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प्रोटीन का किंग कौन, मुर्गा या मछली? किसे खाने से बनेंगी पहलवान जैसी मसल्स, किसके साइड इफेक्ट ज्यादा

Last Updated:June 22, 2026, 22:57 IST

Chicken and Fish Protein Content: चिकन और मछली दोनों सबसे ज्यादा खाए जाने वाले नॉनवेज फूड्स हैं. कुछ लोगों को मुर्गा यानी चिकन पसंद होता है, तो कई लोग मछली के दीवाने होते हैं. चिकन और मछली दोनों को प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स माना जाता है. मजबूत मसल्स के लिए लोग इन चीजों का जमकर सेवन करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो चिकन में प्रोटीन ज्यादा होता है, लेकिन मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड समेत कई अन्य पोषक तत्वों की भरमार होती है.प्रोटीन का किंग कौन, मुर्गा या मछली? किसे खाने से बनेंगी पहलवान जैसी मसल्सZoomचिकन और मछली दोनों में प्रोटीन की अच्छी खासी मात्रा होती है.

Fish vs Chicken Health Benefits: फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग की बात हो तो सबसे पहले प्रोटीन का जिक्र होता है. प्रोटीन एक जरूरी पोषक तत्व होता है, जो मसल्स बनाने, शरीर की मरम्मत करने और ताकत बढ़ाने के लिए जरूरी माना जाता है. जिम जाने वाले लोग अक्सर चिकन और मछली को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, ताकि प्रोटीन की कमी दूर की जा सके. कई लोग प्रोटीन सप्लीमेंट्स भी लेते हैं, ताकि मसल्स की ग्रोथ बेहतर हो सके. एक्सपर्ट्स की मानें तो नेचुरल चीजों से मिलने वाला प्रोटीन सप्लीमेंट्स की तुलना में ज्यादा बेहतर होता है. चिकन और मछली दोनों में भरपूर प्रोटीन होता है. इनका सेवन करने से मसल्स को मजबूती मिल सकती है. अक्सर सवाल उठता है कि मुर्गा यानी चिकन में प्रोटीन ज्यादा होता है या मछली में? इन दोनों में से प्रोटीन का असली किंग कौन है और मसल्स बनाने के लिए क्या खाना चाहिए.

चिकन में कितना प्रोटीन होता है?

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्किनलेस चिकन ब्रेस्ट को हाई-प्रोटीन फूड माना जाता है. लगभग 100 ग्राम पके हुए चिकन ब्रेस्ट में 30 से 31 ग्राम तक प्रोटीन मिल सकता है. इसमें फैट की मात्रा भी कम होती है. यह मसल्स बनाने वालों के लिए बढ़िया विकल्प होता है. चिकन में मौजूद प्रोटीन हाई क्वालिटी होता है और इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे मसल्स ग्रोथ के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है.

मछली में कितना प्रोटीन होता है?

मछली भी प्रोटीन का अच्छा सोर्स मानी जाती है. अलग-अलग प्रकार की मछलियों में प्रोटीन की मात्रा अलग हो सकती है. औसतन 100 ग्राम मछली में 20 से 25 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है. मछली की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हैं. ये हार्ट, ब्रेन और शरीर में सूजन को कम करने के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. सैल्मन, टूना और सार्डिन जैसी मछलियां विशेष रूप से पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. मछली में प्रोटीन के अलावा अन्य पोषक तत्वों की भी भरमार है.

मसल्स बनाने के लिए क्या बेहतर?

अगर केवल प्रोटीन की मात्रा की बात करें, तो चिकन ब्रेस्ट में आमतौर पर मछली की तुलना में ज्यादा प्रोटीन होता है. इसलिए कई बॉडी बिल्डर्स और एथलीट चिकन को प्रायोरिटी देते हैं. हालांकि मसल्स केवल प्रोटीन से नहीं बनती हैं. रिकवरी, सूजन कम करने और समग्र स्वास्थ्य के लिए ओमेगा-3 भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस मामले में मछली को बढ़त मिलती है. इसलिए विशेषज्ञ दोनों को संतुलित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं.

दोनों के साइड इफेक्ट भी जान लीजिए

अगर चिकन को ज्यादा तेल, मसालों या प्रोसेस्ड रूप में खाया जाए, तो इसमें कैलोरी और सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है. कुछ बड़ी समुद्री मछलियों में पारा यानी मरकरी का स्तर अधिक हो सकता है, इसलिए उनका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है. इसके अलावा दोनों खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, ताजगी और पकाने का तरीका भी स्वास्थ्य पर असर डालता है. अगर आपका लक्ष्य ज्यादा प्रोटीन लेना और मसल्स बनाना है, तो चिकन एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. अगर आप प्रोटीन के साथ ओमेगा-3 और अन्य पोषक तत्व भी चाहते हैं, तो मछली को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.About the Authorअमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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