कुल 25 लाख रुपए का खर्चा हुआ है.

About the AuthorBrijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj