National

समंदर का सीना चीरकर भारत बनाने जा रहा पोर्ट, क्या पानी के अंदर उतरेगी दुनिया? 

कल्पना कीजिए एक ऐसे विशालकाय ठिकाने की, जहां समंदर की उफनती लहरों के बीच लोहे के बड़े-बड़े जहाज तैरते हुए शहर की तरह नजर आएं. जी हां, भारत यह चमत्‍कार करने जा रहा है. ओड‍िशा के मुख्‍यमंत्री मोहन चरण मांझी ने बुधवार को बताया क‍ि गंजाम में एक डीप-सी पोर्ट और पारादीप में एक शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने जा रहे हैं. इन पर 50 हजार करोड़ का खर्च आएगा. लेकिन सवाल ये क‍ि क्या यह पोर्ट समंदर के अंदर, पानी के नीचे बनेगा?

अगर आप सोच रहे हैं कि जहाज पनडुब्बियों की तरह पानी के नीचे जाकर इस पोर्ट पर रुकेंगे, तो थोड़ा रुकिए! डीप-सी पोर्ट का मतलब पानी के अंदर बनी कोई गुप्त गुफा या अंडरवाटर स्ट्रक्चर नहीं होता. आम बंदरगाह समंदर के किनारे तट पर होते हैं, जहां पानी की गहराई कम होती है. दुनिया के जो सबसे विशालकाय मालवाहक जहाज होते हैं, वो इतने भारी होते हैं कि उन्हें तैरने के लिए 15 से 20 मीटर गहरे पानी की जरूरत होती है. अगर ये जहाज आम पोर्ट पर आएंगे, तो इनका निचला हिस्सा जमीन से टकरा जाएगा और जहाज वहीं फंस जाएगा.

इसलिए, डीप-सी पोर्ट या तो समंदर के तट से कई किलोमीटर दूर गहरे पानी में आर्टिफीश‍ियल आइलैंड बनाकर बनाए जाते हैं, या फिर मशीनों से समंदर के तल को इतना गहरा खोदा जाता है कि बड़े से बड़े जहाज सीधे पोर्ट तक आ सकें. यानी यह पोर्ट पानी के नीचे नहीं, बल्कि उथले किनारों को छोड़कर गहरे पानी के बीचों-बीच बनाया जाता है.

यह इतना खास क्यों है?

गंजाम का डीप-सी पोर्ट समंदर के बाहुबली जहाजों का नया अड्डा होगा. यहां दुनिया भर से आने वाले विशालकाय कार्गो जहाज रुकेंगे. इससे माल ढुलाई का खर्च और समय, दोनों बचेगा.

यह सिर्फ जहाजों के रुकने की जगह नहीं होगी, बल्कि यहां समंदर के नए सिकंदर बनाए जाएंगे. यहां बड़े जहाजों का निर्माण, मरम्मत और मेंटेनेंस का काम होगा. यह क्लस्टर ओडिशा को भारत का सबसे बड़ा समुद्री हब बना देगा.

मुख्यमंत्री मझी के मुताबिक, यह सिर्फ व्यापार नहीं है. यह समुद्री संसाधनों, पोर्ट, और मत्स्य पालन को मिलाकर एक ऐसी ब्लू इकोनॉमी तैयार करेगा, जो लाखों लोगों को रोजगार देगी.

दुनिया में और कहां हैं ऐसे अजूबे पोर्ट?

यांगशान डीप-वाटर पोर्ट (चीन): यह इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा चमत्कार है. शंघाई के तट से मीलों दूर गहरे समंदर में छोटे-छोटे द्वीपों को जोड़कर इसे बनाया गया है. इसे मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए समंदर के ऊपर 32 किलोमीटर लंबा पुल बनाया गया है!
पोर्ट ऑफ रॉटरडैम (नीदरलैंड): यह यूरोप का सबसे बड़ा डीप-सी पोर्ट है, जो दुनिया के सबसे बड़े जहाजों को आसानी से हैंडल कर सकता है.
ग्वादर पोर्ट (पाकिस्तान): चीन की मदद से अरब सागर में बना यह डीप-सी पोर्ट सामरिक और रणनीतिक नजरिए से बहुत अहम माना जाता है.
सिंगापुर पोर्ट: यह दुनिया के सबसे व्यस्त डीप-सी पोर्ट्स में से एक है, जो ग्लोबल ट्रेड का मुख्य ध्रुव है.

सिर्फ व्यापार नहीं, देश की सुरक्षा का अभेद्य किला

इस मेगा प्रोजेक्ट का ऐलान भुवनेश्वर में हुई 14वीं मल्टी-एजेंसी मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप मीटिंग के दौरान हुआ. यह मीटिंग अपने आप में ऐतिहासिक थी, क्योंकि पहली बार दिल्ली से बाहर ओडिशा में इसका आयोजन किया गया. आखिर ओडिशा ही क्यों? इसकी वजह है 575 किलोमीटर लंबी समुद्री लाइन. प्राचीन काल में यहीं के व्यापारियों ने 2000 साल पहले दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना दबदबा बनाया था. आज भी यह भारत की समुद्री सुरक्षा का सबसे अहम गेटवे है.

आज समुद्री सुरक्षा का मतलब सिर्फ तस्करों को पकड़ना नहीं है. मुख्यमंत्री मझी, राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक बिस्वजीत दासगुप्ता और डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने स्पष्ट किया कि आज असली खतरा साइबर हमलों, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और समुद्री आपदाओं से है.समंदर की रखवाली कोई एक एजेंसी नहीं कर सकती. इसलिए केंद्र और राज्य की सभी एजेंसियां मिलकर एक ऐसा सुरक्षा चक्र बना रही हैं, जिसे कोई दुश्मन भेद न सके.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj