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सोफे में छिपे कैश से जाएगी राष्ट्रपति की कुर्सी? फाला फाला स्कैंडल क्या, जिससे दक्षिण अफ्रीका में भूचाल

South Africa President Farmgate Scandal: दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है. यहां के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के खिलाफ फार्मगेट स्कैंडल या फाला-फाला चोरी की घटना में कोर्ट ने पुरानी कानूनी कार्रवाई को फिर से चलाने का आदेश दे दिया है. अदालती प्रक्रिया शुरू होने से उनके खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई भी शुरू हो सकती है. दो बार राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठ चुके रामाफोसा के खिलाफ भ्रष्टचार के कई सारे आरोप लगे हैं लेकिन सोफे में छिपे कैश की चोरी के मामले ने दुनिया की राजनीति के सबसे चर्चित करप्शन केस को उजागर कर दिया. क्या है यह मामला, आइए समझते हैं.

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के खिलाफ चल रहा ‘फाला फाला’ (Phala Phala) स्कैंडल का मामला विश्व राजनीति के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार विवादों में से एक है. एक सोफे में छिपी लाखों डॉलर की नकदी और उसके चोरी होने की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है. इस केस ने राष्ट्रपति की मिस्टर क्लीन की इमेज को खतरे में डाल दिया है. फार्मगेट स्कैंडल की यह कहानी साल 2020 से जुड़ी हुई है.

2020 में राष्ट्रपति के फार्महाउस में चोरी 

प्रेसिडेंट रामाफोसा के फार्महाउस में चोरी की घटना सामने आई. यहां अचानक से घुस आए चोरों ने सोफे के अंदर छिपाकर रखे गई रकम पर हाथ साफ कर दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह रकम 5 लाख 80 हजार डॉलर यानी कि 4 लाख 72 हजार यूरो की थी. रामाफोसा की तरफ से पहले तो इस घटना को छिपाने की कोशिश की गई. लेकिन एक बार इस कांड के सामने आने पर पर्देदारी शुरू हुई.

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व खुफिया प्रमुख आर्थर फ्रेजर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि राष्ट्रपति रामाफोसा के लिम्पोपो प्रांत स्थित ‘फाला फाला’ वन्यजीव फार्महाउस से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (अमेरिकी डॉलर) चोरी हुई थी. राष्ट्रपति की तरफ से बताया कि यह पैसा भैंसों की खरीद-बिक्री से जुड़ा हुआ है और पूरी रकम वैध है.

सोफे में क्यों छिपाया गया था कैश? 

उन्होंने बताया कि सूडान के व्यापारी मुस्तफा मोहम्मद इब्राहिम के साथ व्यापार से यह रकम हासिल हुई है. अब सवाल उठा कि पैसे को सोफे के अंदर क्यों छिपाकर रखा गया था? इस पर जवाब आया कि राष्ट्रपति के मैनेजर ने सुरक्षा कारणों से तिजोरी की बजाय सोफे के अंदर रखा हुआ था. इसको मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और संवैधानिक उल्लंघन करार दिया गया.

रामाफोसा ने जांच पैनल की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी. उनका कहना है कि ‘भैंसों की बिक्री’ एक वैध व्यापारिक लेन-देन था. हालांकि दक्षिण अफ्रीका की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था और अन्य एजेंसियां अभी भी अलग-अलग स्तरों पर इसकी जांच कर रही हैं. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब राष्ट्रपति पर इसे दबाने के आरोप लगे. आरोप है कि राष्ट्रपति या उनके किसी कर्मचारी की तरफ से पुलिस में इस बड़ी चोरी की सूचना नहीं दी गई. इस बारे में आधिकारिक रिपोर्ट पुलिस में दर्ज नहीं कराई गई.

नामीबिया तक पीछा कर पकड़े गए चोर 

आरोप लगाया गया कि राष्ट्रपति के निजी सुरक्षा दल ने चोरों का नामीबिया तक पीछा किया. उन्हें पकड़ा और उनसे पूछताछ की और मामले को शांत रखने के लिए उन्हें रिश्वत दी. इस डकैती के मामले में जिन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, उनके नाम- इम्मानुवेला डेविड, अर्बानुस शाउम्बवाको, एरकी शिकोंगो, पेट्रस मुहेकेनी, पेट्रस अफ्रीकानेर के तौर पर सामने आए. इनमें से कुछ नामीबियाई नागरिक निकले तो कुछ के वहां अवैध तरीके से घुसने का मामला सामने आया.

संसद में सरकार को बहुमत से अभी तक बचे 

इसको विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन माना गया. दक्षिण अफ्रीका के नियमों के अनुसार विदेशी मुद्रा को एक निश्चित समय सीमा के भीतर घोषित करना अनिवार्य है, जो कि यहां पर नहीं किया गया. इसी रिपोर्ट के आधार पर विपक्षी दलों ने संसद में उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग तेज कर दी है. हालांकि रामाफोसा की पार्टी ANC (अफ्रीकन नैशनल कांग्रेस) के पास संसद में बहुमत है. इस वजह से अब तक उन्हें बचने में मदद मिलती रही है. लेकिन कानूनी और नैतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. अब केस के दोबारा से चलने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

अब सिरिल रामाफोसा पर महाभियोग का खतरा 

महाभियोग की यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है और उनके खिलाफ सबूत पुख्ता होते हैं, तो सिरिल रामाफोसा को इस्तीफा देना पड़ सकता है. यह मामला ना केवल दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि वहां के लोकतंत्र में जवाबदेही की कितनी अहमियत है.

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