न खंभा, न रुकावट… बिना एक भी पिलर के बना है ये विशाल हॉल! 25 हजार लोग एक साथ बैठ सकते हैं, हो गए सब हैरान

Last Updated:May 13, 2026, 11:28 IST
Sirohi Hindi News: करीब 30 साल पहले मात्र 3 करोड़ रुपए की लागत से बना यह विशाल हॉल आज भी इंजीनियरिंग और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। खास बात यह है कि इस पूरे हॉल में एक भी पिलर नहीं है, फिर भी यहां एक साथ लगभग 25 हजार लोग आराम से बैठ सकते हैं। उस समय इतनी बड़ी और बिना खंभों वाली संरचना का निर्माण अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना गया था। इसकी डिजाइन ऐसी बनाई गई कि अंदर बैठे लोगों को किसी भी तरह की दृश्य रुकावट का सामना नहीं करना पड़ता। आज भी यह हॉल बड़े धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आधुनिक तकनीक के बिना तैयार हुई यह इमारत लोगों को हैरान कर देती है.
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सिरोही : किसी भी इमारत की मजबूती उसकी नींव और पिलर की मजबूती से होती है, लेकिन क्या हो जब एक विशाल हॉल बिना किसी पिलर के 30 सालों से मजबूती से टिका हो. जी हां, राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू की शांत वादियों की तलहटी में बना डायमंड हॉल एशिया का सबसे बड़ा बिना पिलर वाला हॉल हैं. ये स्थान ना सिर्फ आध्यात्मिकता के लिए पहचाना जाना हैं बल्कि इस हॉल के भव्य निर्माण के लिए भी अपनी अलग पहचान रखता है. ब्रह्माकुमारी संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में बना डायमंड हॉल अपनी अनूठी बनावट के कारण चर्चा का विषय हैं.
करीब एक लाख वर्ग फिट कारपेट एरिया में बनी ये इमारत बिना खंभों के टिकी हुई है. यह पूरे एशिया का सबसे बड़ा हॉल माना जाता है, जो बिना किसी पिलर के सहारे पिछले 30 सालों से टिका हुआ है. इस हॉल का नाम में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में राष्ट्रीय श्रेणी के सबसे बड़े हॉल के रूप में दर्ज है.
एक साथ बैठ सकते है 25 हजार तक लोगइस हॉल की नींव 1996 में रखी गई थी. इसका निर्माण मुख्य मैकेनिकल इंजीनियर रमेश कुंवर और उनकी टीम ने भटिंडा से मिले एक विशेष मैकेनिकल डिजाइन के आधार पर किया गया था. मुख्य मैकेनिकल इंजीनियर बीके रमेश ने बताया कि हॉल में एक साथ 25 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की हुई है. हॉल की लंबाई 450 फीट और चौड़ाई 213 फीट हैं. लोगों की सुचारू आवाजाही के लिए इसमें 46 दरवाजे और 84 खिड़कियां बनाई गई हैं. वहीं बैठने वाले लोगों के लिए 10 विशाल पंखे और वेंटिलेशन की पुख्ता सुविधा हैं. नींव रखने के सिर्फ 9 महीने में इसका निर्माण पूरा कर लिया गया था. तब इस इमारत को बनाने में 3 करोड़ के करीब खर्च आयाथा.
तकनीक और आधुनिकता का संगमयेहॉल ना सिर्फ आकार में बड़ा नहीं है, बल्कि सुविधाओं के मामले में भी विश्वस्तरीय है. यहां अलग अलग भाषाओं में अनुवाद के लिए दोनों ओर विशेष ट्रांसलेशन रूम बने हैं, जहाँ एक साथ 16 भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है. यहां सिर्फ 3 हजार वर्ग फीट में विशाल स्टेज और एलईडी स्क्रीन भी लगी हुई है. जिससे अंतिम लाइन में बैठा व्यक्ति भी आसानी से स्टेज को देख सकता है.
देश विदेश की बड़ी हस्तियां कर चुकी है शिरकतइस अनोखे हॉल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति समेत कई राज्यों के सीएम और राज्यपाल शिरकत कर चुके है. हॉल की देखरेख का कार्य देखने वाले डायमंड हॉल प्रभारी बीके वल्लभ भाई के अनुसार इस हॉल का ये नाम संस्थान के डायमंड जुबली वर्ष पर बनने की वजह से डायमंड हॉल रखा गया था. इसकी सफाई और देखरेख के लिए संस्था की एक समर्पित टीम तैनात रहती है। सामान्य दिनों में यहां 10 नियमित कर्मचारी इसकी देखभाल करते हैं. वहीं बड़े कार्यक्रमों में संस्थान के 200 से 250 सदस्य इसकी व्यवस्था संभालते है.
About the AuthorJagriti Dubey
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