अक्षय तृतीया का बड़ा रहस्य उजागर! इसी तिथि से शुरू हुआ था महाभारत का लेखन, जानें क्यों है 20 अप्रैल खास

करौली. हिंदू धर्म में वैशाख मास में आने वाला अक्षय तृतीया का पर्व विशेष महत्व रखता है. यह एक ऐसी तिथि है जिसमें किसी भी शुभ कार्य को बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है. अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन विष्णु भगवान के छटवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. लेकिन इस बार अक्षर तृतीया को लेकर लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति है. कई लोग अक्षय तृतीया को 19 अप्रैल यानी आज मना रहे हैं तो कई लोग 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाएंगे.
ऐसे में लिए जानते हैं कि साल 2026 में अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल या फिर 20 अप्रैल कब मानना रहेगा शुभ.? करौली की ज्योतिषी पं. दीपक शर्मा का कहना है कि इस बार अक्षय तृतीया को 20 अप्रैल को मनाना ही सबसे ज्यादा शुभ और पंचांग के अनुसार सर्वश्रेष्ठ रहेगा.
शास्त्रों और तिथि के अनुसार अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख मास की तीसरी तिथि को मनाया जाता है. शास्त्रों में तिथि के बारे में बताया गया है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य, दान, जप – तप और भजन क्षय यानी नष्ट नहीं होता है. अक्षय तृतीया की तिथि स्वयं में एक सिद्ध तिथि है. पंडित दीपक शर्मा बताते हैं कि इस दिन आंखें बंद कर किसी भी शुभ कार्य को कर सकते हैं. जिन लोगों का विवाह का मुहूर्त पूरे साल में नहीं है वह इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह कर सकते हैं.
अक्षय तृतीया की तिथि से कई पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई है. मान्यता है इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था इसलिए इसे भगवान परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा की भी आराधना इस दिन बेहद शुभ मानी जानी है. इस तिथि पर मां अन्नपूर्णा देवी की विशेष कृपा के लिए अन्नदान जरूर करना चाहिए. हिंदू धर्म के महान ग्रंथ महाभारत का भी लेखन भी महर्षि वेदव्यास जी ने गणेश जी से इसी तिथि से प्रारंभ करवाया था. इसलिए भी इस तिथि महत्व बढ़ जाता है.
द्रोपती को इसी दिन हुई थी अक्षय पात्र की प्राप्तिअक्षय तृतीया के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपति को अक्षय पात्र दिया था. यें एक ऐसा पात्र था जिसमें से कभी भोजन खत्म नहीं होता था. इसलिए इस तिथि को समृद्धि और कभी ख़त्म होने वाले सौभाग्य की तिथि कहा जाता है.
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा का दिन है यें पंडित दीपक शर्मा कहते हैं कि अक्षय तृतीया का दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी कृपा का दिन है. इसलिए भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी और भोलेनाथ की आराधना इस दिन जरूर करनी चाहिए. अक्षय तृतीया भगवान विष्णु मां लक्ष्मी और भोलेनाथ तीनों की दिव्य और दुर्लभ कृपा प्राप्ति का दिन है.
यें कार्य है माने जाते है शुभअक्षय तृतीया पर कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हे करना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन, नया भवन, भूमि पूजन, सोना – चांदी खरीदने सहित नया निवेश करना बेहद शुभ रहता है. संभव हों तो इस दिन सोना – चांदी और तांबा जरूर खरीदें.
इन कार्यों से बचेंअक्षय तृतीया पर कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए. इस दिन एक तो झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए और नशे से बचना चाहिए.इस दिन किसी का अपमान नहीं करें और कटु वचन नहीं बोले और विशेष रूप से किसी से धन उधार नहीं लें.
धन वृद्धि के लिए करें उपाय येंपंडित दीपक शर्मा बताते हैं कि धन वृद्धि के लिए इस दिन कुछ उपाय जरूर करना चाहिए. जिसमें पीले कपड़े में हल्दी की गांठ बांधकर इस घर की तिजोरी में रखना चाहिए. मंदिर में श्री यंत्र विस्थापित कर सकते हैं. कन्याओं को भोजन कारण और गाय को हरा चारा भी खिलाएं.
भगवान विष्णु मां लक्ष्मी और भोलेनाथ को समर्पितइस बार अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू पंचांग और ज्योतिषीय से गणना के अनुसार 20 अप्रैल यानि कल सोमवार को है. इस दिन सुबह उठकर स्नान के बाद पीले वस्त्र या सफेद वस्त्र धारण करें. यें तिथि भगवान विष्णु मां लक्ष्मी और भोलेनाथ को समर्पित है इसलिए ओम महालक्ष्मी नमः, ओम नमो भगवते वासुदेवाय और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप ज्यादा से ज्यादा करें. दान का भी इस दिन विशेष महत्व है इसलिए जल से भरा घड़ा, सत्तू, फल, छाता और कपड़ो का दान जरूरतमंद व्यक्तियों को जरूर करें.



