Purnia: ये तो चमत्कार हो गया! मासूम की आंत में फंसा था चिमटे का नुकीला स्प्रिंग, मौत के मुंह से खींच लाए डॉक्टर

Last Updated:June 21, 2026, 20:30 IST
Purnia News: पूर्णिया GMCH के डॉक्टरों ने चमत्कार किया है. 6 वर्षीय अर्णव आर्य के पेट से चिमटे का नुकीला स्प्रिंग चला गया थी. इसमें जरा भी चूक होती तो उसकी आंत कटने का डर था. लेकिन डॉक्टरों की टीम ने लैप्रोटोमी और कोलोनोस्कोपी से सुरक्षित बिना छेद के ही उसे निकाला. बच्चा अब खतरे से बाहर है. पढ़े पूरी स्टोरी.
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पूर्णिया जीएमसीएच में सफल सर्जरी के बाद खुशी का इजहार करती डॉक्टर की टीम.
पूर्णिया: खेल-खेल में मासूम बच्चों की छोटी सी लापरवाही कई बार उनकी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है. ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला पूर्णिया से सामने आया है. जहां एक 6 साल के बच्चे ने अनजाने में कपड़े सुखाने वाले चिमटे का तीखा और नुकीला स्प्रिंग निगल लिया. यह स्प्रिंग बच्चे के पेट में जाकर उसकी आंतों के बीच (इलियोसीकल जंक्शन) में इस कदर फंस गया कि जरा सी चूक मासूम की जान ले सकती थी. लेकिन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल यानी जीएमसीएच पूर्णिया के सर्जनों ने रविवार की छुट्टी के दिन जो कर दिखाया उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि डॉक्टरों को धरती का भगवान क्यों कहा जाता है.
कई अस्पतालों ने खड़े किए हाथ, GMCH बना तारणहारअररिया कोर्ट में पदस्थापित रामजी चौधरी का 6 वर्षीय बेटा अर्णव आर्य घर में खेल रहा था. इसी दौरान वह चिमटे का लोहे वाला स्प्रिंग निगल गया. बच्चे की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे लेकर रातभर कई अस्पतालों के चक्कर काटते रहे. जब कहीं से कोई उम्मीद नहीं दिखी. तो बदहवास परिजन उसे देर रात जीएमसीएच पूर्णिया लेकर पहुंचे. फिर वहां चमत्कार हुआ.
संडे को खुला इमरजेंसी ओटी, सी-आर्म मशीन से हुआ कमालमामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत संडे के अवकाश के बावजूद विशेष तौर पर ऑपरेशन थिएटर (OT) खुलवाया. सर्जरी विभाग के डॉ. तारकेश्वर कुमार और डॉ.विकास कुमार के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने मोर्चा संभाला. पेट के भीतर फंसे लोहे के स्प्रिंग की सटीक लोकेशन जानने के लिए आधुनिक सी-आर्म मशीन का सहारा लिया गया. इससे कमाल हो गया.
डॉक्टरों का मास्टरस्ट्रोक, बिना आंत में छेद किए निकाला स्प्रिंगइस सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि स्प्रिंग नुकीला था. अगर आंत में मामूली सा भी छेद हो जाता तो इंफेक्शन पूरे पेट में फैल सकता था. इससे बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो जाता. जीएमसीएच के डॉक्टरों ने अपनी दक्षता का परिचय देते हुए लैप्रोटोमी और कोलोनोस्कोपी तकनीक के कॉम्बिनेशन से बिना आंत में कोई छेद किए उस स्प्रिंग को सुरक्षित बाहर खींच निकाला.
अब खतरे से बाहर है अर्णव, अधीक्षक ने थपथपाई पीठसफल ऑपरेशन के बाद बच्चे के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए. जीएमसीएच के अधीक्षक डॉ.संजय कुमार ने डॉक्टरों की टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह बेहद जटिल और रिस्की सर्जरी थी. डॉक्टरों की तत्परता और बेहतर टीमवर्क की वजह से एक मासूम की जान बचाई जा सकी है. हमारा अस्पताल अब ऐसी क्रिटिकल सर्जरी के लिए पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस है. डॉक्टरों के मुताबिक अर्णव अब पूरी तरह खतरे से बाहर है. उसकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है. जल्द ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.
About the AuthorAmit ranjan
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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