बच्चों के नाम सुधारने निकली सरकार… लिस्ट आई तो लोगों ने पूछा, ये मजाक है या फैसला?

जयपुर. राजस्थान में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था से ज्यादा लोगों की भावनाओं और समझ को झकझोर दिया है. सरकार ने बच्चों के नाम बदलने या सुधारने के लिए सार्थक नाम अभियान शुरू किया, मकसद था अच्छे और सम्मानजनक नाम सुझाना. लेकिन जैसे ही इस अभियान के तहत जारी नामों की सूची सामने आई, लोगों के बीच उल्टा ही गुस्सा और हैरानी फैल गई. अभिभावक पूछ रहे हैं कि अगर नाम सुधारने हैं, तो ऐसे नाम क्यों दिए जा रहे हैं जो खुद ही अटपटे और अजीब लगते हैं.
मामला सीधा है. शिक्षा विभाग ने कहा कि जिन बच्चों के नाम पुराने, नकारात्मक या शर्मिंदगी वाले हैं, उनके लिए नए नाम सुझाए जाएंगे. स्कूलों के जरिए अभिभावकों को यह सूची दिखाई जाएगी और उनसे कहा जाएगा कि वे इन नामों में से कोई बेहतर नाम चुन सकते हैं. लेकिन इस लिस्ट में जो नाम सामने आए, उन्होंने पूरे अभियान पर सवाल खड़े कर दिए.
नाम सुधारने निकले, उल्टा सवालों में फंसेसूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं जिन्हें सुनकर लोग खुद हैरान हैं. जैसे अंहकार, संघर्ष, दहीभाई, दगडूराम, भयंकर, भिक्षा, मक्खी, छीतर, छोग, बच्चू, छबीलदास जैसे नाम भी इस लिस्ट में शामिल बताए जा रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि जिन नामों को हटाने की बात हो रही है, उससे ज्यादा अजीब तो ये सुझाए गए नाम लग रहे हैं.
इतना ही नहीं, इस सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं जिन पर अलग तरह की बहस छिड़ गई है. जैसे ‘अकबर’ नाम को सूची में शामिल करते हुए उसका अर्थ ‘महान मुगल सम्राट’ बताया गया है. इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक स्तर पर इस तरह के मुद्दों पर अलग-अलग बयान पहले दिए जा चुके हैं. अब अभिभावक और लोग पूछ रहे हैं कि आखिर यह विरोधाभास क्यों.
अभिभावकों और विपक्ष ने उठाए सवालसंयुक्त अभिभावक संघ के अध्यक्ष अभिषेक जैन ने इस सूची पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि ऐसे नाम स्वीकार नहीं किए जा सकते और सरकार को इस पर फिर से सोचने की जरूरत है. उनका साफ कहना है कि बच्चों के नाम कोई मजाक नहीं हैं, यह उनकी पहचान से जुड़ा मामला है.
वहीं कांग्रेस नेता प्रताप खाचरियावास ने भी इस पूरे अभियान पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि नाम रखना परिवार का अधिकार है, इसमें सरकार को दखल नहीं देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय ऐसे फैसले लेना ठीक नहीं है.
उधर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सफाई देते हुए कहा है कि किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं होगा. यह सिर्फ सुझाव है और अभिभावकों की सहमति के बिना कुछ नहीं किया जाएगा.
फिलहाल यह पूरा मामला चर्चा में है. लोगों का कहना है कि अगर अभियान का मकसद अच्छा है, तो उसे सही तरीके से लागू भी किया जाना चाहिए. वरना अच्छे इरादे भी सवालों के घेरे में आ जाते हैं.



