सिंगर मुकेश का वे कालजयी गाना, जिसे सेंसर बोर्ड ने किया बैन, 2-2 फिल्मों में हुआ रिजेक्ट, उसी ने रचा इतिहास

Last Updated:May 04, 2026, 22:59 IST
Singer Mukesh Timeless Song : वैसे तो बॉलीवुड में गानों के रिजेक्ट होने की कई कहानियां हैं. ऐसा ही एक किस्सा बॉलीवुड के इतिहास में दर्ज है, जब कालजयी गाने को तीन-तीन फिल्मों से रिजेक्ट किया गया. फिल्म बनी, गाना रिकॉर्ड हुआ, फिर अचानक उसे घटिया बताते हुए फिल्म से निकाल दिया गया. दर्द के गानों के बादशाह मुकेश ने यह गाना गाया था. इस गाने को दो-दो बार रिजेक्ट किया गया. डायरेक्टरों ने उसे अपनी फिल्म में रखने से इनकार कर दिया था. सेंसर बोर्ड ने भी दो बार इस गाने को पास करने से इनकार कर दिया था. वही गाना जब नए-नवेले डायरेक्टर के हाथ लगा तो उसने बहुत रिस्क लेकर फिल्म में गाना रखवाया. इसी गाने ने इतिहास रच दिया. यह गाना कौन सा था, और वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा…..
हर धुन की अपनी एक तकदीर होती है. कालजयी गानों के साथ कई बार ऐसा हो चुका है. कई बार तो ऐसे गाने दो-तीन फिल्मों से रिजेक्ट हुए. ऐसा ही एक गाना मुकेश की आवाज में रिकॉर्ड हुआ था. सेंसर बोर्ड ने इसके बोल को अश्लील करार देते हुए बैन कर दिया. इस तरह दो फिल्मों से यह गाना रिजेक्ट हुआ. फिर बॉलीवुड इंडस्ट्री में एंट्री लेने वाले नए नवेले डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने अपनी फिल्म ‘छलिया’ में इस गाने का इस्तेमाल किया. गाहे ने इतिहास रच दिया. आज भी जब-जब बादल गरजते हैं, तो यह गाना संगीत प्रेमियों की जुबान पर आ जाता है. गाना बारिश की पहचान बन गया. वो गाना था : डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा.<br />कैसे इस गाने ने रुपहले पर्दे का सफर तय किया, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा….
कहानी की शुरुआत 1958 से होती है. रतन पिक्चर्स के बैनर तले बाबूभाई मिस्त्री के निर्देशन में एक फिल्म ‘मदारी’ बन रही थी. यह एक एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसमें रंजन, चित्रा, जयश्री गडकर, मनहर देसाई जैसे सितारे काम कर रहे थे. फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी- आनंद जी ने कंपोज किया था. कल्याण जी- आनंद जी की यह दूसरी फिल्म थी. दोनों बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. दोनों ने इससे पहले ‘सट्टा बाजार’ में संगीत दिया था.
‘मदारी’ फिल्म में कुल 7 गाने थे. ये गाने इंदीवर, फारुख कैसर, पंडित मधुर, कमर जलालाबादी और प्यारेलाल संतोषी ने लिखे थे. चार गाने लता मंगेशकर ने गाए थे. दो गाने मुकेश-लता ने गाए थे. फिल्म का एक गाना ‘दिल लूटने वाले जादूगर, अब मैंने तुझे पहचाना है, नजरें तो उठा के देख जरा, तेरे सामने ये दीवाना है’ आज भी पॉप्युलर है. इसी फिल्म में एक और गाना मुकेश की आवाज में था.
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इस गाने को रिकॉर्ड और शूट किया गया लेकिन बाद में फिल्म से हटा दिया गया. सेंसर बोर्ड ने गाने की कुछ पंक्तियों पर आपत्ति जताई थी. बोर्ड का कहना था कि या तो इस गाने को हटा दीजिए या फिर इन अंतरों को बदल दीजिए. फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी ऐसे में डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने बहुत ज्यादा जोखिम नहीं लिया. गाने को बोल बदलना और उसे फिर से शूट करना खर्चीला काम था. ऐसे में उन्होंने गाने को फिल्म से हटा दिया.
शंकर-जयकिशन को गाना बहुत पसंद था लेकिन वो इंडस्ट्री में नए थे, सो मन मारकर रह गए. वो अपनी धुन ऐसे ही जाया नहीं होने देने चाहते थे. 1959 में ही एक और फिल्म ‘घर घर की बात’ में कल्याण जी-आनंद जी को म्यूजिक देने का अवसर मिला. इस फिल्म में वो अपना गाना इस्तेमाल नहीं कर सके. फिल्म में गाने के लिए सिचुएशन ही नहीं थी. दोनों फिल्में कम समय के अंतराल में रिलीज हुई थीं.
फिर साल 1960 में कल्याण जी – आनंद जी को एक फिल्म ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ मिली. यह धर्मेंद्र की डेब्यू फिल्म मानी जाती है. दोनों ने इस फिल्म में गाने को रखने पर विचार किया लेकिन डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी को गीत पसंद नहीं आया. उन्होंने गाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. गाना सेंसर बोर्ड से बैन हो चुका था, इसलिए वो कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे.
हर गाने की अपनी डेस्टिनी होती है, ऐसा ही कुछ ‘डम डम डिगा-डिगा’ गाने के साथ हुआ. शंकर-जयकिशन को बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा. 1960 में ही एक और फिल्म ‘छलिया’ में संगीत देने का मौका मिला. ‘छलिया’ फिल्म मे निर्देशक मनमोहन देसाई थी. राज कपूर -नूतन लीड रोल में थे. उन्होंने बरसात की रात पर जैसे ही गाने की डिमांड की, शंकर-जयकिशन ने तत्काल मुकेश का गाना ‘डम डम डिगा’ मनमोहन देसाई को सुना दिया. उन्हें गाना पसंद आया. अब टेंशन इस बात की थी कि गाने के बोल का क्या किया जाए. गीतकार कमाल जलालाबादी ने गाने को फिर से लिखा. उन्होंने मुखड़े को ज्यों का त्यों रखा लेकिन अंतरे बदल दिए.
मुकेश जी को फिर से स्टूडियो में बुलाया गया. गाने के अंतरे फिर से रिकॉर्ड करवाए गए. राज कपूर ने मस्त मौला अंदाज में यह गाना शूट हुआ. मजेदार बात यह है कि जब गाना सेंसर बोर्ड के पास पहुंचा तो फिर से अटक गया. सेंसर बोर्ड ने फिर से अंतरों पर आपत्ति जताई. मजबूरन गीतकार कमर जलालाबादी ने फिर से अंतरों में बदलाव किया. गाना फिर से रिकॉर्ड हुआ. ‘देखो लुटारा आज लुट गया, हाय अल्ला’ की जगह ‘देखो रे, आज कोई लुट गया’ कर दिया गया. इतना ही नहीं ‘तेरी कसम तू मेरी जान है, मुखड़ा भोलाभाला, छुपके डाका डाला, जाने तू कैसे मेहमान है’ की लाइन वाले अंतरे को हटाकर ‘सनम हम माना गरीब हैं, नसीबा खोटा ही सही, बंदा छोटा सही, दिल ये खजाना है प्यार का, हाय अल्ला’ वाला नया अंतरा डाला गया. गाना कितना बड़ा हिट साबित हुआ, आप सब जानते हैं. यह गाना छलिया फिल्म और बरसात की पहचान बन गया.



