सीकर कैसे बन गया देश का नया ‘कोचिंग किंग’? कोटा को पछाड़ने वाले मॉडल पर अब उठ रहे बड़े सवाल

जयपुर. कभी देश की “कोचिंग कैपिटल” कहे जाने वाले कोटा की पहचान अब धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है. पिछले तीन-चार वर्षों में राजस्थान का सीकर शहर मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का नया सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. खासतौर पर NEET परीक्षा में सीकर के छात्रों के रिकॉर्डतोड़ परिणामों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. लेकिन NEET 2026 पेपर लीक मामले में सामने आए सीकर कनेक्शन ने इस चमकदार सफलता मॉडल पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं.
देशभर में डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच अब चर्चा इस बात की है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कोटा को पीछे छोड़ते हुए सीकर नया “कोचिंग किंग” बन गया. क्या यहां की पढ़ाई और फैकल्टी वास्तव में बेहतर है या फिर इसके पीछे कोई और वजह छिपी हुई है?
पीपराली रोड बनी “कोचिंग हब”
सीकर शहर की पीपराली रोड आज पूरी तरह कोचिंग संस्थानों की पहचान बन चुकी है. सड़क के दोनों ओर बड़े-बड़े कोचिंग सेंटर, हॉस्टल, लाइब्रेरी और छात्रों की भारी भीड़ इस बात का संकेत देते हैं कि शहर की अर्थव्यवस्था और पहचान अब कोचिंग उद्योग के इर्द-गिर्द घूमने लगी है. सीएलसी, पीसीपी (प्रिंस), गुरुकृपा, मेट्रिक्स और अन्य बड़े संस्थानों ने यहां विशाल नेटवर्क तैयार कर लिया है. सुबह से रात तक सड़क पर सिर्फ छात्र, कोचिंग बसें और पढ़ाई से जुड़ी गतिविधियां नजर आती हैं. पिछले दो वर्षों में हजारों छात्र कोटा छोड़कर सीकर पहुंचे हैं. अभिभावकों का मानना है कि यहां छोटे बैच, व्यक्तिगत फोकस और अपेक्षाकृत कम खर्च के कारण बेहतर माहौल मिलता है.
NEET रिजल्ट ने बढ़ाई चर्चा
सीकर की सबसे बड़ी ताकत उसके रिजल्ट माने जा रहे हैं. NEET 2024 के आंकड़े देखें तो सफलता प्रतिशत के मामले में सीकर ने कोटा को भी पीछे छोड़ दिया. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2024 में सीकर से 700 से अधिक अंक लाने वाले 149 छात्र रहे, जबकि कोटा में यह संख्या 74 रही. इसी तरह 650 से अधिक अंक पाने वाले छात्रों की संख्या भी सीकर में काफी अधिक रही. सीकर के कोचिंग संस्थान दावा करते हैं कि यहां पढ़ने वाले छात्रों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयन का प्रतिशत देश में सबसे अधिक है. पीसीपी कोचिंग का दावा है कि उसके हर पांचवें छात्र का सरकारी मेडिकल कॉलेज में चयन हुआ.
वहीं सीएलसी ने 2023 और 2024 में 1200 से 1500 छात्रों के सरकारी मेडिकल कॉलेज में चयन का दावा किया है. हालांकि इन दावों पर भी सवाल उठते रहे हैं. केंद्रीय उपभोक्ता आयोग कुछ संस्थानों पर भ्रामक विज्ञापन और गलत दावे करने को लेकर जुर्माना भी लगा चुका है.
रिजल्ट के आंकड़ों ने चौंकाया
2024 के NEET आंकड़े सीकर की तेजी से बढ़ती ताकत को दिखाते हैं.
सीकर NEET 2024
700+ अंक वाले छात्र- 149
650+ अंक- 2037
600+ अंक- 4297
550+ अंक- 6338
500+ अंक- 8225
वहीं कोटा के आंकड़े इससे पीछे नजर आए.
कोटा NEET 2024
700+ अंक- 74
650+ अंक- 1066
600+ अंक- 2599
550+ अंक- 4046
500+ अंक- 5436
यानी सफलता प्रतिशत में सीकर ने कोटा को पीछे छोड़ दिया.
CLC कोचिंग क्यों आई चर्चा में?
सीएलसी कोचिंग उस समय राष्ट्रीय चर्चा में आ गई, जब NEET 2026 के कथित पेपर लीक मामले में ऋषि बिवाल का नाम सामने आया. जांच में सामने आया कि वह इसी कोचिंग संस्थान से जुड़ा हुआ था. इससे पहले 2025 में चयनित बिवाल परिवार के पांच सदस्य भी इसी संस्थान की टेस्ट सीरीज से जुड़े बताए गए थे. इसके बाद सोशल मीडिया और छात्रों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि क्या कुछ कोचिंग संस्थानों को पहले से “गेस पेपर” या खास सवालों की जानकारी मिलती है.
हालांकि छात्रों और शिक्षकों ने ऐसे किसी भी आरोप से साफ इनकार किया है. जब छात्रों से पूछा गया कि क्या उन्हें कोई लीक पेपर या खास सवाल दिए गए थे, तो अधिकांश ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं था. उनका दावा था कि सीकर की सफलता का कारण लगातार टेस्ट, छोटे बैच और फैकल्टी का व्यक्तिगत मार्गदर्शन है.
कोटा से क्यों टूट रहा छात्रों का भरोसा?
एक समय था जब देशभर के छात्र सिर्फ कोटा का नाम जानते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कोटा में बढ़ती छात्र आत्महत्या की घटनाएं, भारी प्रतिस्पर्धा और महंगा खर्च छात्रों को दूसरे विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर रहा है. कोटा में एक छात्र का सालाना खर्च लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि सीकर में यही खर्च करीब ढाई से तीन लाख रुपये के बीच बताया जाता है. यही कारण है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सीकर बेहतर विकल्प बनता जा रहा है.
कोचिंग कारोबार के आंकड़े भी इस बदलाव की कहानी बताते हैं. कोटा में जहां पहले करीब 2.15 लाख छात्र पढ़ते थे, अब यह संख्या घटकर करीब 1 लाख रह गई है. दूसरी ओर सीकर में छात्रों की संख्या 55 हजार से बढ़कर करीब डेढ़ लाख तक पहुंच चुकी है. इसके साथ ही कोटा का कोचिंग कारोबार लगभग 6500 करोड़ रुपये से घटकर 3500 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया है, जबकि सीकर का कारोबार करीब 1000 करोड़ से बढ़कर 4000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है.
अब सवालों के घेरे में मॉडल
हालांकि अब NEET 2026 पेपर लीक मामले ने सीकर के पूरे कोचिंग मॉडल को जांच के दायरे में ला दिया है. एक कोचिंग फैकल्टी द्वारा कथित पेपर लीक की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाने की कोशिश और शिकायत नहीं लेने के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बड़े कोचिंग संस्थानों का स्थानीय सिस्टम पर प्रभाव बढ़ गया है. सीकर पहले भी बोर्ड परीक्षाओं में कथित नकल केंद्रों को लेकर चर्चा में रह चुका है. ऐसे में अब NEET पेपर लीक कनेक्शन ने बहस को और तेज कर दिया है.
हालांकि इन तमाम विवादों के बावजूद यह भी सच है कि सीकर ने बेहद कम समय में खुद को देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में स्थापित कर लिया है. हजारों छात्रों की सफलता और लगातार बढ़ती लोकप्रियता को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता. अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आने वाले समय के परीक्षा परिणाम ही यह तय करेंगे कि सीकर की सफलता सिर्फ बेहतर शिक्षा मॉडल का नतीजा है या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी हुई है.



