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Home Remedies: बिना सर्जरी पाइल्स ठीक करने का नेचुरल तरीका

Last Updated:May 17, 2026, 19:25 IST

Bawasir Ka Ilaj: बवासीर को ठीक करने के लिए हमेशा सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है. लेकिन शर्त है कि वक्त रहते खानपान में बदलाव किया जाए. इसके अलावा आयुर्वेद में गुलकंद के सेवन से लेकर नारियल तेल लगाने जैसे नेचुरल तरीके भी बताए गए हैं, जो कि पाइल्स को ठीक करने में मदद करता है.

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बवासीर होने पर क्या खाना चाहिए क्या नहीं? बिना सर्जरी पाइल्स ठीक करने का तरीकाZoom

बवासीर गर्मी में होने वाली एक कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम है. इसमें मलद्वार के आसपास सूजन, दर्द, खुजली के साथ कई बार खून आने जैसी परेशानियां भी होती है. कुछ लोगों में यह स्थिति इतनी बढ़ जाती है कि मलद्वार की नसें बाहर निकलने लगती हैं.

बवासीर होने का कारण खराब खानपान, लगातार कब्ज रहना, तनाव, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना माना जाता हैं. हालांकि गंभीर मामलों में बवासीर ठीक करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है. लेकिन आमतौर पर ये समस्या खानपान में बदलाव और नेचुरल हर्ब्स के सेवन से ठीक हो जाती है. यहां हम आपको ऐसे ही कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं.

बवासीर में खानपान क्यों जरूरी है?आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ यानी त्रिदोष का संतुलन बिगड़ने पर बवासीर जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं. इसलिए आयुर्वेदिक उपचार में इन दोषों को संतुलित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इसलिए बवासीर को ठीक करने के लिए सबसे पहले खानपान को सुधारना जरूरी माना जाता है.

बवासीर होने पर क्या खाएं क्या नहीं?बवासीर से पीड़ित लोगों को अधिक तेल-मसाले वाला भोजन और भारी खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि ये पाचन तंत्र को प्रभावित कर कब्ज बढ़ा सकते हैं. इसके स्थान पर हल्का, सुपाच्य और फाइबर युक्त भोजन लेना फायदेमंद होता है. हरे चने, साबुत अनाज, दलिया और ताजे फल-सब्जियां पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. साथ ही दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने से पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या कम होती है.

पाइल्स ठीक करने का नेचुरल तरीका आयुर्वेद में त्रिफला को पाचन सुधारने और शरीर की सफाई के लिए बेहद उपयोगी माना गया है. त्रिफला चूर्ण को आंवले के छिलके के साथ गर्म पानी में मिलाकर लेने से पेट अच्छी तरह साफ होता है और बवासीर के लक्षणों में राहत मिल सकती है. इसके अलावा गुलकंद का सेवन भी लाभकारी माना जाता है. यह शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत करता है और आंतों की सूजन कम करने में सहायक होता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में गुलकंद खाने से दर्द और जलन में राहत मिल सकती है.

खूनी बवासीर के लिए आयुर्वेदिक उपाययदि बवासीर में खून आने की समस्या हो रही हो, तो आयुर्वेद में लाजवंती के पौधे के रस को उपयोगी बताया गया है. यह सूजन कम करने और ब्लीडिंग रोकने में मदद कर सकता है. वहीं, सिट्ज बाथ भी एक सरल और प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है. गर्म पानी में त्रिफला, पीपल और गूलर की छाल का काढ़ा मिलाकर उसमें कुछ देर बैठने से गुदा क्षेत्र की सूजन, दर्द और जलन में राहत मिलती है. इसके बाद नारियल तेल जैसे प्राकृतिक तेल लगाने से आराम महसूस हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

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