ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा: पश्चिम एशिया के बवाल में भारत का मास्टरस्ट्रोक, मोदी सरकार की कूटनीति से दुनिया हैरान

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पश्चिम एशिया तनाव: भारत का मास्टरस्ट्रोक, सरकार की कूटनीति से दुनिया हैरान
Last Updated:April 19, 2026, 22:23 IST
ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी हित और खाड़ी देशों से रणनीतिक संतुलन बनाना भारत की कूटनीतिक सूझबूझ: विशेषज्ञ
ईरान से सुरक्षित निकले भारत के आधे जहाज.
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में भारत के हित बहुत अहम हैं, क्योंकि वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा सुरक्षा दोनों ही इनसे जुड़ी हुई हैं. इस अफरातफरी और क्षेत्रीय संकट के समय में भारत की संतुलित और बहु-दिशात्मक कूटनीति न सिर्फ समझदारी भरी है, बल्कि जरूरी भी है.
एक विशेषज्ञ ने एक प्रमुख पोर्टल ‘मॉडर्न डिप्लोमेसी’ में लिखे अपने कॉलम में कहा, “नई दिल्ली ने कभी भी खाड़ी देशों के अंदरूनी या क्षेत्रीय मामलों में सीधे दखल नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष का खुलकर समर्थन किया है. वहीं, उन देशों ने भी भारत पर ऐसा दबाव नहीं डाला कि वह अपनी बहु-स्तरीय विदेश नीति छोड़ दे, खासकर इस गहरे विभाजित क्षेत्रीय माहौल में.”
रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे ही यह संघर्ष और बढ़ा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा उसकी विदेश नीति का सबसे अहम हिस्सा बन गई. भारत अपने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है. करीब 60 प्रतिशत कच्चा तेल और 50 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भारत को इन्हीं देशों से मिलती है. इसमें होर्मुज स्ट्रेट की भी बहुत अहम भूमिका है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत सरकार ने ईरान के साथ मिलकर जो समन्वित प्रयास किए और भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन उर्जा सुरक्षा’ के तहत जो सावधानी से कदम उठाए, उससे भारत के आधे से ज्यादा व्यापारिक जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सके.
कहा गया कि भारत के झंडे वाले एलएनजी और पीएनजी ले जाने वाले जहाजों को ईरान ने इसलिए अनुमति दी क्योंकि वह भारत को एक “मित्र देश” मानता है. इसका कारण भारत की कूटनीतिक कोशिशें और रणनीतिक संतुलन बताया गया है.
भारत और कतर जैसे बड़े ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकों और द्विपक्षीय संपर्कों ने भी यह दिखाया कि भारत अपने इन प्रमुख साझेदारों को कितना महत्व देता है. इन देशों ने भी भारत को भरोसा दिया कि वे आगे भी भारत को भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे.
रिपोर्ट के अनुसार, आज के जुड़े हुए वैश्विक दौर में जब किसी एक क्षेत्र का संकट हजारों किलोमीटर दूर तक असर डाल सकता है, तब संचार और सक्रिय कूटनीतिक संपर्क बहुत जरूरी हो जाते हैं, ताकि सभी के लिए लाभ की स्थिति बन सके और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत की जो सक्रिय कूटनीति है, उसने ठीक यही काम किया है.
About the AuthorRakesh Ranjan Kumar
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
April 19, 2026, 22:23 IST



