Entertainment

1986 की वो फिल्म, श्रीदेवी के सामने फीका पड़ गया था पद्मिनी कोल्हापुरे का स्टारडम, खिलौना बनकर रह गए राज बब्बर

Last Updated:May 12, 2026, 19:51 IST

साल 1986 में श्रीदेवी और जितेंद्र की फिल्म ‘सुहागन’ रिलीज हुई थी.ये एक रोमांटिक पारिवारिक ड्रामा फिल्म है. फिल्म का निर्देशन के . राघवेंद्र राव ने किया था. फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे भी नजर आई थी. लेकिन उनका किरदार श्रीदेवी के सामने फीका पड़ गया था. 

नई दिल्ली. जितेंद्र और श्रीदेवी ने अपने करियर में कई हिट फिल्मों में काम किया है. लेकिन साल 1986 में उनकी फिल्म सुहागन की कहानी ने तो लोगों को हैरान ही कर दिया था. फिल्म में राज बब्बर भी नजर आए थे. लेकिन वह फिल्म में खिलौना मात्र बनकर रह गए थे.

फिल्म सुहागन की कहानी, दो बहनों जानकी और ज्योति पर बेस्ड है, जो अपने माता-पिता के साथ रहती हैं और रामू (जितेंद्र ) जो उसी गांव में रहता है और खेती करके अपना जीवन यापन करता है. रामू जानकी से प्यार करता है, लेकिन जानकी किसी इंजीनियर से शादी करना चाहती हैं.

फिल्म में जितेंद्र यानी रामू भी श्रीदेवी यानी जानकी को पसंद करता है. फिल्म में लव ट्रायंगल भी दिखाया गया है. फिल्म की कहानी असली मोड़ जब लेती हैं, जब ज्योति रामू से ज्यादा अमीर लड़के यानी मूरली (राज बब्बर} को पसंद करती हैं

Add as Preferred Source on Google

ज्योति और जानकी के पिता जमनादास (प्राण) रामू को बहुत पसंद करते हैं और वह जानकी की शादी रामू से करना चाहते हैं. क्योंकि वह एक अच्छा इंसान है और वह बड़ा दहेज नहीं मांगेगा. लेकिन दूसरी ओर जानकी को राज बब्बर पर क्रश होता है.

लेकिन पिता प्राण के दबाव में आकर जानकी रामू से शादी कर लेती हैं और दोनों की एक लड़की भी हो जाती है. वहीं राज बब्बर जो कि श्रीदेवी को बहुत प्यार करता था, वह नशे की लत में डूब जाता है. बेटी होने के बाद जानकी को अहसास होता है कि उसने जितेंद्र से शादी करके गलत फैसला किया है.

यूं तो जितेंद्र और श्रीदेवी की फिल्म के गाने ब्लॉकबस्टर हिट हुआ करते थे. लेकिन फिल्म सुहागन के गाने कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए थे. फिल्म का संगीत बप्पी लहरी ने दिया था. यह फिल्म तमिल फिल्म एनकेयो केट्टा कुरल (1982)का रीमेक है.

पूरी फिल्म की कहानी जानकी श्रीदेवी और जितेंद्र रामू के इर्द-गिर्द घूमती हैं. फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे जैसी बड़ी स्टार का स्टारडम तो कहीं कहीं फिल्म में श्रीदेवी के सामने फीका पड़ता नजर आता है.

इतना ही नहीं फिल्म में पद्मिनी से भी कम स्पेस तो राज बब्बर को दिया गया. वह तो इस फिल्म में खिलौना मात्र बनकर रह गए थे.फिल्म के बीच में राज बब्बर का किरदार खुदकुशी कर लेता है और वहीं उनका रोल भी खत्म हो जाता है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj