महिला आरक्षण पर घमासान! गहलोत की पीएम मोदी को सीधी चुनौती, बोले- हिम्मत है तो लोकसभा भंग कर चुनाव कराएं

Last Updated:April 19, 2026, 09:35 IST
Ashok Gehlot vs PM Modi: जयपुर में अशोक गहलोत ने महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी के संबोधन पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने चुनौती दी कि अगर महिलाओं का समर्थन है तो लोकसभा भंग कर चुनाव कराएं. गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनावी राज्यों में सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ और आचार संहिता का उल्लंघन किया गया. उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए. यह बयान महिला आरक्षण और चुनावी नैतिकता को लेकर सियासी बहस को और तेज कर रहा है.
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पीएम मोदी के महिला आरक्षण बिल पर दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधन पर अशोक गहलोत ने किया पलटवार
जयपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला आरक्षण बिल पर दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोरदार पलटवार किया है. गहलोत ने पीएम मोदी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें महिलाओं के समर्थन पर इतना भरोसा है, तो वे तुरंत लोकसभा भंग कर इस मुद्दे पर आम चुनाव कराएं. इससे साफ हो जाएगा कि देश की महिलाएं किसके साथ खड़ी हैं.
गहलोत ने प्रधानमंत्री के संबोधन को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बीच दूरदर्शन और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई. उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग इस बार भाजपा के पक्ष में काम करता नजर आ रहा है और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है.
महिला के आरक्षण मुद़्दे पर 1988 का दिया उदाहरण
महिला आरक्षण के मुद्दे पर गहलोत ने कांग्रेस का पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि पार्टी कभी भी महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं रही. उन्होंने 1988 का उदाहरण देते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने पंचायत और निकाय चुनावों में महिलाओं को आरक्षण दिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया गया. गहलोत ने सवाल उठाया कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण कानून को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया. उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर इसे टाल रही है और अब इसमें बदलाव की कोशिश की जा रही है.
प्रधानमंत्री के बयान को बताया खतरनाक सोच
जनगणना और परिसीमन के मुद्दे पर भी गहलोत ने अपनी स्पष्ट राय रखी. उन्होंने कहा कि 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन करना अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ होगा. उनका मानना है कि 2026 में प्रस्तावित जातिगत जनगणना के बाद ही सही आंकड़े सामने आएंगे, जिनके आधार पर न्यायपूर्ण और प्रभावी आरक्षण लागू किया जा सकेगा. गहलोत ने प्रधानमंत्री के बयान को “खतरनाक सोच” करार देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी विपक्ष को कमजोर करने, चुनावी राज्यों में माहौल प्रभावित करने और विपक्ष को बदनाम करने की रणनीति अपना रहे हैं.
महिला आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी का समर्थन अटूट
कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनकी पार्टी का समर्थन अटूट है, लेकिन केंद्र सरकार इसे लागू करने में विफल रही है. गहलोत का यह तीखा बयान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच महिला आरक्षण, परिसीमन और चुनावी नैतिकता को लेकर चल रहे राजनीतिक संघर्ष को और तेज कर रहा है. यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी चरम पर है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 19, 2026, 09:35 IST



