हादसे ने छीने हाथ, जज्बे ने दी उड़ान! पैरों से पढ़कर आगे बढ़ी लीला, अब मिला संघर्षों का इनाम

Last Updated:April 17, 2026, 13:07 IST
Leela Kanwar Inspiring Story: बाड़मेर की लीला कंवर ने बचपन में करंट हादसे में दोनों हाथ खो दिए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. पैरों को ही कलम बनाकर पढ़ाई जारी रखी और कंप्यूटर सीखकर आत्मनिर्भर बनने की राह पकड़ी. हाल ही में उन्हें 11 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मिली, जिससे उनके सपनों को नई उड़ान मिली है. हालांकि बैंक धोखाधड़ी और शिक्षा में बाधाओं जैसी चुनौतियों का भी उन्हें सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ती रहीं.
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बाड़मेर. कहते हैं कि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई काम मुश्किल नहीं होता. ऐसा ही जज्बा रखती है सरहदी बाड़मेर जिले के हापो की ढाणी की लीला कंवर. लीला कंवर महज 8 साल की थी, जब करंट की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ कट गए. परिजनों ने इलाज करवाया और उसके बाद लीला घर में ही समय गुजारने लगी, लेकिन पढ़ने लिखने का जज्बा इतना है कि लीला ने अपने पैरों को ही कलम बना दिया.
बचपन में एक हादसे में दोनों हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. पैरों को ही अपनी कलम बनाया पढ़ाई जारी रखी और अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उन्हें 11 लाख रुपए की आर्थिक मदद मिली है जो उनके सपनों को नई उड़ान देगी. इतना ही नहीं बदलते दौर के साथ खुद को आगे बढ़ाने के लिए लीला ने कंप्यूटर भी सीखा. आज वे कीबोर्ड पर अपने पैरों से टाइप कर सकती हैं और अपने भविष्य को खुद आकार दे रही हैं.
निजी बैंक में जमा करवाई राशि तो उम्मीदों पर फिर गया पानी
दरअसल, लीला जब चौथी क्लास में थी तो वह अपने खेत में बच्चों के साथ खेल रही थी. इस दौरान विद्युत पोल के तार की चपेट में आ गई. जिसके बाद उसके दोनों हाथ काटने पड़े. डिस्कॉम ने इस हादसे के बाद लीला को साढ़े चार लाख का मुआवजा भी दिया. निजी बैंक के एजेंट के झांसे में आकर लीला के पिता भूरसिंह ने मुआवजा राशि नवजीवन क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी बैंक में जमा करवाई थी, लेकिन बैंक डूब गई और बैंक के एजेंट ने जमा राशि देने से साफ इनकार कर दिया.
BSTC में कॉलेज ने इस वजह से कर दिया रिजेक्ट
लीला कंवर बताती है कि बचपन में एक हादसे ने मेरे दोनों हाथ छीन लिए पर मेरी पढ़ने-लिखने की जिद नहीं छीन सका. मैंने पैरों से लिखना सीखा और पैर ही मेरी कलम बन गए है. अब वह ग्रेजुएशन कर चुकी है, लेकिन बीएसटीसी का फॉर्म भरकर जब कॉलेज में एडमिशन हुआ तो यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि आपके दोनों हाथ नहीं है.
जोगेंद्र सिंह चौहा ने लीला को दिए 11 लाख का चेक
बाड़मेर के रहने वाले भामाशाह जोगेंद्र सिंह चौहान और राजेंद्र सिंह चौहान ने लीला कंवर को अपने पिता स्व. तनसिंह चौहान की जयंती के अवसर पर 11 लाख रुपये का चैक सुपुर्द किया है. इस अवसर पर संघ प्रमुख मनोहर लाल बंसल, अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेन्द्र सिंह चांदावत, एसडीएम यशार्थ शेखर, सामाजिक न्याय एव अधिकारिता विभाग के उप निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह, चूली सरपंच उम्मेदाराम मेघवाल सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
April 17, 2026, 13:07 IST



