Rajasthan

अशोक गहलोत और बीजेपी दोनों का मिशन बने सचिन पायलट, दिन-ब-दिन आ रहे निशाने पर, जानें असल वजह

Last Updated:April 28, 2026, 10:05 IST

Sachin Pilot Vs. Ashok Gehlot : राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2028 के आने से करीब ढाई साल पहले ही सियासी चालें तेज हो गई है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच बरसों से चल रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर से तेज होती नजर आने लग गई है. दोनों के बीच चल रहे इस शीत युद्ध पर सूबे की सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी नजरें गड़ाए हुए और वो मौके की तलाश कर रही है. गहलोत लगातार पायलट पर एक के बाद एक सियासी तीर चला रहे हैं. लेकिन पायलट पलटवार की बजाय सुरक्षित तरीके से उनसे बचने का प्रयास कर रहे हैं. जानें ताजा हालात. अशोक गहलोत और बीजेपी दोनों का मिशन बने सचिन पायलट, जानें असल वजहZoomअशोक गहलोत सचिन पायलट पर तंज कसने का एक भी मौका नहीं छोड़ते.

जयपुर. पूर्व सीएम अशोक गहलोत और बीजेपी दोनों का निशाना इन दिनों सचिन पायलट हैं. एक तरफ राजस्थान कांग्रेस में फिर पायलट की चुनौती को ध्वस्त करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक के बाद एक तीर अपने तरकश से निकाल कर चला रहे हैं. वे पायलट को उकसाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. लेकिन सचिन पायलट इस जंग को अलग तरीके से लड़ रहे हैं. पायलट गहलोत के उकसावे पर पलटवार से बच रहे हैं. दूसरी तरफ बीजेपी गहलोत-पायलट वॉर को अवसर भी मान रही और चुनौती भी.

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक दिन पहले ही पायलट को उकसाते हुए हमला बोला था और कहा कि अब वे कांग्रेस में ही रहेंगे. कांग्रेस छोड़कर नहीं जाएंगे. गहलोत ने जयपुर में मिडिया से बात करते हुए पायलट पर तंज कसा और कहा कि पायलट देख चुके कांग्रेस से दूर रहने का अंजाम क्या होता है? बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधामोहनदास अग्रवाल के पायलट को लेकर दिए एक बयान को गहलोत ने ऐसे लपका मानो इसी का इंतजार था. अग्रवाल के बयान के जबाब में गहलोत ने पायलट पर तंज कसते हुए कि अब उनकी दोनों टांगें कांग्रेस में ही है और रहेगी.

गहलोत कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं
दो दिन पहले ही दिल्ली में कांग्रेस दफ्तर में जब गहलोत पहुंचे तो सचिन पायलट आगे बढ़कर गहलोत की कार के पास गए और हाथ मिलाया. लेकिन फिर भी गहलोत तंज कसना नहीं भूले और मीडिया कि तरफ मुखातिब होते हुए कि कहा कि आप कहते हैं पायलट और मेरे बीच बनती नहीं है. पायलट का हाथ पकड़ते हुए उन्होंने कहा कि देखो कितनी बनती है. दिल्ली के इस सीन से सात दिन पहले ही नागौर के डीडवाना में गहलोत ने पायलट पर हमला बोलते हुए एक कार्यक्रम में मानेसर प्रकरण को याद दिलाया और कहा कि कैसे उनकी सरकार गिराने के लिए कांग्रेस विधायकों को बहकाकर मानेसर ले जाया गया था.

समर्थक चाहते हैं पायलट को मिले सूबे की कमानगहलोत अपनी पिछली सरकार के राजनीतिक संकट पर बीजेपी का नाम लेकर कई दफा पायलट पर हमले बोल चुके हैं. गहलोत पायलट को उकसाने का एक भी मौका नहीं चूक रहे हैं. लेकिन पायलट पलटवार से बच रहे हैं. वजह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी. सचिन पायलट जानते हैं कि गहलोत खेल बिगाड़ने की कोशिश में है. दरअसल सचिन पायलट के समर्थक इस कोशिश में है कि कांग्रेस हाईकमान सूबे में पार्टी कमान फिर पायलट को सौंपी दे. वर्तमान में इस कुर्सी पर गोविंद सिंह डोटासरा लंबे समय से काबिज हैं.

बीजेपी की मुश्किल भी पायलट है
अगर पायलट को कमान मिलती है तो 2028 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस फिर से सचिन पायलट की अगुवाई में ही लड़ेगी. गहलोत जानते हैं कि अगर पायलट को फिर कमान मिली तो उनके लिए चौथी बार राजस्थान का सीएम बनने का सपना फिर बिखर सकता है. दूसरी तरफ बीजेपी की मुश्किल भी पायलट है. ये भी एक वजह रही कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन का सोमवार को पहला राजस्थान दौरा और राज्य में पहला कार्यक्रम सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में हुआ.

बीजेपी नेता अपना रहे हैं दोहरी रणनीतिटोंक में बीजेपी नेताओं की दोहरी रणनीति रही. एक तरफ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड ने पायलट की तारीफ कर कहा कि वो अच्छे और सच्चे नेता हैं लेकिन गलत पार्टी में है. राठौड़ ने पायलट को लेकर कहा कि वो राष्ट्र प्रथम की भावना से जुड़ें यानी बीजेपी से. क्योंकि बीजेपी नेता भी पायलट की चुनौती को नहीं भूल रहे हैं. इसलिए बीजेपी के राजस्थान प्रभारी राधामोहन दास ने पायलट पर निशाना साधते हुए कहा उनकी एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी किधर है पता नहीं. उन्होंने पायलट को बाहरी और बहरूपिया कहा.

सचिन की क्राउड पुलर छवि और युवाओं में लोकप्रियता है बीजेपी के लिए चिंताबीजेपी के नेता जानते और मानते हैं कि अगर पायलट को कांग्रेस में कमान मिली तो राजस्थान में सरकार को रीपीट कराने में पायलट चुनौती बन सकते हैं. वजह पायलट की क्राउड पुलर छवि, युवाओं में लोकप्रियता और पिछला रिकॉर्ड उनके लिए चुनौती बना हुआ है. 2018 में कांग्रेस ने सचिन पायलट की अगुवाई में वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था. इसलिए एक तरफ बीजेपी गहलोत और पायलट के बीच दरार बढ़ते देखना चाहती है तो दूसरी तरफ गहलोत पायलट की मजबूत दीवार को गिराने के लिए दम लगा रहे हैं.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

April 28, 2026, 10:04 IST

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