वो महान संगीतकार, नाटको में निभाए महिला किरदार, बॉलीवुड को दिए 2 सिंगिंग सुपरस्टार

Last Updated:April 24, 2026, 03:31 IST
पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने मंगेशकर परिवार की संगीत परंपरा की नींव रखी. उनका जन्म 1900 में गोवा के मंगेशी गांव में हुआ था. उन्होंने महज पांच साल की उम्र में संगीत सीखना शुरू कर दिया था. वे मराठी रंगमंच के एक दिग्गज कलाकार और गायक थे. उस दौर में उन्होंने नाटकों में महिला पात्रों की यादगार भूमिकाएं निभाईं. 1918 में उन्होंने अपनी ‘बलवंत संगीत नाटक मंडली’ बनाई. उन्होंने फिल्मों का निर्माण भी किया और उनमें अभिनय किया. उनके अनुशासन ने ही लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे महान कलाकार दिए. 1942 में सिर्फ 41 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उनका योगदान आज भी संगीत जगत के लिए अमूल्य है.
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संगीतकार ने ‘कृष्णार्जुन युद्ध’ जैसी फिल्में भी बनाई थीं.
नई दिल्ली: पंडित दीनानाथ मंगेशकर भारतीय संगीत की एक ऐसी नींव हैं, जिस पर आज पूरा मंगेशकर परिवार गर्व से खड़ा है. उनका जन्म 29 दिसंबर 1900 को गोवा के खूबसूरत मंगेशी गांव में हुआ था. उनके घर का माहौल शुरू से ही भक्ति और संगीत से भरा था. उनके पिता मंदिर में पुजारी थे और मां भजन गाती थीं. दीनानाथ ने संगीत की पहली सीख अपनी मां से ही ली थी. संगीत के प्रति उनकी दीवानगी ऐसी थी कि महज पांच साल की उम्र में उन्होंने सीखना शुरू कर दिया था. इतनी छोटी उम्र में उनकी सुर-ताल पर पकड़ देखकर बड़े-बड़े उस्ताद दंग रह जाते थे. उन्होंने कई गुरुओं से संगीत की शिक्षा ली और उसे अपने जीवन में उतार लिया.
दीनानाथ मंगेशकर कम उम्र में ही मराठी रंगमंच (थिएटर) की दुनिया में आ गए. उस समय नाटकों में महिलाएं काम नहीं करती थीं. इसलिए पुरुष कलाकार ही औरतों के किरदार निभाते थे. दीनानाथ ने भी कई नाटकों में महिला पात्रों की भूमिका निभाई. उनकी आवाज और अदाकारी इतनी जबरदस्त थी कि दर्शक झूम उठते थे. साल 1918 में उन्होंने अपनी खुद की नाटक कंपनी ‘बलवंत संगीत नाटक मंडली’ बनाई. इसके जरिए उन्होंने कई शानदार नाटक पेश किए, जो काफी मशहूर हुए. उन्होंने सिर्फ मराठी ही नहीं, बल्कि हिंदी और उर्दू नाटकों में भी अपनी छाप छोड़ी. 1930 के दशक में उन्होंने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया और ‘कृष्णार्जुन युद्ध’ जैसी फिल्में बनाईं.
संगीत को बनाया तपस्यादीनानाथ का निजी जीवन चुनौतियों से भरा रहा. उन्होंने दो शादियां कीं और अपने परिवार को हमेशा कला से जोड़े रखा. उनके बच्चों के नाम आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. लता मंगेशकर, आशा भोसले, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर ने संगीत की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया, उसके पीछे उनके पिता की ही दी हुई शिक्षा और अनुशासन है. दीनानाथ ने अपने बच्चों को सिखाया कि संगीत सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि एक तपस्या है. यही वजह है कि आज पूरा देश उनके परिवार की गायकी का दीवाना है.
41 साल की आयु में हुआ निधनअफसोस की बात यह है कि 24 अप्रैल 1942 को महज 41 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उनका जीवन भले ही छोटा रहा, लेकिन उन्होंने इतनी कम उम्र में जो हासिल किया, वह सदियों तक याद रखा जाएगा. आज भी मराठी रंगमंच और भारतीय संगीत की बात उनके बिना अधूरी है.
About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor
अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
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Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
April 24, 2026, 03:31 IST



