History of Cycle License in Bikaner

Last Updated:April 17, 2026, 09:43 IST
History of Cycle License in Bikaner: बीकानेर में 1950 के दशक में साइकिल चलाने के लिए म्युनिसिपल बोर्ड से लाइसेंस लेना अनिवार्य था. यह लाइसेंस पीतल के एक छोटे बैज के रूप में होता था जिसे साइकिल पर लगाना ज़रूरी था. उस दौर में सुरक्षा नियमों के तहत साइकिल पर हेडलाइट और बैकलाइट होना भी आवश्यक था. यह लाइसेंस 5 साल की अवधि के लिए वैध होता था. बीकानेर के किशन सोनी ने अपने पिता का यह ऐतिहासिक साइकिल लाइसेंस आज भी संभाल कर रखा है, जो पुराने समय की अनुशासित प्रशासनिक व्यवस्था का प्रतीक है.
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बीकानेर. आधुनिक दौर में जहाँ हम कार, बस और मोटरसाइकिल जैसे वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता से परिचित हैं, वहीं राजस्थान के ऐतिहासिक शहर बीकानेर का एक दौर ऐसा भी था जब यहाँ साइकिल चलाने के लिए भी बाकायदा सरकारी परमिट या लाइसेंस लेना पड़ता था. यह तथ्य आज की पीढ़ी को सुनने में भले ही किसी काल्पनिक कहानी जैसा लगे, लेकिन बीकानेर की प्रशासनिक और यातायात व्यवस्था के इतिहास का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनुशासित हिस्सा रहा है. उस समय की यह व्यवस्था न केवल यातायात को नियंत्रित करने के लिए थी, बल्कि यह शहर के व्यवस्थित प्रशासन और नागरिक अनुशासन का भी एक बड़ा उदाहरण पेश करती थी. बीकानेर के निवासी किशन सोनी के पास आज भी उनके पिता के नाम से बना हुआ यह ऐतिहासिक साइकिल लाइसेंस सुरक्षित है, जो बीते दौर की यादों को आज भी ताज़ा कर देता है.
करीब 1950 के दशक के दौरान बीकानेर में साइकिल के लिए विशेष लाइसेंस जारी करने की प्रथा चलन में थी. उस समय वर्तमान नगर निगम के स्थान पर म्युनिसिपल बोर्ड शहर की बागडोर संभालता था और प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता था. दिलचस्प बात यह है कि उस दौर का साइकिल लाइसेंस आज के ड्राइविंग लाइसेंस की तरह कागज़ या प्लास्टिक का नहीं होता था. प्रशासन द्वारा पीतल (ब्रास) का बना एक विशेष बैज या टोकन जारी किया जाता था, जिसे साइकिल की वैधता का प्रमाण माना जाता था. इस छोटे से पीतल के बैज में दोनों ओर बारीक छेद होते थे, ताकि इसे तार या पेच की सहायता से साइकिल के हैंडल या फ्रेम पर आसानी से फिट किया जा सके. यह बैज दर्शाता था कि संबंधित साइकिल का पंजीकरण म्युनिसिपल बोर्ड में हो चुका है.
कड़े नियम और सुरक्षा के प्रति गंभीरताउस समय साइकिल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आमजन के लिए यातायात का सबसे प्रमुख और विश्वसनीय जरिया थी. बड़ी संख्या में लोग अपने दफ्तर, बाज़ार और रोजमर्रा के कार्यों के लिए साइकिल का ही उपयोग करते थे. नियमों के अनुसार, हर साइकिल पर हेडलाइट और बैकलाइट होना अनिवार्य था. खासतौर पर सूर्यास्त के बाद बिना लाइट के साइकिल चलाना सख्त मना था और रात के समय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन इन नियमों का कड़ाई से पालन करवाता था. यातायात सुरक्षा को लेकर बरती गई यह गंभीरता उस दौर की उन्नत सोच को प्रदर्शित करती है. यदि कोई व्यक्ति बिना लाइसेंस या बिना लाइट के साइकिल चलाते पाया जाता था, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाता था और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता था.
पाँच साल की वैधता और ऐतिहासिक धरोहरम्युनिसिपल बोर्ड द्वारा जारी यह साइकिल लाइसेंस एक निश्चित समयावधि यानी पाँच साल के लिए वैध होता था. इसके बाद मालिक को अपनी साइकिल का नवीनीकरण (Renewal) करवाना पड़ता था, जिसके लिए फिर से बोर्ड कार्यालय में आवेदन करना होता था. किशन सोनी बताते हैं कि उनके पास मौजूद उनके पिता का यह लाइसेंस अब महज एक वस्तु नहीं, बल्कि बीकानेर के गौरवशाली अतीत की एक अनमोल धरोहर है. यह लाइसेंस हमें बताता है कि पुराने समय में भी नगर प्रशासन शहर की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए कितना अधिक सक्रिय और सजग था. आज भले ही साइकिलों पर ऐसे किसी नियम की आवश्यकता नहीं रही हो, लेकिन बीकानेर के इतिहास का यह ‘ब्रास बैज’ आज भी उस दौर की प्रशासनिक व्यवस्था की गवाही देता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
April 17, 2026, 09:43 IST



