फलोदी स्टेशन बनेगा मारवाड़ की पहचान! आधुनिक सुविधाओं के बीच दिखेगा विरासत का भव्य संगम

Last Updated:May 03, 2026, 14:18 IST
Railway news : जोधपुर मंडल के फलोदी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास अब अंतिम चरण में है. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 18.15 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह स्टेशन आधुनिक सुविधाओं और मारवाड़ की पारंपरिक स्थापत्य कला का अनोखा संगम होगा. जुलाई तक पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट यात्रियों को नई अनुभवपूर्ण यात्रा देगा.
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जोधपुर: मरुधरा की मिट्टी में रची-बसी संस्कृति अब फलोदी रेलवे स्टेशन के नए रूप में भी दिखाई देगी. अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत हो रहा पुनर्विकास केवल ढांचागत बदलाव नहीं बल्कि आधुनिकता और मारवाड़ की पारंपरिक स्थापत्य कला के सुंदर संगम की एक सजीव अभिव्यक्ति बनता जा रहा है.स्टेशन पर 12 मीटर लंबे फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) के लिए गर्डर लॉन्चिंग का कार्य पूरा हो चुका है. लगभग 18.15 करोड़ रुपये की लागत से आकार ले रहा यह प्रोजेक्ट जुलाई तक पूर्ण होने की ओर अग्रसर है.
पुनर्विकसित स्टेशन भवन में जहां एक ओर अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर मारवाड़ की पारंपरिक वास्तुकला, स्थानीय रंगों, डिजाइनों और शिल्प तत्वों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी. यह प्रयास स्टेशन को केवल एक आवागमन केंद्र नहीं बल्कि क्षेत्रीय पहचान के प्रतीक के रूप में स्थापित करेगा.
फलोदी स्टेशन का पुनर्विकास अंतिम चरण मेंजोधपुर मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक करनी राम के अनुसार फलोदी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है. पुरानी स्टेशन बिल्डिंग में क्लैडिंग और नवीनीकरण अंतिम चरण में है, जबकि वेटिंग हॉल,वेटिंग रूम,स्टेशन अधीक्षक कक्ष और अन्य कक्षों का फिनिशिंग कार्य पूर्णता की ओर है. साथ ही सिग्नलिंग और विद्युत प्रणाली को सुव्यवस्थित कर दिया गया है और पेयजल व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित हो रही है.
इस तरह हो रहा यात्री सुविधाओं का विस्तारस्टेशन परिसर में विकसित हो रहे सर्कुलेटिंग एरिया, अलग प्रवेश-निकास मार्ग,पार्किंग, पोर्च, भव्य प्रवेश द्वार, कोच इंडिकेशन बोर्ड, प्लेटफॉर्म शेल्टर, दिव्यांगजन अनुकूल व्यवस्थाएं, आधुनिक शौचालय और वाटर बूथ ये सभी मिलकर यात्रियों को एक सहज और सुगम यात्रा का अनुभव देंगे.
यात्रा बनेगी एक अनुभवजब यह पुनर्विकास पूर्ण होगा तब फलोदी रेलवे स्टेशन केवल एक ठहराव नहीं रहेगा बल्कि यात्रियों के लिए वह एक ऐसा स्थल होगा जहां आधुनिक सुविधाओं के बीच मारवाड़ की संस्कृति की आत्मा भी सजीव रूप में अनुभव की जा सकेगी. स्टेशन एक ऐसा संगम बनेगा जहां अतीत की विरासत और भविष्य की संभावनाएं साथ-साथ चलती नजर आएंगी.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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