नासपती मत समझो… बस 25 दिन मिलता है ये खास फल, आयुर्वेद ने बताया सेहत के लिए वरदान, जानें खासियत

Last Updated:June 16, 2026, 18:34 IST
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बाबूगोशा किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें विटामिन-सी, फाइबर और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं
मौसम बदलते ही बाजारों में मौसमी फलों की रौनक बढ़ जाती है, लेकिन कुछ फल ऐसे होते हैं जिनका इंतजार लोग पूरे साल करते हैं. खंडवा के बाजारों में इन दिनों एक ऐसा ही खास फल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जो दिखने में भले ही नाशपाती जैसा लगता है. लेकिन स्वाद और गुणों में उससे कहीं आगे है. इस अनोखे फल का नाम है. बाबूगोशा, जो अपनी मिठास, रसीलेपन और सीमित समय के लिए उपलब्ध होने के कारण लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.बाबूगोशा की सबसे खास बात यह है कि यह सालभर नहीं मिलता, बल्कि सिर्फ करीब 20 से 25 दिनों के लिए ही बाजार में आता है. जैसे ही इसकी आवक शुरू होती है, लोग इसे खरीदने के लिए उत्साहित नजर आते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसका स्वाद इतना मीठा और मुलायम होता है कि एक बार खाने के बाद लोग इसे बार-बार लेना पसंद करते हैं.
इस फल के बारे में स्थानीय भावेश पटेल बताते हैं कि खंडवा में यह फल सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है.इसका सेवन सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. बाबूगोशा, नाशपाती की ही एक प्रजाति है.लेकिन दोनों के बीच कई अंतर होते हैं. जहां नाशपाती का छिलका थोड़ा सख्त और गूदा हल्का खट्टा-मीठा होता है. वहीं बाबूगोशा का छिलका पतला और गूदा बेहद नरम, रसदार और ज्यादा मीठा होता है. इसका आकार भी थोड़ा अलग होता है, नीचे से चौड़ा और ऊपर से पतला, जो इसे खास बनाता है.
स्वाद ऐसा कि नाशपाती भी पड़ जाए फीकीस्वास्थ्य की दृष्टि से भी बाबूगोशा किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें विटामिन-सी, फाइबर और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है.इसके अलावा बाबूगोशा खून की कमी को दूर करने में भी सहायक माना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करते हैं और शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं. यही वजह है कि इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद फल माना जाता है.
सेहत के लिए भी है बेहद फायदेमंदइसके अलावा बाबूगोशा खून की कमी को दूर करने में भी सहायक माना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करते हैं और शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं. यही वजह है कि इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद फल माना जाता है.खाने के तरीके की बात करें तो बाबूगोशा को छीलने की जरूरत नहीं होती है. इसे अच्छी तरह धोकर सीधे छिलके सहित खाया जा सकता है. इसके अलावा लोग इसे फ्रूट चाट, सलाद या जूस के रूप में भी सेवन करते हैं. हालांकि, इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होने के कारण इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने या गैस जैसी समस्या पैदा कर सकता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए.बाबूगोशा न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिए भी काफी लाभकारी है। इसकी सीमित उपलब्धता ही इसे और खास बनाती है, यही कारण है कि जैसे ही यह बाजार में आता है, लोग इसे खरीदने का मौका नहीं छोड़ते.
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