देसूरी नाल की खूनी सड़क पर कब थमेंगे हादसे? एलिवेटेड रोड या सुरंग… फाइलों में अटका प्रोजेक्ट

पाली. अगर आपको उदयपुर से पाली या जोधपुर आना हो तो देसूरी का वही खतरनाक मार्ग पड़ता है, जिसे लोग मौत का रास्ता भी कहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यह ऐसा मार्ग है, जहां से गुजरते समय लोग भगवान का नाम जपते रहते हैं. आए दिन यहां कभी गाड़ियां खाई में गिर जाती हैं तो कभी घुमावदार मोड़ों पर हादसे हो जाते हैं. चिंताजनक बात यह है कि यहां अब तक हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
इसके बाद सरकार ने 1800 से 2000 करोड़ रुपए के बीच एक बड़ा प्रस्ताव तैयार किया, ताकि इस मार्ग पर 9 बाइपास बनाए जा सकें और वाहनों को गांवों के भीतर से होकर नहीं गुजरना पड़े. हालांकि वन विभाग से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यह प्रोजेक्ट अब तक कागजों से बाहर नहीं आ पाया है.
सुरंग या एलिवेटेड रोड, अभी तय नहीं
मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्र को जोड़ने वाले पाली-नाडोल-देसूरी-चारभुजा मार्ग के बीच अरावली की वादियों में खतरनाक देसूरी नाल स्थित है. इसके निर्माण को लेकर अभी तक वन विभाग से स्वीकृति नहीं मिली है. इस 9 किलोमीटर लंबे देसूरी नाल क्षेत्र में एलिवेटेड रोड बनेगी या सुरंग, यह भी अभी तय नहीं हो पाया है. देसूरी-नाडोल होकर चारभुजा जाने वाले मार्ग के लिए डीपीआर तैयार की गई थी. इस परियोजना की अनुमानित लागत 1800 से 2000 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इस मार्ग पर 9 बाइपास प्रस्तावित हैं, जिससे वाहनों को गांवों के भीतर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा.
8 किलोमीटर का बन सकता है एलिवेटेड रोड
इसी मार्ग पर देसूरी नाल पड़ती है. राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की ओर से इस मार्ग का सर्वे कराया जा रहा है. रायपुर-जस्साखेड़ा मार्ग पर पेड़ों की संख्या को लेकर मामला अटका हुआ है. ऐसे में देसूरी मार्ग की रिपोर्ट में पेड़ों की संख्या भी शामिल की जा रही है. जरूरत पड़ने पर करीब 8 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया जा सकता है, जो वर्तमान सड़क के पास की खाई में पिलर खड़े कर तैयार होगा. यदि यह संभव नहीं हुआ तो सुरंग बनाने का विकल्प भी रखा गया है.
इन गांवों में बनेंगे बाइपास
सोनाई मांझी, बूसी, नाडोल, टेवाली, सोमेसर, देवली, खारड़ा, नारलाई और देसूरी गांवों में बाइपास प्रस्तावित हैं. एनएच अधीक्षण अभियंता अंजू चौधरी के अनुसार, पेड़ों की गिनती करवाई जा रही है. देसूरी क्षेत्र में टनल या एलिवेटेड रोड दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. गांवों से निकलने वाले मार्गों पर बाइपास भी बनाए जाएंगे.
1000 से अधिक लोगों की जा चुकी जान
इस निर्माण को लेकर सांसद पीपी चौधरी कई बार संसद में मुद्दा उठा चुके हैं. उन्होंने बताया कि एनएच-162ई (पाली-नाडोल-देसूरी) मार्ग पर अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. 83 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की सड़क ज्यामिति मानकों के अनुरूप नहीं है. सड़क का बड़ा हिस्सा घनी आबादी, बाजार क्षेत्रों और तीखे मोड़ों से होकर गुजरता है. यह मार्ग रणकपुर जैन मंदिर, जवाई बांध और चारभुजा नाथ जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों को जोड़ता है.
पहले भी बनी थी योजना, लेकिन ठप पड़ गई
देसूरी-गोमती मार्ग पर स्थित देसूरी नाल घाट सेक्शन वर्षों से खतरनाक बना हुआ है. समाधान के लिए वर्ष 2020 में राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) ने 258 करोड़ रुपए की लागत से एलिवेटेड रोड की डीपीआर तैयार की थी. देसूरी नाल में 1952 से अब तक सड़क हादसों में 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. 7 सितंबर 2007 को देश के सबसे बड़े सड़क हादसों में से एक इसी घाट सेक्शन में हुआ था, जिसमें 108 लोगों की जान गई थी. घाट सेक्शन में 12 खतरनाक मोड़, 5 संकरी पुलिया और खतरनाक ढलान हैं. कई बार वाहनों के ब्रेक फेल हो जाते हैं और वे चट्टानों से टकराकर गहरी खाई में गिर जाते हैं.
क्यों जरूरी है यही रास्ता
जोधपुर और पाली से उदयपुर जाने के लिए नाडोल-देसूरी-सादड़ी मार्ग सबसे उपयुक्त माना जाता है. रणकपुर वाले रास्ते पर लूटपाट की आशंका के कारण यात्री वहां से कम सफर करते हैं, जबकि सिरोही-पिंडवाड़ा मार्ग लंबा पड़ता है. ऐसे में देसूरी नाल का रास्ता सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. हालांकि यहां लगातार हादसे होते रहते हैं. जगह कम होने और घाट क्षेत्र होने के कारण कई बार ट्रकों और बसों के ब्रेक फेल हो जाते हैं, जिससे बड़े हादसे हो जाते हैं.



