‘अगर 5 मिनट देरी से पहुंचती तो’ अंकिता भार्गव के घर मेहमान बन पहुंचे ठग! सूझबूझ ने मम्मी-पापा को स्कैम से बचाया

Last Updated:May 16, 2026, 01:52 IST
एक्ट्रेस अंकिता भार्गव ने सोशल मीडिया के जरिए अपने माता-पिता के साथ हुई ठगी की एक गंभीर कोशिश का खुलासा किया है. दो संदिग्ध व्यक्ति खुद को गुजरात क्राइम ब्रांच का अधिकारी बता रहे थे. वे अंकिता के पिता से एक हाथ से लिखे गुजराती कागज पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश कर रहे थे. अंकिता की सूझबूझ और समय पर पहुंचने की वजह से उनके पिता इस स्कैम का शिकार होने से बच गए. अंकिता ने बुजुर्गों को आगाह किया कि वे वर्दी या आईडी कार्ड के दबाव में न आएं. उन्होंने सलाह दी कि बिना पढ़े किसी भी कागज पर हस्ताक्षर न करें.
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अंकिता भार्गव टीवी की मशहूर एक्ट्रेस हैं.
नई दिल्ली: टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस अंकिता भार्गव ने हाल में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वाकया शेयर किया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. अंकिता ने बताया कि कैसे उनके माता-पिता एक बहुत बड़े स्कैम का शिकार होते-होते बचे. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट लिखकर सबको सावधान किया है, खासकर उन बुजुर्गों को जो घर में अकेले रहते हैं और भोलेपन में अजनबियों पर भरोसा कर लेते हैं. वाकया पिछले गुरुवार का है, जब अंकिता दोपहर के खाने के वक्त अचानक अपने मम्मी-पापा के घर पहुंच गईं. वहां का नजारा देखकर वह दंग रह गईं. उनके घर की डाइनिंग टेबल पर दो अनजान लोग बड़े आराम से बैठे हुए थे. पूछने पर उन लोगों ने खुद को गुजरात क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया. उन्होंने दावा किया कि वे उनके किसी पुराने पड़ोसी के मामले में जांच कर रहे हैं और उन्हें अंकिता के पिता का बस एक छोटा सा बयान चाहिए.
अंकिता ने बताया कि शुरुआत में वे लोग बिल्कुल भी संदिग्ध नहीं लग रहे थे. उनका बात करने का तरीका बहुत ही सभ्य और आत्मविश्वास से भरा था. जब अंकिता को थोड़ा शक हुआ और उन्होंने उनका आईडी कार्ड मांगा, तो उन लोगों ने बड़ी बेबाकी से कार्ड दिखा दिया और यहां तक कह दिया कि आप चाहें तो इसकी फोटो भी खींच सकती हैं. उनकी इस बेखौफ अदा ने अंकिता के पिता को लगभग यकीन दिला दिया था कि वे असली पुलिसवाले हैं. असली खेल तब शुरू हुआ, जब उन लोगों ने एक कागज निकाला. वह कागज हाथ से लिखा हुआ था और गुजराती भाषा में था. वे अंकिता के पिता से उस पर साइन करने की जिद करने लगे. चूंकि अंकिता के पिता को गुजराती पढ़नी नहीं आती थी, तो उन लोगों ने बड़े प्यार से कहा कि चिंता मत कीजिए, हम आपको इसका मतलब समझा देते हैं. बस यहीं पर अंकिता का माथा ठनका और उन्होंने अपनी सूझबूझ दिखाई.
अंकिता की सूझबूझ से टली आफतअंकिता ने उन पर सवालों की बौछार कर दी. उन्होंने पूछा कि अगर यह कोई आधिकारिक बयान है, तो हाथ से क्यों लिखा गया है? और सबसे बड़ी बात, इसे ऐसी भाषा में क्यों लिखा गया है जिसे सामने वाला पढ़ ही नहीं सकता? अंकिता ने साफ कह दिया कि जब तक उनके घर का कोई सदस्य इस कागज को पूरी तरह पढ़ और समझ नहीं लेगा, तब तक कोई भी उस पर हस्ताक्षर नहीं करेगा. जैसे ही अंकिता ने सख्ती दिखाई, वे लोग वहां से खिसक लिए. बाद में अंकिता के पिता ने जो कहा, उसने उन्हें झकझोर कर रख दिया. उनके पिता ने माना कि अगर अंकिता उस वक्त वहां मौजूद नहीं होती, तो वे शायद उन लोगों की बातों में आकर साइन कर देते. बुजुर्ग अक्सर वर्दी या सरकारी आईडी कार्ड देखकर दबाव में आ जाते हैं और ठग इसी बात का फायदा उठाते हैं.
अंकिता ने जरूरी टिप्सअंकिता ने लोगों को आगाह करते हुए कुछ जरूरी टिप्स दिए हैं. उन्होंने कहा कि कभी भी हाथ से लिखे हुए या ऐसी भाषा के कागज पर साइन न करें जिसे आप समझ नहीं सकते. हमेशा टाइप किया हुआ और साफ डॉक्यूमेंट मांगें. अगर कोई घर आए, तो तुरंत अपनी सोसाइटी के गार्ड्स या लोकल पुलिस स्टेशन को फोन करके जांच करें. अकेले फैसला लेने के बजाय परिवार के किसी और सदस्य को तुरंत सूचित करें. अंत में अंकिता ने कहा कि भले ही वे असली अधिकारी रहे हों, लेकिन काम करने का यह तरीका बिल्कुल गलत था. सावधानी ही बचाव है. आज के दौर में स्कैमर्स इतने शातिर हो गए हैं कि वे आपकी आंखों में धूल झोंकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. अंकिता की इस बहादुरी और समझदारी ने उनके परिवार को एक बड़ी मुसीबत से बचा लिया.
About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor
अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
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