Rajasthan

परिंदों पर भी ईरान-अमेरिका तनाव का असर! प्रवासी पक्षियों का बदला पैटर्न, केवलादेव में बढ़ी हलचल

Last Updated:May 15, 2026, 18:05 IST

Bharatpur Keoladeo National Park Bird Sanctuary: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का असर अब प्रवासी पक्षियों पर भी दिखाई देने लगा है. राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क में इस बार प्रवासी पक्षियों के आने और लौटने के समय में बड़ा बदलाव देखा गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, कई पक्षियों ने अपने पारंपरिक उड़ान मार्ग और प्रवास का समय बदल दिया है. आमतौर पर फरवरी-मार्च तक लौटने वाले पक्षी अब गर्मियों में भी वेटलैंड क्षेत्रों में नजर आ रहे हैं. वन विभाग इसे पर्यावरणीय असंतुलन और बदलते वैश्विक हालात का संकेत मानते हुए लगातार निगरानी कर रहा है.

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर अब प्रवासी पक्षियों पर भी दिखाई देने लगा है. विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक उड़ान मार्ग प्रभावित होने से कई पक्षियों ने अपना रूट और समय बदल दिया है. इससे उनके प्राकृतिक जीवनचक्र और प्रवास की प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है. हालांकि राहत की बात यह है कि इनमें से कई प्रवासी पक्षी अब राजस्थान के प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में नजर आने लगे हैं. पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए यह नई गतिविधि खास रुचि का विषय बनी हुई है और लगातार निगरानी की जा रही है.

वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में प्रवासी पक्षियों के पैटर्न में स्थायी बदलाव देखने को मिल सकते हैं. पहले केवलादेव नेशनल पार्क में यूरोप और साइबेरिया से आने वाले पक्षी तय समय पर पहुंच जाते थे, लेकिन अब उनके आने का समय बदलता नजर आ रहा है. इससे पक्षियों के प्राकृतिक प्रवास चक्र पर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों को इन दुर्लभ पक्षियों को देखने के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है. वन विभाग लगातार इस बदलाव पर नजर बनाए हुए है.

फिलहाल केवलादेव नेशनल पार्क और उसके आस-पास के वेटलैंड क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी देखने को मिल रही है. बड़ी संख्या में लोग इन दुर्लभ पक्षियों को देखने के लिए केवलादेव नेशनल पार्क पहुंच रहे हैं. रंग-बिरंगे और अलग-अलग प्रजातियों के ये पक्षी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इनके बदलते प्रवास मार्ग और समय के पीछे पर्यावरणीय संकेत चिंताजनक हैं. जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अब वन्यजीवों के प्राकृतिक जीवनचक्र पर भी दिखाई देने लगा है. वन विभाग इस बदलाव पर लगातार नजर बनाए हुए है.

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यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल केवलादेव नेशनल पार्क हर साल साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से आने वाले प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना रहा है. लेकिन इस बार कई प्रजातियां या तो देर से पहुंची हैं या फिर वापस लौटने में देरी कर रही हैं. विशेषज्ञ इसे पर्यावरणीय असंतुलन और बदलते वैश्विक हालात का संकेत मान रहे हैं. इस वर्ष केवलादेव में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी अलग समय पर देखने को मिल रही है, जिसने वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि पर्यटकों के लिए यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और लोग बड़ी संख्या में पार्क पहुंच रहे हैं.

ईरान-अमेरिका के बढ़ते तनाव का असर अब पर्यावरण और वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है. राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क में आने वाले प्रवासी पक्षियों के व्यवहार में इस बार बड़ा बदलाव देखा गया है, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. पक्षियों के प्रवास का समय और उड़ान मार्ग बदलते नजर आ रहे हैं. वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष केवलादेव नेशनल पार्क में प्रवासी पक्षियों की संख्या अधिक दिखाई दे रही है. विशेषज्ञ इसे बदलते वैश्विक हालात और पर्यावरणीय प्रभावों से जोड़कर देख रहे हैं. बड़ी संख्या में पर्यटक भी इन पक्षियों को देखने के लिए पार्क पहुंच रहे हैं.

पहले जहां हर साल सर्दियों में हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी केवलादेव नेशनल Park पहुंचते थे, वहीं इस बार उनकी वापसी का समय पूरी तरह बदल गया है. आमतौर पर फरवरी-मार्च तक अपने मूल स्थानों की ओर लौटने वाले ये प्रवासी पक्षी अब गर्मियों के महीनों में भी स्थानीय वेटलैंड क्षेत्रों में नजर आ रहे हैं. पार्क में इनकी संख्या सामान्य से अधिक देखी जा रही है, जिसने वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञ इसे बदलते पर्यावरणीय हालात और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर मान रहे हैं. बड़ी संख्या में पर्यटक भी इन पक्षियों को देखने के लिए पार्क पहुंच रहे हैं.

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