बीकानेर में किसानों पर डबल मार! बारिश से फसल तबाह, विदेश संकट से दाम भी गिरे और मुश्किलें भी बढ़ी

Last Updated:April 24, 2026, 17:02 IST
Agriculture News : बीकानेर के किसानों के लिए इस बार फसल सीजन भारी पड़ रहा है. ईसबगोल और जीरा की फसल पर एक साथ दोहरी मार पड़ी है – असमय बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान, वहीं अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण निर्यात घटने से बाजार में दाम गिर गए हैं. उत्पादन घटा, लागत बढ़ी और किसानों की चिंता गहरा गई है.
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बीकानेर : रेगिस्तानी इलाके बीकानेर के किसानों के लिए इस बार फसल का सीजन उम्मीदों के विपरीत साबित हो रहा है. जिले की प्रमुख नकदी फसलें ईसबगोल और जीरा, जो आमतौर पर किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बनती हैं, इस बार दोहरी मार झेल रही हैं. एक तरफ असमय बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण निर्यात प्रभावित होने से बाजार में भाव भी गिर गए हैं. बीकानेर के किसानों के लिए यह सीजन कई चुनौतियों से भरा हुआ है. यदि जल्द ही बाजार और मौसम की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो इसका असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर लंबे समय तक पड़ सकता है.
कृषि उपज मंडी समिति, अनाज मंडी के सचिव उमेश शर्मा ने बताया कि बीकानेर से ईसबगोल और जीरा का निर्यात रूस, ब्राजील, जर्मनी सहित मिडिल ईस्ट के कई देशों में होता है, लेकिन वर्तमान में अमेरिका और इजरायल-ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है. परिवहन और शिपिंग का किराया तीन से पांच गुना तक बढ़ गया है, जिससे निर्यातकों को भारी लागत उठानी पड़ रही है. इसके चलते विदेशी ऑर्डर में कमी आई है और माल भेजने में भी दिक्कतें सामने आ रही हैं.
बारिश-ओलों से 30% फसल चौपटस्थानीय स्तर पर भी हालात किसानों के अनुकूल नहीं हैं. इस महीने हुई बारिश और ओलावृष्टि ने ईसबगोल और जीरा की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचाया है. अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 30 प्रतिशत फसल पूरी तरह खराब हो गई है. जिन खेतों में फसल बची भी है, वहां गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं. बीकानेर अनाज मंडी में इन दिनों ईसबगोल की रोजाना 2 से 2.5 हजार बैग और जीरा की 1500 से 2000 बैग तक आवक हो रही है, लेकिन खरीदारों की संख्या कम होने से कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. पिछले साल जहां ईसबगोल के भाव 13 से 14 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचे थे, वहीं इस बार यह घटकर 10 से 13 हजार रुपए रह गए हैं. इसी तरह जीरा के भाव भी 21 से 23 हजार रुपए से गिरकर 16 से 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक आ गए हैं.
जीरा-ईसबगोल के दामों में गिरावटपूगल तहसील के किसान छैलाराम की कहानी इस स्थिति को बयां करती है. वे बताते हैं कि पिछले साल जहां उनके खेत में 40 कट्टे ईसबगोल का उत्पादन हुआ था, इस बार मौसम की मार के कारण केवल 15 कट्टे ही हो पाए. “चार दिन से मंडी में बैठे हैं, लेकिन अच्छे भाव नहीं मिल रहे. लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है,” उन्होंने चिंता जताई. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ईसबगोल और जीरा जैसी फसलें मौसम के प्रति संवेदनशील होती हैं. नवंबर में बुवाई और मार्च में कटाई के दौरान यदि मौसम अनुकूल न रहे तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं. इस बार यही स्थिति देखने को मिली है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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Location :
Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
April 24, 2026, 17:02 IST



