दादाजी से सीखी कला, अब बच्चों को सिखा रहे मनीष, पेपर टॉयज से बढ़ा रहे क्रिएटिविटी

3000 डिजाइन बना चुके मनीष, कागज के खिलौनों से बच्चों को दे रहे सीख
Paper Toys Workshop Udaipur: उदयपुर में दिल्ली के मनीष कुमार पारंपरिक कागज के खिलौनों की कला को जीवित रखने के साथ बच्चों को रचनात्मक बनाने का काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि मोबाइल और गेमिंग के बढ़ते प्रभाव से बच्चों की क्रिएटिविटी कम हो रही है. ऐसे में वे स्कूलों में जाकर वर्कशॉप्स के जरिए बच्चों को कागज के आकर्षक खिलौने बनाना सिखाते हैं. मनीष ने यह कला अपने दादाजी से सीखी और अब तक 3000 से अधिक डिजाइन तैयार कर चुके हैं. उदयपुर में “कश्ती फाउंडेशन” के साथ मिलकर वे कई स्कूलों में कार्यशालाएं कर चुके हैं, जहां बच्चों की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है. उनके खिलौनों की खासियत यह है कि इनमें साइंस और मैथ्स के सिद्धांत शामिल होते हैं, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीखते हैं. यह पहल बच्चों को स्क्रीन टाइम से दूर रखकर उनके मानसिक विकास में मदद कर रही है.




