जयपुर में जिंदा है मुगलकाल तक का संगीत इतिहास, विदेशों से आते लोग यह देखने

Last Updated:April 29, 2026, 13:48 IST
Rajasthan traditional music instruments : जयपुर के रामगढ़ मोड़ निवासी अब्दुल अजीज ने अपने पूर्वजों की विरासत को न सिर्फ संभाला, बल्कि उसे एक अनमोल खजाने में बदल दिया. उनके पास 100 साल पुराने करीब 1500 दुर्लभ संगीत वाद्ययंत्रों का अनोखा संग्रह है, जो भारतीय संगीत इतिहास की झलक दिखाता है. देश-विदेश से लोग इन वाद्ययंत्रों को देखने आते हैं और अब वे इनके संरक्षण के लिए संग्रहालय की मांग कर रहे हैं.
ख़बरें फटाफट
जयपुर: जयपुर कला संस्कृति, परंपराओं और विरासत से जुड़ा शहर है जहां लोगों ने आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों की विरासत को संभालकर रखा है जो उनके लिए खजाने की सबसे बड़ी पूंजी हैं ऐसे ही जयपुर के रामगढ़ मोड़ के रहने वाले अब्दुल अजीज जिनके पास आज 100 साल पुराने 1500 से बेहतरीन संगीत इंस्ट्रूमेंट्स है जो संगीत के इतिहास और संस्कृति की कई कहानियों को समेटे हुए हैं. जिन्हें उन्होंने अपनी तीसरी पीढ़ी के रूप में अपने घर और दुकान पर संजोकर रखा है.
लोकल-18 ने जयपुर के रामगढ़ मोड़ स्थित राजस्थान म्यूजियम आर्ट की दुकान पर पहुंच कर वर्षों पुराने संगीत इंस्ट्रूमेंट्स को लेकर अब्दुल अज़ीज़ से बात की तो वह बताते हैं कि जयपुर के राजा मानसिंह के समय से ही हमारे दादा-परदादा उनके नक्कार खाने में मुलाजिम हुआ करते थे संगीत वाद्ययंत्र बनाने, बजाने और उन्हें संजोकर रखने का काम करते थे लेकिन आज भी वह वर्षों से वह अपने पूर्वजों द्वारा एकत्र किए गए हजारों संगीत वाद्ययंत्र के संग्रह को आज भी उन्होंने संजोकर रखा है, जो बेहद अद्भुत संग्रह हैं.
दादा की विरासत से बना जुनून, अब पहचानअब्दुल बताते हैं कि उनके पूर्वजों के इस संगीत वाद्ययंत्र संग्रह को दादा परदादा के बाद उनके पिता और चाचा ने संभाला उनके चाचा अब्दुल सत्तार देशभर से पुराने इंस्ट्रूमेंट्स लाते थे और बड़े शोरूम में बेचते थे. उन्होंने ही मुझे कहा कि इसमें अच्छी कमाई है. उनकी सलाह से उन्होंने अपने पूर्वजों की विरासत को संभालकर रखना शुरू किया और फिर यह काम फिर धीरे-धीरे शौक से जुनून में बदल गया. आज उनके बेहतरीन वाघयंत्र के भव्य संग्रह को लोग देश-विदेश से लोग देखने आते हैं.
खाल, गाल, बाल प्रकार के 1500 संगीत इंस्ट्रूमेंट्स का खजाना लोकल-18 से बात करते हुए अब्दुल अजीज बताते हैं वैसे तो हजारों प्रकार के वाद्ययंत्र होते हैं जो प्राचीन समय से ही भारती संगीत कला की अलग-अलग विधाओं से जुड़े हैं जिनमें ये सभी वाद्ययंत्रों को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है जिनमें खाल, गाल और बाल इनमें सभी संगीत वाद्ययंत्र आ जाते हैं जिन्हें अलग-अलग प्रकार से बजाय जाता हैं. इन सभी खास संगीत वाद्ययंत्र में सबसे खास और पुराने रावण हत्था, कमायचा, सारंगी, ताउस, शहनाई, बांसुरी, नगाड़े जैसे अलग-अलग धातुओं से बने वाद्ययंत्र हैं जिनसे अलग-अलग संगीत की प्रवाह बहती हैं. अब्दुल बताते हैं कि उनके संग्रह में ख़ासतौर भारतीय शैली के वाद्ययंत्र हैं जिनमें मुगलकाल से लेकर अब तक के अत्याधुनिक वाद्ययंत्र तक शामिल हैं.
तानसेन से मुगलकाल तक, अनमोल साज संग्रहउनके पास वर्षों पुराने संगीत वाद्ययंत्र में संगीत सम्राट तानसेन का ताशा और रबाव, बहादुर शाह जफर के काल की सितार, पतले तारों से बनी किनारी हो या फिर मुगलकाल में जंग का ऐलान करने वाला साज नरसिंघा, यह सब आज भी सुरक्षित रखे हैं. इन सभी वाद्ययंत्रों को वह हर दिन सफाई और मरम्मत करते हैं. अब्दुल बताते हैं कि हर दिन विदेशों पर्यटकों के अलावा भारतीय संगीत पर शोध कर रहे विद्यार्थियों उनके इन वाद्ययंत्रों को देखने के लिए आते हैं. उनके घर से लेकर दुकान पर इतने वाद्ययंत्र उन्होंने एकत्र किए की रखने तक के लिए जगह नहीं हैं इसलिए वह चाहते हैं कि सरकार इन वाद्ययंत्रों का संग्रहालय बनाए ताकि इन वाद्ययंत्रों के बारे में आने बाली पीड़ियां भी जान सके.
बॉलीवुड फिल्मों तक मशहूर हैं जयपुर के वाद्ययंत्र लोकल-18 से बात करते हुए अब्दुल अजीज बताते हैं उनके संगीत वाद्ययंत्र आज भी वर्षों बाद संगीता की बेहतरीन धुन तैयार करते हैं जिसके चलते बॉलीवुड तक उनके वाद्ययंत्रों की डिमांड रहती है और बॉलीवुड की 20-25 फिल्मों में उनके इंस्ट्रूमेंट्स नज़र आ चुके हैं इनमें जोधा-अकबर, फारले, जीने नहीं दूंगा, उमराव जान और टीपू सुल्तान, ग्रेट मराठा,पीके जैसी फिल्में हैं. अब्दुल के अपने संगीत वाद्ययंत्रों को बॉलीवुड और बड़े संगीत कार्यक्रमों में उपयोग के लिए उन्हें किराए पर देते हैं. इनसे अलग जयपुर के यह खास वाद्ययंत्र आस्ट्रेलिया, स्पेन जैसे देशों के संग्रहालयों तक सजे हैं. अब्दुल बताते हैं की आज राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर उनके पास ऐसे खास वाद्ययंत्र हैं जो शायद देशभर कही देखने को नहीं मिलेंगे.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 29, 2026, 13:48 IST



