चीतों का पसंदीदा शिकार हैं चीतल, नौरादेही में बसाहट के लिए कान्हा-पेंच से आएंगे 1000 चीतल

Last Updated:May 16, 2026, 16:38 IST
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता लाने के लिए जोर-जोर से तैयारी चल रही है एक तरफ जहां वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उनके पसंदीदा भोजन चीतल को लाने की कवायद चल रही है, इसके लिए 1000 चीतल कान्हा और पेंच से शिफ्ट करने की अनुमति भी मिल गई है.
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता लाने के लिए जोर-जोर से तैयारी चल रही है एक तरफ जहां वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उनके पसंदीदा भोजन चीतल को लाने की कवायद चल रही है, इसके लिए 1000 चीतल कान्हा और पेंच से शिफ्ट करने की अनुमति भी मिल गई है.शाकाहारी वन्य प्राणी चीतल कुलांचे भरते हुए काफी तेज दौड़ते हैं और जो चीता होते है उन्हें अपना शिकार चेस करके पकड़ने की फितरत होती हैं ऐसे में इन वन्य प्राणियों का शिकार करना इन्हें काफी पसंद होता हैं.
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए चीतलों की संख्या बढ़ाई जा रही हैं. या यूँ कहे कि नौरादेही भी चीतलों की बसाहट के लिये नया केंद्र बनकर उभर रहा है. क्योंकि 2019 से ही यहां पर चीतल लाने की प्रक्रिया चल रही है अब तक 1300 चीतल आ चुके है लेकिन चीता प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 1000 चीतल लाने प्रबंधन ने पत्राचार किया था जिस पर से अनुमति मिल गई है अब कान्हा और पेंच से रेस्क्यू करने के बाद नौरादेही लाया जाएगा.
चीतों का पसंदीदा भोजन हैं चीतलमध्य प्रदेश में कूनो और गांधी सागर के बाद नौरादेही चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है. यहां पर अलग-अलग तरह के बड़ा बनाने का काम चल रहा है. सरकार के द्वारा 5 करोड़ की राशि भी आवंटित की गई है इधर जुलाई से अगस्त महीने के बीच में कूनो से ही चीता लाने की तैयारी है फिलहाल यहां पर बिल्ली प्रजाति में आने वाले तेंदुआ टाइगर तो मौजूद है ही लेकिन चीता आने के बाद यह देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व बन जाएगा. जहां बिल्ली प्रजाति के तीन सबसे बड़े वन्य जीव रहेंगे इसकी वजह से पर्यटकों का रोमांच और अधिक हो जाएगा. वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए तो यह किसी जन्नत की तरह होगा. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से विस्थापित हुए गांव की वजह से जो सैकड़ो एकड़ की जमीन खाली हुई है उनको जंगल में बदलने की कवायद जारी हैं.
कान्हा और पेंच से नौरादेही में 1000 चीतलनौरादेही के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि विस्थापन के बाद गांव की जगह में जंगल की तरह घास उगने में प्राकृतिक रूप से 5 से 7 साल का समय लगता है. इसलिए वैज्ञानिक तरीके से घास उगाई जा रही है. इसके लिए खेतों में घास के बीज डाले जा रहे है, साथ ही खर पतवार को नष्ट किया जा रहा है. जल्द घास के मैदान बन सके. इससे यहां शाकाहारी जानवर आएंगे. जंगल के परिसंचरण तंत्र का विस्तार होगा.डॉ रजनीश सिंह आगे बताते हैं कि बारिश के मौसम में जुलाई तक चीतों की शिफ्टिंग हो जाएगी. इसके अलावा, रिजर्व की जैव-विविधता को मजबूत करने के लिए 1000 चितल लाए जा रहे हैं. शिफ्टिंग की अनुमति मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट न केवल चीतों को नया घर देगा बल्कि पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को संतुलित और समृद्ध बनाने में भी मदद करेगा.
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Sagar,Madhya Pradesh



