फूलगोभी की पूसा मेघना, पूसा कार्तिक अगेती किस्में, कम समय में बंपर पैदावार और पाएं अधिक मुनाफा, 50 दिन में किसानों को लखपति बनने का मौका

होमफोटोकृषि
फूलगोभी की पूसा मेघना, पूसा कार्तिक अगेती किस्में, कम समय में बंपर पैदावार
Last Updated:August 24, 2026, 08:49 IST
Cauliflower farming: अगेती फूलगोभी की किस्में कम समय में तैयार होकर किसानों को मंडी में सबसे पहले उपज बेचने का मौका देती हैं. अगस्त के अंतिम सप्ताह में रोपाई से 50-60 दिनों में पैदावार मिलती है. जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि अगेती फूलगोभी की किस्में कम समय में तैयार होकर किसानों को मंडी में सबसे पहले उपज बेचने का मौका देती हैं . इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये हल्की गर्मी और शुरुआती बारिश को आसानी से सहन कर लेती हैं . अगस्त के अंतिम सप्ताह में इनकी रोपाई करने से 50 से 60 दिनों के भीतर पैदावार मिलने लगती है .
जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि अगेती फूलगोभी की किस्में कम समय में तैयार होकर किसानों को मंडी में सबसे पहले उपज बेचने का मौका देती हैं . इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये हल्की गर्मी और शुरुआती बारिश को आसानी से सहन कर लेती हैं . अगस्त के अंतिम सप्ताह में इनकी रोपाई करने से 50 से 60 दिनों के भीतर पैदावार मिलने लगती है .
पूसा मेघना किस्म की रोपाई के बाद फसल 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है और यह प्रति हेक्टेयर 125 क्विंटल तक उपज देती है. इसके फूल सफेद और गठे हुए होते हैं. वहीं पूसा कार्तिक संकर किस्म 55-65 दिनों में पककर तैयार होती है. इसकी पैदावार 160 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिलती है. यह संकर किस्म बीमारियों के प्रति अधिक सहनशील है. इसके फूलों का आकार और वजन भी बहुत बढ़िया होता है .
पूसा केतकी एक बहुत लोकप्रिय किस्म है जो 50 से 60 दिनों में 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है . इसके फूल मध्यम आकार के और बेहद ठोस होते हैं. पूसा अश्विनी भी एक बेहतरीन किस्म है जो 50 से 60 दिनों में 160 से 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे जून के महीने में भी लगाया जा सकता है और यह विपरीत मौसम में भी अच्छा फल देती है.
Add as Preferred Source on Google
काशी कुंवारी सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली किस्मों में से एक है, जो प्रति हेक्टेयर 300 से 350 क्विंटल तक उत्पादन देती है. इसके फूल बड़े और चमकदार सफेद होते हैं. पूसा देपाली किस्म प्रति हेक्टेयर लगभग 150 क्विंटल तक उत्पादन देती है, जिसके फूल काफी आकर्षक होते हैं . अर्ली कुंवारी किस्म थोड़ा कम यानी 80 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है, लेकिन इसकी अगेती गुणवत्ता के कारण बाजार में इसे बहुत अच्छे दाम मिलते हैं .
फूलगोभी की अच्छी फसल के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था होना बहुत जरूरी है ताकि बारिश का पानी न ठहरे. सबसे पहले खेत की एक बार गहरी जुताई मिट्टी पलट हल से करें. इसके बाद दो से तीन बार देसी हल या कल्टीवेटर से जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरी बना लें. खेत से खरपतवार और पुरानी फसलों के अवशेष पूरी तरह हटा दें .
खेत की आखिरी जुताई के समय 150 से 200 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें . इसके अलावा फसल को सही पोषण देने के लिए प्रति हेक्टेयर 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है. नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पूरी फास्फोरस और पोटाश खेत तैयार करते समय मिट्टी में मिला दें.
अगर आपके पास पौध तैयार है तो अगस्त के अंतिम सप्ताह में इनकी रोपाई का सबसे सही समय है. रोपाई हमेशा शाम के समय करनी चाहिए ताकि तेज धूप से पौधे न मुरझाएं . लाइन से लाइन की दूरी 45 से 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 से 40 सेंटीमीटर रखनी चाहिए . रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई जरूर करें ताकि पौधों की जड़ें मिट्टी को अच्छी तरह पकड़ लें और पौधे तेजी से बढ़ सकें .
अगेती किस्मों में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवार निकालते रहें और जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं. जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करते रहें ताकि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे. बीमारियों और कीटों से बचाव के लिए जैविक या रासायनिक दवाओं का छिड़काव करें. अगस्त के अंत में रोपी गई फसल अक्टूबर तक मंडी में पहुंच जाती है. उस समय बाजार में आवक कम और मांग ज्यादा होने से किसानों को फसल का बहुत ऊंचा भाव मिलता है.
First Published :
August 24, 2026, 08:49 IST



