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Rajasthan SDM Kajal Meena Arrested For Taking Bribe

Last Updated:April 17, 2026, 17:24 IST

Rajasthan SDM Kajal Meena Arrested For Taking Bribe: राजस्थान करौली के नादौती उपखंड में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए SDM काजल मीणा समेत तीन लोगों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. 60 हजार रुपये की रिश्वत के साथ 4 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी जब्त हुई है. मामले की जांच लगातार जारी है.

राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी काजल मीणा का नाम कभी एक होनहार, मेहनती और तेजतर्रार अफसर के रूप में लिया जाता था, लेकिन आज वही नाम एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में घिरा हुआ है. करौली जिले के नादौती उपखंड में तैनात एसडीएम काजल मीणा को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस कार्रवाई में उनके रीडर दिनेश सैनी और वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ भी शामिल पाए गए. एक समय जिस अफसर की पहचान काबिलियत से थी, अब वही पहचान सवालों के घेरे में खड़ी है.

काजल मीणा की शुरुआती जिंदगी संघर्ष और पढ़ाई के प्रति समर्पण की कहानी रही है. सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर क्षेत्र से निकलकर उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मंडी तक का सफर तय किया. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद उनके सामने करियर के कई विकल्प खुले, लेकिन उन्होंने सिर्फ नौकरी करने के बजाय खुद को बेहतर साबित करने का रास्ता चुना. पढ़ाई के दौरान ही उनकी पहचान एक गंभीर और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा के रूप में बनने लगी थी.

आईआईटी से निकलने के बाद काजल मीणा ने दिल्ली में दूरसंचार विभाग में सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में काम किया. इसके बाद उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ में भी अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं. यह वह दौर था जब उनका करियर स्थिर और सुरक्षित माना जा सकता था. वर्ष 2017 में उनका चयन जूनियर इंजीनियर पद पर भी हुआ, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उन्होंने इन सबके बावजूद संतोष नहीं किया. उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाकर बड़ा बदलाव लाने की इच्छा थी.

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यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. काजल मीणा ने अपनी नौकरी छोड़कर राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की. यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि स्थायी नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षा की अनिश्चितता को अपनाना जोखिम भरा कदम होता है. लेकिन उन्होंने यह जोखिम उठाया और मेहनत के दम पर 2024 में आरएएस परीक्षा पास कर ली. यह उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था, जिसने उन्हें एक नई पहचान दी.

आरएएस बनने के बाद उन्हें पहली पोस्टिंग प्रतापगढ़ में मिली, हालांकि बाद में 28 अक्टूबर 2025 को उन्हें नादौती (करौली) में एसडीएम के पद पर नियुक्त किया गया. यहां उन्होंने कार्यभार संभालते ही एक सक्रिय अधिकारी के रूप में काम करना शुरू किया. कम समय में ही उनकी छवि एक सख्त और फैसले लेने वाली अफसर की बनने लगी थी. लोगों को उम्मीद थी कि वह प्रशासन में सकारात्मक बदलाव लाएंगी, लेकिन यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चला.

इसी बीच एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके पूरे करियर की दिशा बदल दी. एसीबी को शिकायत मिली कि नादौती उपखंड में जमीन की फाइनल डिक्री जारी करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही है. जांच में सामने आया कि यह मांग काजल मीणा के स्तर से की जा रही थी और उनके रीडर के जरिए पूरी प्रक्रिया चलाई जा रही थी. पहले एक लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन बाद में 60 हजार रुपये में सौदा तय हुआ. यह वही पल था, जहां एक सफल करियर ने गलत रास्ता पकड़ लिया.

एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद ट्रैप की योजना बनाई. 16 अप्रैल को परिवादी को उपखंड कार्यालय बुलाया गया. जैसे ही पैसे दिए गए, रीडर ने राशि लेकर वरिष्ठ सहायक को सौंप दी. इसी दौरान मोबाइल पर हुई बातचीत में काजल मीणा की सहमति भी सामने आई. एसीबी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया. तलाशी के दौरान 60 हजार रुपये की रिश्वत राशि के साथ 4 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी बरामद हुई, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया.

आज हालात यह हैं कि एक समय प्रेरणा बनने वाली यह अफसर अब जांच और आरोपों के बीच खड़ी है. एसीबी ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पूछताछ जारी है. जिस अधिकारी ने मेहनत और संघर्ष से ऊंचाई हासिल की, वही अब अपने फैसलों के कारण विवादों में घिर गई है. यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस मोड़ की भी है जहां सफलता और लालच के बीच की दूरी बहुत कम रह जाती है.

काजल मीणा की यह पूरी यात्रा एक सीख भी देती है. एक ओर यह दिखाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है, वहीं दूसरी ओर यह भी बताती है कि एक गलत कदम पूरे करियर को संकट में डाल सकता है. आज उनका नाम एक उदाहरण के रूप में लिया जा रहा है, लेकिन यह उदाहरण प्रेरणा से ज्यादा एक चेतावनी बन गया है कि जिम्मेदारी के पद पर बैठा व्यक्ति यदि सीमा लांघता है, तो उसका असर दूर तक जाता है.

First Published :

April 17, 2026, 16:15 IST

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