प्रकृति की गोद में वन्यजीवों का स्वर्ग! सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व बना राजस्थान का नया इको-टूरिज्म हॉटस्पॉट

Last Updated:May 04, 2026, 11:54 IST
Jalore News: सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व अब इको-टूरिज्म के रूप में तेजी से उभरता हुआ एक प्रमुख आकर्षण बन रहा है. यहां प्राकृतिक वातावरण के बीच वन्यजीवों को सुरक्षित संरक्षण मिल रहा है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिल रहा है. यह क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी खास बन रहा है. हरियाली, पहाड़ी इलाकों और शांत वातावरण के कारण यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के करीब खुद को महसूस करते हैं. प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं.
यहां पाई जाने वाली जैव विविधता इसे एक समृद्ध वन क्षेत्र बनाती है. विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियां और वन्य जीव इस रिजर्व की पहचान हैं. पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.
राजस्थान का पहला भालू अभयारण्य, 107 वर्ग किलोमीटर में फैली हरियाली के बीच बसा सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व आज प्रकृति की एक अनमोल धरोहर बनकर उभर रहा है. जालोर जिले की जसवंतपुरा पहाड़ियों में स्थित यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए खास पहचान रखता है.
इस कंजर्वेशन रिजर्व को जसवंतपुरा भालू अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है. यह खास तौर पर स्लॉथ बीयर यानी सुस्त भालुओं के संरक्षण के लिए विकसित किया गया है. यहां का प्राकृतिक वातावरण और घना वन क्षेत्र भालुओं के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करता है, जिससे उनकी संख्या और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होती हैं.
Add as Preferred Source on Google
वन विभाग द्वारा यहां संरक्षण और निगरानी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अवैध शिकार और जंगल कटाई को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को सुरक्षित माहौल मिल सके. साथ ही, स्थानीय लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे इस धरोहर के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभा सकें.
अरावली पर्वतमाला की गोद में बसे इस क्षेत्र की भौगोलिक बनावट इसे और भी विशेष बनाती है. ऊंची-नीची पहाड़ियां, घने जंगल और प्राकृतिक जल स्रोत यहां के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं. यही वजह है कि यह क्षेत्र न केवल भालुओं बल्कि कई अन्य वन्यजीवों और पक्षियों का भी घर बना हुआ है.
पर्यटन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र धीरे-धीरे लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और वन्यजीवों की मौजूदगी इसे एक बेहतरीन इको-टूरिज्म स्पॉट बनाती है. यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के करीब जाकर एक अलग ही अनुभव महसूस करते हैं.



