कारीगरी का करिश्मा: सालार जंग म्यूजियम की वो पालकी, जिसे देख दंग रह जाते हैं लोग

Last Updated:May 01, 2026, 15:39 IST
Salar Jung Museum Hathi Ki oalki: हैदराबाद के सालार जंग म्यूजियम की आइवरी गैलरी में हाथी के दांत से बनी 18-19वीं सदी की नक्काशीदार पालकी आकर्षण का केंद्र, अब व्यापार प्रतिबंध से महत्व और बढ़ा. इतिहासकार जाहिद सरकार का कहना है कि यह पालकी केवल एक सवारी का साधन नहीं, बल्कि उस दौर के रईसों और शाही परिवारों की प्रतिष्ठा का प्रतीक भी थी.
हैदराबाद. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद अपनी ऐतिहासिक इमारतों और शाही विरासत के लिए जानी जाती है. यहां स्थित सालार जंग म्यूजियम दुनिया के सबसे बड़े व्यक्तिगत संग्रहों में गिना जाता है. इस म्यूजियम की हजारों कलाकृतियों के बीच एक ऐसी वस्तु है, जो अपनी चमक और बारीक नक्काशी के कारण पर्यटकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचती है. यह है हाथी के दांत से बनी प्राचीन पालकी.
हाथी के दांत से बनी यह पालकी म्यूजियम की आइवरी गैलरी की खास पहचान बनी हुई है. 18वीं और 19वीं शताब्दी की भारतीय कारीगरी का यह एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है. जानकारों के अनुसार उस समय हाथी के दांत पर काम करना बेहद कठिन और धैर्य का काम होता था. इस पालकी के हर हिस्से पर फूल-पत्तियां, लताएं और बारीक जालियां उकेरी गई हैं, जो भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं.
इतिहास और शाही पहचानइतिहासकार जाहिद सरकार का कहना है कि यह पालकी केवल एक सवारी का साधन नहीं, बल्कि उस दौर के रईसों और शाही परिवारों की प्रतिष्ठा का प्रतीक भी थी. हाथी के दांत की दुर्लभता और उस पर की गई महीन कारीगरी इसे उस समय भी बेहद कीमती बनाती थी. पालकी की बनावट इतनी सटीक और आकर्षक है कि देखने पर ऐसा लगता है मानो किसी कलाकार ने कठोर सामग्री नहीं, बल्कि मोम जैसी नरम चीज पर नक्काशी की हो.
म्यूजियम की खास विरासत और संरक्षणसालार जंग म्यूजियम में नवाब सालार जंग तृतीय द्वारा एकत्रित की गई हाथी के दांत की कई अन्य वस्तुएं भी मौजूद हैं, जिनमें शतरंज के सेट, मूर्तियां और फर्नीचर शामिल हैं. हालांकि, इस नक्काशीदार पालकी की पहचान सबसे अलग है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस सफेद चमक वाली कलाकृति को देखकर कारीगरों के कौशल की सराहना करते हैं.
अब हाथी के दांत के व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध है, इसलिए ऐसी प्राचीन कलाकृतियों का महत्व और भी बढ़ गया है. म्यूजियम प्रशासन इन वस्तुओं को नमी और तेज रोशनी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम करता है, ताकि इनकी गुणवत्ता और चमक बनी रहे. हैदराबाद की यह अनमोल विरासत इस बात का एहसास कराती है कि पुराने समय के कारीगर कला और कल्पना के मामले में कितने समृद्ध थे.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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