पूर्वांश डाकलिया जोधपुर सीबीएसई टॉपर | Purvansh Dakalia CBSE 12th Success Story

Last Updated:May 15, 2026, 06:24 IST
Purvansh Dakalia CBSE 12th Success Story: जोधपुर के डीपीएस स्कूल के छात्र पूर्वांश डाकलिया ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड में 98.2% अंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है. पूर्वांश ने अपनी सफलता के लिए निरंतरता और अपनी गलतियों से सीखने की प्रवृत्ति को श्रेय दिया है. उन्होंने बताया कि उनके भाई सारांश ने उन्हें पढ़ाई के दौरान हमेशा प्रेरित किया. पूर्वांश भविष्य में नौकरी के बजाय अपना स्टार्टअप शुरू कर बिजनेस की दुनिया में कुछ अलग करना चाहते हैं. उनकी इस उपलब्धि से शहर के अन्य छात्र भी नई ऊर्जा और प्रेरणा ले रहे हैं.
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Purvansh Dakalia CBSE 12th Topper: हाल ही में घोषित हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं के परीक्षा परिणामों ने ‘नीली नगरी’ जोधपुर को गौरवान्वित किया है. इस बार जोधपुर के विद्यार्थियों ने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय देते हुए शहर का नाम रोशन किया है. इसी कड़ी में पाल क्षेत्र स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) के छात्र पूर्वांश डाकलिया ने 98.2 प्रतिशत अंक हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है. पूर्वांश की इस सफलता ने न केवल उनके स्कूल और परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जोधपुर संभाग के विद्यार्थियों के लिए एक नई प्रेरणा पेश की है. अपनी इस शानदार जीत पर खुशी जाहिर करते हुए पूर्वांश ने बताया कि उन्हें अच्छे परिणाम की आशा जरूर थी, लेकिन 98.2 प्रतिशत का आंकड़ा उनकी अपनी अपेक्षाओं से भी अधिक सुखद रहा.
पूर्वांश का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे और कुछ गलतियाँ भी कीं. लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करने के बजाय उनसे सीख ली और अपनी रणनीति में सुधार किया.
निरंतरता और मेहनत: पूर्वांश के अनुसार, किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘कंसीस्टेंसी’ यानी निरंतरता है.
मेंटल बैलेंस: वह बताते हैं कि उन्होंने कभी खुद पर पढ़ाई का बोझ नहीं डाला. नियमित रूप से 2 से 3 घंटे की पढ़ाई और परीक्षा के समय अतिरिक्त मेहनत ही उनकी सफलता का आधार रही. पढ़ाई के बीच दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताकर उन्होंने मानसिक संतुलन बनाए रखा.
भाई और परिवार का अटूट सहयोगपूर्वांश ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और विशेष रूप से अपने भाई सारांश को दिया है. उन्होंने साझा किया कि पढ़ाई के कठिन दौर में जब भी उनका मनोबल गिरता या तनाव महसूस होता, तो उनके भाई ने एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए उन्हें लगातार प्रेरित किया. परिवार के इसी सकारात्मक माहौल और बिना किसी दबाव के मिली स्वतंत्रता के कारण ही वे आज इस मुकाम पर पहुँच पाए हैं.
भविष्य का लक्ष्य: स्टार्टअप की दुनिया में कदमजहाँ ज्यादातर मेधावी छात्र पारंपरिक नौकरियों की ओर भागते हैं, वहीं पूर्वांश के सपने कुछ अलग और बड़े हैं. भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वे आगे चलकर अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं. हालांकि वे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की पढ़ाई को एक साइड गोल के रूप में देख रहे हैं, लेकिन उनका असली जूनून खुद का नया बिजनेस खड़ा करना है. उनके परिवार का अपना व्यवसाय है, लेकिन पूर्वांश अपने भाई के साथ मिलकर उद्यमिता (Entrepreneurship) के क्षेत्र में कुछ नया और क्रांतिकारी करना चाहते हैं. उनकी इस कामयाबी से न केवल उनके घर-आँगन में खुशी का माहौल है, बल्कि पूरे जोधपुर शहर को उन पर नाज है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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