राजाओं की पालकी देखी है..? नहीं न… ये हाथी के दांत से बनते थे, देखकर होश उड़ जाएगा

राजाओं की पालकी देखी है..? ये हाथी के दांत से बनते थे, देखकर होश उड़ जाएगा
Haathi Ke Daat Se Bani Palaki: हैदराबाद की भीड़भाड़ और आधुनिक जिंदगी के बीच एक ऐसी जगह है, जहां कदम रखते ही वक्त जैसे ठहर जाता है. Salar Jung Museum के भीतर रखी एक अनोखी पालकी आज भी लोगों को हैरान कर देती है. पहली नजर में यह किसी साधारण कलाकृति जैसी लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे आप इसके करीब जाते हैं, इसकी बारीक नक्काशी आंखों को थाम लेती है. हाथी के दांत से बनी यह पालकी 18वीं-19वीं सदी की उस कला का उदाहरण है, जिसमें धैर्य, कल्पना और महीन काम का अद्भुत मेल देखने को मिलता है.
हर कोने पर उकेरे गए फूल, लताएं और जालियां इतनी सजीव लगती हैं कि लगता है मानो किसी कलाकार ने ठोस दांत को नहीं, बल्कि नरम मोम को तराशा हो. इतिहासकारों के मुताबिक, यह पालकी सिर्फ एक सवारी नहीं थी, बल्कि उस दौर के रईसों की शान और हैसियत का प्रतीक भी थी. यही वजह है कि आज भी देश-विदेश से आने वाले लोग इसे देखकर कुछ पल के लिए ठहर जाते हैं. अब जब हाथी के दांत के व्यापार पर रोक लग चुकी है, ऐसी विरासत और भी अनमोल बन गई है. यह पालकी सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि उस समय की सोच, कला और समर्पण की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है.
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