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उज्जैन के महाकाल और बीकानेर का अटूट रिश्ता! जब ‘शक्ति नेत्रों’ से हुआ बाबा का श्रृंगार, चमक देख सिर झुकाए भक्त

Last Updated:April 29, 2026, 16:08 IST

Mahakal Ujjain Shakti Netra: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के श्रृंगार में राजस्थान के बीकानेर का विशेष योगदान सामने आया है. महाकाल की प्रतिमा पर सुशोभित होने वाले दिव्य ‘शक्ति नेत्र’ बीकानेर के कुशल कारीगरों द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए हैं. इन आंखों की जीवंतता और चमक ने बाबा के स्वरूप को और भी अलौकिक बना दिया है, जिसे देख भक्तों की आस्था और अधिक गहरा गई है. बीकानेर की इस कलात्मक भेंट ने यह सिद्ध कर दिया है कि भक्ति की कोई सीमा नहीं होती. इन विशेष नेत्रों के लगने के बाद महाकाल का दरबार भक्ति की नई आभा से चमक उठा है.

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बीकानेर. राजस्थान का बीकानेर एक बार फिर अपनी अनोखी कला और कारीगरी के लिए चर्चा में है. इस बार वजह बनी है उज्जैन के भगवान महाकाल की विशेष ‘शक्ति नेत्र’, जो बीकानेर में तैयार किए गए हैं. रोजाना महाकाल के श्रृंगार में इस बार जो नेत्र लगाए है वो बीकानेर के पिता पुत्री की जोड़ी ने मिलकर बनाए है. अपनी बारीक कारीगरी और जीवंत रूप के चलते ये नेत्र न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि देश-विदेश में भी इनकी मांग बढ़ती जा रही है.

बीकानेर के कलाकार वीरेंद्र साकरिया द्वारा बनाए गए ये थ्री-डी रियलिस्टिक नेत्र इतने जीवंत हैं कि इन्हें देखने पर ऐसा लगता है मानो भगवान स्वयं भक्तों को देख रहे हों. इन नेत्रों को ‘गॉड आई’ भी कहा जाता है, क्योंकि इनमें रेटीना इफेक्ट के जरिए ऐसा आभास होता है कि भगवान की दृष्टि हर दिशा में बनी हुई है.

गौरतलब है कि वीरेंद्र साकरिया इससे पहले अयोध्या के रामलला मंदिर के लिए भी विशेष नेत्र तैयार कर चुके हैं, जिससे उनकी कला को और अधिक प्रतिष्ठा मिली है.

श्रृंगार के दौरान इन नेत्रों का उपयोग किया गयाहाल ही में महाकाल मंदिर उज्जैन में 18 अप्रैल को हुए विशेष श्रृंगार के दौरान इन नेत्रों का उपयोग किया गया. जानकारी के अनुसार, महाकाल के लिए अब तक छह बार बीकानेर में बने नेत्र लगाए जा चुके हैं.  चार इंच आकार के इन नेत्रों को चांदी में तैयार किया गया, जिनकी कीमत करीब 13 हजार रुपए बताई गई है. इनका ऑर्डर पिछले साल प्राप्त हुआ था, जिसके बाद इन्हें विशेष तकनीक से तैयार किया गया.

कल्पना और बारीक हस्तकला का परिणामकलाकार की पुत्री रुचि साकरिया ने बताया कि इन नेत्रों को तैयार करने में काफी समय और मेहनत लगती है. एक जोड़ी नेत्र बनाने में करीब 10 दिन का समय लगता है, जबकि इस कला को विकसित करने में एक साल से अधिक का समय लगा है. यह पूरी तरह कल्पना और बारीक हस्तकला का परिणाम है.

भगवान चारों ओर से भक्तों को देख रहेइन नेत्रों की सबसे बड़ी खासियत इनका रियलिस्टिक लुक है. जब मंदिर में पुजारी आरती करते हैं और रोशनी इन नेत्रों पर पड़ती है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान चारों ओर से भक्तों को देख रहे हैं. यही कारण है कि श्रद्धालु इन नेत्रों के दर्शन कर भाव-विभोर हो जाते हैं. बीकानेर में तैयार ये ‘शक्ति नेत्र’ अब देश की सीमाओं से बाहर भी पहचान बना रहे हैं. मलेशिया, इंडोनेशिया और यूरोप जैसे देशों से भी इनके ऑर्डर मिल रहे हैं.  इससे न केवल स्थानीय कलाकारों को पहचान मिल रही है, बल्कि बीकानेर की कला भी वैश्विक स्तर पर पहुंच रही है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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Location :

Bikaner,Rajasthan

First Published :

April 29, 2026, 16:08 IST

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