किसान लिखमाराम की सफलता | Farmer Likhamaram Success Story Nagaur

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“मिट्टी से सोना उगाने वाला किसान!” पढ़िए नागौर के लिखमाराम की कहानी
Last Updated:April 19, 2026, 09:53 IST
Farmer Likhamaram Success Story Nagaur: नागौर के टांकला गांव के लिखमाराम मेघवाल ने मात्र 1.29 एकड़ जमीन में एकीकृत खेती कर मिसाल पेश की है. कोरोना में दुकान बंद होने के बाद उन्होंने फार्मपौंड और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाई. आज वे अपनी जमीन पर अमरूद, अनार और बेर के बाग के साथ-साथ अश्वगंधा, जीरा और इसबगोल जैसी औषधीय फसलें उगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं. जैविक खाद का उपयोग कर उन्होंने लागत कम की है और अब वे दूसरे किसानों को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहे हैं.
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Farmer Likhamaram Success Story Nagaur: राजस्थान का नागौर जिला अपनी कम वर्षा और गिरते भू-जल स्तर के लिए जाना जाता है, जहाँ कई इलाकों में पानी 1000 फीट की गहराई तक जा चुका है. ऐसे विषम हालातों में टांकला गांव के लिखमाराम मेघवाल ने खेती की एक नई इबारत लिखी है. लिखमाराम पहले गांव में कपड़ों की दुकान चलाते थे, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया. आर्थिक तंगी के उस दौर में उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी पैतृक 1.29 एकड़ जमीन पर लौटने का फैसला किया. शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक मूंग और बाजरा उगाने की कोशिश की, लेकिन जब आय कम रही तो उन्होंने वैज्ञानिक और एकीकृत कृषि पद्धति (Integrated Farming System) को अपनाने का साहसिक निर्णय लिया.
पानी की विकट कमी को देखते हुए लिखमाराम ने सबसे पहले अपने खेत में 30×30 मीटर का एक ‘फार्मपौंड’ (खेत तलाई) तैयार किया. इसमें उन्होंने बारिश के पानी को संग्रहित किया, ताकि साल भर सिंचाई की जा सके. पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखने के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई (बूंद-बूंद पद्धति) और मल्चिंग तकनीक का सहारा लिया. इन नवाचारों से न केवल 40 प्रतिशत तक पानी की बचत हुई, बल्कि मिट्टी की नमी भी बरकरार रही. इसी तकनीक के दम पर उन्होंने शुष्क क्षेत्र में ताइवानी गुलाबी अमरूद, कश्मीरी बेर, अनार, अंजीर और सहजन जैसे फलों का बाग तैयार कर दिया, जो रेगिस्तानी इलाकों में एक बड़ी चुनौती माना जाता है.
औषधीय खेती और मिश्रित फसल प्रणालीलिखमाराम ने अपनी छोटी सी जमीन का अधिकतम उपयोग करने के लिए बहुआयामी मॉडल अपनाया है. उन्होंने खेत की मेड़ों पर 400 सागवान के पेड़ लगाए हैं, जबकि पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर बाजरा, जीरा, इसबगोल और अश्वगंधा जैसी फसलें उगा रहे हैं. पहली बार अश्वगंधा की खेती से ही उन्हें करीब एक लाख रुपये की आय हुई, वहीं जीरा और इसबगोल से सालाना डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है. खास बात यह है कि लिखमाराम रासायनिक खाद के बजाय वर्मी कम्पोस्ट और वेस्ट डिकम्पोजर का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरी है और फसल की लागत में भी भारी कमी आई है.
किसानों के लिए प्रेरणा और सम्मानलिखमाराम की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन उन्हें सम्मानित कर चुका है. आज उनके खेत पर कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों का ताँता लगा रहता है. लिखमाराम ने साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो मात्र सवा एकड़ जमीन भी एक परिवार की खुशहाली के लिए पर्याप्त है. वे अब लखनऊ से औषधीय खेती का विशेष प्रशिक्षण लेकर अपने दायरे को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
April 19, 2026, 09:53 IST



