Rajasthan

गन्ने की फसल में छुपा बड़ा खतरा… ये छोटी गलती कर दी तो पूरी मेहनत हो जाएगी बर्बाद

Last Updated:April 17, 2026, 17:25 IST

Agriculture Tips : भीलवाड़ा में कृषि अधिकारी कजोड़ मल ने गन्ना किसानों को शुरुआती निगरानी, शूट बोरर नियंत्रण, कमजोर पौधों की छंटाई और संतुलित यूरिया उपयोग की सलाह दी. कृषि अधिकारी कजोड़ मल ने बताया कि भीलवाड़ा जिले में इन दिनों गन्ने की फसल को लेकर किसान सक्रिय हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ सामान्य गलतियां फसल को नुकसान पहुंचा देती हैं.

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भीलवाड़ा. गर्मी का सीजन फसलों के लिए काफी नाजुक माना जाता है और इस समय गन्ने की खेती का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है. अच्छी पैदावार के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि समय पर सही फैसले लेना भी उतना ही जरूरी होता है. अक्सर किसान छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाती हैं. खासकर फसल की शुरुआती अवस्था में की गई लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है.

अगर किसान समय रहते कीटों और कमजोर पौधों की पहचान कर लें, तो बिना ज्यादा खर्च के भी नुकसान को रोका जा सकता है और पैदावार बेहतर बनाई जा सकती है. गन्ने की खेती में सफल होने के लिए नियमित निगरानी, समय पर उपचार और संतुलित पोषण बेहद जरूरी है. अगर किसान इन बातों का ध्यान रखें, तो कम लागत में अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं और अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं.

फसल की शुरुआती निगरानी है जरूरीकृषि अधिकारी कजोड़ मल ने बताया कि भीलवाड़ा जिले में इन दिनों गन्ने की फसल को लेकर किसान सक्रिय हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ सामान्य गलतियां फसल को नुकसान पहुंचा देती हैं. गन्ने की फसल में शुरुआती निगरानी बेहद जरूरी होती है. यदि किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें, तो कई समस्याओं को शुरुआत में ही रोका जा सकता है. इससे उत्पादन बढ़ता है, लागत कम रहती है और मुनाफा भी बेहतर मिलता है.

शूट बोरर और कमजोर पौधों पर रखें नजरगन्ने की फसल में शूट बोरर सबसे खतरनाक कीटों में से एक है. इसे नजरअंदाज करना किसानों के लिए भारी पड़ सकता है. यह कीट पौधे को अंदर से नुकसान पहुंचाता है, जिससे बीच का हिस्सा सूख जाता है, जिसे “डेड हार्ट” कहा जाता है. इसके अलावा पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है. ऐसे पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करना चाहिए और खेत की लगातार निगरानी जरूरी है ताकि कीट का फैलाव रोका जा सके.

इसके साथ ही कई किसान कमजोर या छोटे पौधों पर ध्यान नहीं देते, जिससे पूरी फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है. पतले, पीले या धीमी गति से बढ़ने वाले पौधों की पहचान कर उन्हें अलग करना और उचित पोषण देना जरूरी है. खेत में जैविक खाद और गोबर खाद का उपयोग बढ़ाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है.

ज्यादा यूरिया भी बन सकता है नुकसान का कारणएक और बड़ी गलती जो किसान अक्सर करते हैं, वह है यूरिया का अधिक उपयोग. ज्यादा हरी-भरी फसल के लालच में किसान जरूरत से अधिक यूरिया डाल देते हैं. इससे पौधे ऊपर से तो हरे दिखते हैं, लेकिन अंदर से कमजोर हो जाते हैं. तना कमजोर होने के कारण गिरने का खतरा बढ़ जाता है और कीट व बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित खाद का उपयोग करना चाहिए और मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए. सही मात्रा और सही समय पर पोषण देने से ही फसल मजबूत बनती है और उत्पादन बेहतर मिलता है.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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Location :

Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan

First Published :

April 17, 2026, 17:25 IST

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