मेहनत की मिठास! ‘कुल्फी किंग’ ने कैसे जीता देश के 7 राज्यों का दिल? वह एक सीक्रेट फॉर्मूला जिसने बदल दी किस्मत

पाली. कहते हैं कि अगर इरादों में मिठास और मेहनत में शुद्धता हो, तो एक छोटा सा ठेला भी सात राज्यों की सरहदें लांघ सकता है. राजस्थान के पाली जिले की मशहूर ‘राजधानी कुल्फी’ आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. यह कहानी सिर्फ एक कुल्फी की नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता के उस शिखर तक पहुँचने की है, जहाँ आज मुकेश शेखावत ने अपने पिता की विरासत को एक ब्रांड बना दिया है और कहते भी है ना कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती है. इसके पीछे दशकों का संघर्ष और अटूट विश्वास होता है.
पाली जिले की गलियों में एक साधारण ठेले से शुरू हुई ‘राजधानी कुल्फी’ की कहानी आज देश के सात राज्यों के लिए एक मिसाल बन चुकी है. 51 साल पुराने इस स्वाद ने न केवल राजस्थान बल्कि देश के बड़े हिस्सों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. यह कहानी है मुकेश शेखावत की जिन्होंने विरासत में मिले एक छोटे से काम को अपनी मेहनत और विजन से एक बड़े ब्रांड में बदल दिया.
एक ठेला, जो आज भी है ‘सफलता का गवाह’अक्सर लोग कामयाब होने के बाद अपने पुराने दिनों को भूल जाते हैं, लेकिन मुकेश शेखावत ने अपनी जड़ें नहीं छोड़ीं. पाली के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित उनकी आलीशान दुकान के बाहर आज भी वह पुराना ठेला खड़ा है, जहाँ से 50 साल पहले यह सफर शुरू हुआ था. यह ठेला सिर्फ लकड़ी का ढांचा नहीं, बल्कि उस ईमानदारी के साथ की गई मेहनत और पसीने का प्रतीक है जिसने पाली के स्वाद को गुजरात और मध्य प्रदेश तक पहुँचाया.
रोजाना बिक जाती है 11 हजार से ज्यादा कुल्फिया राजधानी कुल्फी का जादू पाली वालों के सिर चढ़कर इस कदर बोलता है कि केवल पाली शहर में ही प्रतिदिन करीब 11,000 कुल्फियों की खपत हो जाती है. इसके अलावा हजारों कुल्फियां स्पेशल पैकिंग के जरिए राजस्थान के बाहर अन्य राज्यों में भेजी जाती हैं.आमतौर पर कुल्फी गर्मी का शौक है, लेकिन राजधानी कुल्फी का क्रेज ऐसा है कि सर्दी हो या बरसात, दुकानों पर भीड़ कम नहीं होती.
स्वाद का सीक्रेट: ‘अमूल गोल्ड’ और ‘असली केसर’आज के दौर में जहाँ कंपनियां लागत घटाने के लिए गुणवत्ता से समझौता करती हैं, वहीं राजधानी कुल्फी की सफलता का मंत्र ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ है.प्रीमियम क्वालिटी: इसे बनाने में केवल अमूल गोल्ड दूध का उपयोग किया जाता है.शुद्ध मेवे: असली केसर और पिस्ता का वह पुराना अनुपात आज भी बरकरार है, जो 50 साल पहले हुआ करता था.वैरायटी और दाम: रबड़ी, मैंगो, सीताफल और केसर कुल्फी जैसे विकल्पों की रेंज मात्र 20 से 50 रुपए के बीच है, जो इसे हर आम और खास की पहुंच में बनाए रखती है.
भरोसा ही है असली पहचान मुकेश शेखावत बताते हैं कि शुरुआत बेहद संघर्षपूर्ण थी, लेकिन उन्होंने कभी क्वालिटी नहीं गिरने दी. उनका कहना है, “हमने मुनाफा बाद में देखा, पहले ग्राहक का भरोसा जीता. आज 50 साल बाद भी अगर कोई ग्राहक वापस आता है, तो उसे वही पुराना स्वाद मिलता है. यही हमारी असली जीत है.”
12 महीने रहती है डिमांड मुकेश शेखावत बताते है कि 50 साल से यहां की कुल्फी प्रसिद्ध है. कुल्फी बनाने में अमूल गोल्ड दूध का इस्तेमाल किया जाता है. केसर पिस्ता से लेकर अलग-अलग तरह की वैरायटी की कुल्फी आपको मिल जाएंगे. यहां से कुल्फी राजस्थान के कई जिलों के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, पुणे सहित कई राज्यों में सप्लाई होती है. राजस्थान के अलग-अलग जिलों में हमारे आउटलेट्स पर कुल्फी की डिमांड 12 महीने ही रहती है और लगातार इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है.



