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जिस फिल्म को फ्लॉप होने के डर से रिलीज नहीं कर रहा था प्रोड्यूसर, उसी ने हिलाकर रख दिया बॉक्स ऑफिस, रचा इतिहास

Last Updated:May 04, 2026, 18:24 IST

Bollywood Superhit film : साल था 1978. अप्रैल का महीना था. फिल्म का ट्रायल देखकर प्रोड्यूसर के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. उन्होंने यकीन हो गया फिल्म फ्लॉप हो जाएगी. उन्होंने राइटर और डायरेक्टर से फिल्म को बचाने का उपाय पूछा. ऐसे में एक राइटर ने मजाक में कहा कि फिल्म को रिलीज ही ना किया जाए. खैर प्रोड्यूसर की चिंता का हल निकालने का प्रयास शुरू हुआ. फिल्म के कुछ सीन फिर से शूट किए गए. फिर वो चमत्कार हुआ, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. फिल्म का सिर्फ एक्शन सीन टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. फिल्म ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…….

‘दीवार’, ‘शोले”अमर अकबर एंथोनी’, ‘हेराफेरी’ और परवरिश ने अमिताभ को बॉक्स ऑफिस का चमकता सितारा बना दिया था. ऐसे में अमिताभ बच्चन पर प्रोड्यूसर गुलशन राय ने दांव लगाया था. राइटर सलीम-जावेद ने फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी. फिल्म का नाम था : त्रिशूल. त्रिशूल फिल्म का डायरेक्शन यश चोपड़ा ने ही किया था. रोमांस के बादशाह यश ने ही ‘दीवार’ फिल्म को डायरेक्टर किया था. ‘त्रिशूल’ फिल्म का ट्रायल देखकर प्रोड्यूसर गुलशन राय ने कहा कि फिल्म पक्का फ्लॉप हो जाएगी. फिर उन्होंने सलीम-जावेद और यश चोपड़ा से फिल्म को बचाने का उपाय पूछा. थोड़ी देर सन्नाटा पसरा रहा. फिर तय हुआ कि हीरो अमिताभ बच्चन के एक-दो एक्शन सीन फिल्म में डाले जाएं. फिल्म की 10 दिन शूटिंग फिर से हुई. इसी एक्शन ने पासा पलट दिया.

प्रोड्यूसर गुलशन राय को नए प्रिंट दिखाएगे. अमिताभ बच्चन की ‘एंग्री यंगमैन’ वाली इमेज के अनुरूप ही फिल्म में नए सीन जोड़े गए. गुलशन राय को नए प्रिंट देखकर यकीन हो गया कि अमिताभ बच्चन फिल्म को डूबने नहीं देंगे. गुलशन राय फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रहे थे. राजीव राय ने आगे चलकर विश्वात्मा, त्रिदेव और मोहरा जैसी फिल्में बनाईं.

त्रिशूल सीन में सबसे ज्यादा चर्चा एंबुलेस सीन की हुई. यह सीन फिल्म की शूटिंग कंप्लीट होने के बाद डाला गया था. यह एक्शन सीन कालजयी साबित हुआ. कई फिल्मों में इस सीन का रेफरेंस दिया गया. इसी एक सीन ने फिल्म को मैसिव हिट कराया. माउथ पब्लिसिटी का असर ऐसा हुआ कि लोग सुबह से सिनेमाघरों के बाहर टिकट खरीदने के लिए लाइन में लग जाते थे. एंबुलेंस सीन वाले फिल्म के पोस्टर भी छपवाए गए थे. इन पोस्टर्स ने अमिताभ के प्रशंसकों के बीच एक अलग ही लेवल की दीवानगी पैदा की. वो फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों में उमड़ पड़े. 

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‘त्रिशूल’ फिल्म के एक्शन सीन और डायलॉग ‘दीवार’ फिल्म की तर्ज पर लिखे गए. पूरी फिल्म में उन्हें रोमांटिक टच नहीं दिया गया. रोमांस के बादशाह यश चोपड़ा थे. उन्होंने रोमांटिक गाने और सीन हेमा मालिनी, शशि कपूर, सचिन पिलगांवकर और पूनम ढिल्लो पर फिल्माए. फिल्म का एक गाना ‘मुहब्बत बड़े काम की चीज है’ सिर्फ अमिताभ बच्चन-राखी पर फिल्माया गया लेकिन गाने के बोल एंटी-रोमांटिक थे. वो मुहब्बत को बेकार और बेदाम बताते हैं.

मजेदार बात यह है कि 1976 में सलीम-जावेद ने त्रिशूल फिल्म की स्टोरी सबसे पहले सदाबहार अभिनेता जीतेंद्र को सुनाई थी. जीतेंद्र फिल्म में पैसा लगने के लिए तैयार भी हो गए थे. जीतेंद्र ने दुलाल गुहा को बतौर डायरेक्टर साइन भी कर लिया था लेकिन राजेंद्र कुमार भी इसी स्क्रिप्ट को लेकर जब डायरेक्टर दलाल गुहा के पास पहुंच गए. दलाल गुहा स्क्रिप्ट पढ़ते ही समझ गए कि दोनों फिल्मों की कहानी सेम है. राजेंद्र कुमार और जीतेंद्र का आमना-सामना हुआ. मीटिंग में यह साफ हुआ कि दोनों के पास सलीम-जावेद की ही स्क्रिप्ट है. जीतेंद्र-राजेंद्र दोनों ही फिल्म बनाने पर अड़ गए लेकिन दलाल गुहा ने दोनों के लिए काम करने से इनकार कर दिया और साइनिंग अमाउंट लौटा दिया.

फिर सलीम-जावेद प्रोड्यूसर गुलशन राय से मिले. गुलशन राय ने यश चोपड़ा से फिल्म बनाने को कहा. सलीम-जावेद के कहने पर ही अमिताभ बच्चन को फिल्म में लिया गया. मजेदार बात यह भी है कि संजीव कुमार उन दिनों विदेश में थे. जब गुलशन राय ने उन्हें फिल के लिए फोन किया तो उन्होंने अमिताभ बच्चन के बराबर पैसे मांगे थे. उन्होंने कहा था कि अगर अमिताभ इंडस्ट्री के सुपर स्टार हैं तो मुझसे बड़ा ‘बाप’ इंडस्ट्री में नहीं है. प्रोड्यूसर गुलशन राय ने उनकी मांग पूरी की. संजीव कुमार ने इस फिल्म में यादगार अभिनय किया.

1978 में ‘त्रिशूल’ के बाद अमिताभ बच्चन की एक और फिल्म ‘डॉन’ भी रिलीज हुई थी. डॉन के लिए अमिताभ को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. एक हफ्ते के अंतराल में दोनों फिल्में रिलीज हुई थीं. कहा जाता है कि दर्शक एक थिएटर से एक फिल्म देखकर दूसरे में अमिताभ की दूसरी फिल्म देखने के लिए घुस जाते थे. फिल्म की कहानी बदले की थी. अकेली मां अपने बच्चे की परवरिश करती है. बड़ा होकर वही बच्चा अपने पिता से बदला लेने के इरादे से उसका बिजनेस तबाह कर देता है. वैसे त्रिशूल फिल्म का बेसिक आइडिया 1968 में आई धर्मेंद्र-तनूजा-जयललिता की फिल्म ‘इज्जत’ से ही लिया गया था. इस फिल्म का एक गाना ‘ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, हम क्या करें’ आज भी उतना ही पॉप्युलर है. इस फिल्म में धर्मेंद्र, तनूजा के अलावा जयललिता, बलराज साहनी और महमूद ने भी काम किया था. इस फिल्म में भी धर्मेंद्र अपनी मां के साथ हुई नाइंसाफी का बदला लेने के लिए घर से निकलते हैं.

‘त्रिशूल’ फिल्म का म्यूजिक खय्याम ने कंपोज किया था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे. दिलचस्प तथ्य यह भी कि गीतकार साहिर लुधियानवी की निजी जिंदगी की फिल्म से मेल खाती थी. वो पर्सनल लाइफ में अपनी मां से प्यार करते थे जबकि पिता से नफरत करते थे. फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. यह 1978 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

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