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How Accurate West Bengal Exit Poll 2021: बंगाल में खिल गया था कमल, पर नतीजों में मैदान मार ले गईं ममता, जानिए 2021 में एग्जिट पोल के यूटर्न की कहानी

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा का चुनाव हो चुका है और लोग अब नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. वोटिंग खत्म होने के साथ ही इन सभी विधानसभाओं के अलग-अलग एग्जिट पोल भी सामने आ गए हैं. पश्चिम बंगाल को लेकर आए अलग-अलग एग्जिट पोल्स अलग-अलग कहानियां कह रहे हैं. 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीट चाहिए. पी-मार्क एग्जिट पोल में टीएमसी को 118-138, बीजेपी को 150-175 सीटें और अन्य को 2-6 सीटें दी गई हैं. कई सर्वे पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने का दावा कर रहे हैं. वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को पिछड़ता हुआ दिखाया जा रहा है. वोटिंग के बाद एग्जिट पोल अक्सर माहौल बना देते हैं. टीवी स्टूडियो में बहस तेज हो जाती है और जनता के बीच नतीजों की तस्वीर बनने लगती है. लेकिन कई बार यही तस्वीर हकीकत से बिल्कुल अलग निकलती है. पश्चिम बंगाल का 2021 चुनाव इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया था.

उस वक्त लगभग सभी एग्जिट पोल यह संकेत दे रहे थे कि राज्य में भाजपा बड़ी ताकत बनकर उभरेगी और सत्ता की चाबी उसके हाथ में जा सकती है. ‘कमल खिलने’ की बात जोर-शोर से कही जा रही थी. लेकिन जब असली नतीजे आए तो पूरा समीकरण बदल गया. मैदान वही था, खिलाड़ी वही थे, लेकिन जीत की कहानी अलग लिखी गई. इसने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.

294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीट चाहिए.

2021 के एग्जिट पोल बनाम नतीजों की पूरी कहानी

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 294 सीटें थीं. एग्जिट पोल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर दिखाई गई थी. कई सर्वे ने भाजपा को बढ़त भी दी थी. लेकिन नतीजों में तस्वीर पूरी तरह उलट गई. ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने भारी बहुमत हासिल किया और भाजपा उम्मीद से काफी पीछे रह गई.
यह सिर्फ आंकड़ों का फर्क नहीं था, बल्कि जमीन पर वोटिंग पैटर्न को समझने में बड़ी चूक थी. ग्रामीण वोट, महिला वोटर और स्थानीय मुद्दों को एग्जिट पोल सही तरह पकड़ नहीं पाए. यही वजह रही कि ‘कमल खिलने’ का अनुमान नतीजों में फीका पड़ गया.

असम: जहां एग्जिट पोल रहे करीब

असम में 2021 के एग्जिट पोल काफी हद तक सही साबित हुए थे. कुल 126 सीटों वाले राज्य में अधिकांश सर्वे ने भाजपा की वापसी का अनुमान लगाया था. हालांकि सीटों की संख्या में थोड़ा अंतर जरूर रहा, लेकिन नतीजों की दिशा वही रही. इससे यह साफ हुआ कि कुछ राज्यों में एग्जिट पोल बेहतर काम करते हैं, खासकर जहां राजनीतिक समीकरण ज्यादा स्थिर होते हैं.

तमिलनाडु: DMK की जीत का सटीक अनुमान

तमिलनाडु में एग्जिट पोल ने साफ संकेत दिया था कि द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम सत्ता में वापसी करेगी. हालांकि सीटों का अनुमान थोड़ा ज्यादा था, लेकिन नतीजों में DMK की जीत पूरी तरह सही साबित हुई. इससे यह भी पता चलता है कि जब माहौल साफ होता है, तो एग्जिट पोल की सटीकता बढ़ जाती है.

केरल: परंपरा टूटी, सर्वे सही निकले

केरल में हर चुनाव में सत्ता बदलने की परंपरा रही है. लेकिन 2021 में एग्जिट पोल ने इस ट्रेंड के टूटने का संकेत दिया था. नतीजों में भी यही हुआ और वाम मोर्चा लगातार दूसरी बार सत्ता में आया. यह एग्जिट पोल की बड़ी सफलता मानी गई.

पुडुचेरी: छोटे राज्य में सटीक भविष्यवाणी

पुडुचेरी में भी एग्जिट पोल ने सही दिशा दिखाई थी. अधिकांश सर्वे ने NDA की जीत का अनुमान लगाया था और नतीजे भी उसी के अनुरूप आए. यह दिखाता है कि छोटे राज्यों में जहां समीकरण सीमित होते हैं, वहां एग्जिट पोल अपेक्षाकृत ज्यादा सटीक होते हैं.

क्या एग्जिट पोल पर भरोसा करना चाहिए?

एग्जिट पोल एक संकेत जरूर देते हैं, लेकिन उन्हें अंतिम नतीजा नहीं माना जा सकता. 2021 बंगाल चुनाव इसका बड़ा उदाहरण है, जहां अनुमान और नतीजों में बड़ा फर्क देखने को मिला.

बंगाल में एग्जिट पोल क्यों गलत साबित हुए?

इसके पीछे कई कारण थे. स्थानीय मुद्दों की समझ, महिला वोटरों का रुझान और ग्रामीण इलाकों की वोटिंग पैटर्न को सर्वे सही तरीके से नहीं पकड़ पाए. इससे नतीजे पूरी तरह उलट गए.

2026 के एग्जिट पोल कितने भरोसेमंद हैं?

2026 के एग्जिट पोल रुझान जरूर दिखाते हैं, लेकिन 2021 का अनुभव बताता है कि अंतिम नतीजों तक इंतजार करना जरूरी है. राजनीतिक माहौल कभी भी बदल सकता है.

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