Met Gala 2026: जयपुर की शाही एंट्री, गौरवी और पद्मनाभ ने विरासत से बदल दिया फैशन का पूरा माहौल

Last Updated:May 06, 2026, 16:34 IST
आप दुनिया के कई कार्यक्रमों को देखते होंगे. शायद शामिल भी होते हों. हर कोई चाहता है कि बेस्ट लुक आए. आमतौर पर लोग इसेक लिए वेस्टर्न लुक को प्रिफर करते हैं. लेकिन दुनिया के सबसे बड़े फैशन शो मेट गाला में जयपुर के पूर्व राजघराने ने जो किया वो लोगों की नजर में आ गया. इवेंट में जब गौरवी कुमारी आईं तो लोग देखते रह गए. वे अपनी दादी गायत्री देवी की शिफॉन साड़ी से बना गाउन पहनकर आईं. वहीं सवाई पद्मनाभ सिंह ने शाही फूलगर कोट से सबका ध्यान खींच लिया.
दुनिया के सबसे बड़े फैशन शो में जयपुर का पूर्व राजघराना
जयपुर. 4 मई 2026 की रात. मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में भव्य मेट गाला आयोजित हुआ. दुनिया के सबसे बड़े फैशन मंच पर इस बार कुछ अलग देखने को मिला. आमतौर पर जहां अजीब और एक्सपेरिमेंटल फैशन चर्चा में रहता है, वहीं इस बार विरासत ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
जयपुर के पूर्व राजघराने से गौरवी कुमारी और सवाई पद्मनाभ सिंह ने जैसे ही एंट्री ली, माहौल बदल गया. दोनों का अंदाज बिल्कुल अलग नजर आया. कैमरे उनकी तरफ मुड़ गए और फैशन एक्सपर्ट्स भी कुछ पल के लिए शांत हो गए.
गौरवी कुमारी का लुक बना खासगौरवी कुमारी ने अपनी दादी गायत्री देवी की पुरानी शिफॉन साड़ी को चुना, जिसे नए अंदाज में पेश किया गया. मशहूर डिजाइनर प्रबल गुरंग ने इस साड़ी को गाउन में बदला. हल्के गुलाबी रंग के इस आउटफिट पर महीन काम किया गया था, जिसमें क्लासिक और मॉडर्न का सुंदर मेल नजर आया. उन्होंने अपने लुक को मोतियों, माणिक और अनकट डायमंड्स के साथ पूरा किया. पूरा स्टाइल पुरानी शाही पहचान को दर्शाता हुआ नजर आया, जिसमें बिना कुछ कहे श्रद्धांजलि का भाव भी दिखा.
राजकुमारी गौरवी कुमारी और उनकीक दादी महारानी गायत्री देवी
पद्मनाभ सिंह के लुक में दिखी शाही झलकवहीं सवाई पद्मनाभ सिंह का लुक भी कम चर्चा में नहीं रहा. उन्होंने खास फूलगर कोट पहना, जो गहरे नीले मखमल पर तैयार किया गया था. इस आउटफिट को बनाने में करीब 600 घंटे का समय लगा. कोट पर जरदोजी और आरी का बारीक काम किया गया था, जिसमें रेशम और दबका का इस्तेमाल हुआ. हर डिटेल हाथ से तैयार की गई, जिससे शिल्प कला साफ झलक रही थी.
उनके कपड़ों में सूर्य का खास डिजाइन भी शामिल था, जो जयपुर सिटी पैलेस से प्रेरित बताया जाता है. यह उनके सूर्यवंशी वंश की पहचान को दर्शाता है. इसके साथ उन्होंने जड़ाऊ और पोलकी हार पहना, जिससे पूरा शाही लुक और निखरकर सामने आया.
इस साल मेट गाला की थीम फैशन इज आर्ट रखी गई थी और ड्रेस कोड कॉस्ट्यूम आर्ट था. जयपुर के इन दोनों चेहरों ने इस थीम को अपने अंदाज में पेश किया. उन्होंने दिखाया कि पारंपरिक कला भी वैश्विक मंच पर अलग पहचान बना सकती है. राजस्थान की शिल्प कला को इस मंच के जरिए एक नई पहचान मिली.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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