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Famous Temple: सावन में जरूर करें नागौर के इन 6 शिव धामों के दर्शन, हर मंदिर की अनोखी है कहानी

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सावन में जरूर करें नागौर के इन 6 शिव धामों के दर्शन, हर मंदिर की कहानी है खास

Last Updated:August 16, 2026, 09:16 IST

Nagaur Famous Shiv Temple: सावन के पवित्र महीने में नागौर के प्राचीन शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर रहती है. शहर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास सदियों पुराना बताया जाता है और जिनसे अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं. गिनाणी तालाब के पास स्थित करीब 200 साल पुराने देवलपति महादेव मंदिर से लेकर बंशीवाला परिसर के करीब 1000 साल पुराने पातालेश्वर महादेव मंदिर तक श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मांझवास का पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर बना है, जबकि डांगावास का भीमशंकर महादेव मंदिर पांडवों से जुड़ी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है.

सावन का पवित्र महीना देवो के देव महादेव को समर्पित होता है. इस समय नागौर जिले के सभी प्राचीन शिव मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल दिखाई देता है. भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करते हैं. नागौर में कई ऐसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, जिनसे स्थानीय लोगों की आस्था और सदियों पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं. आइए नागौर के प्रमुख प्राचीन शिव मंदिरों के बारे में जानते हैं.

देवलपति महादेव मंदिर नागौर के गिनाणी तालाब के पास स्थित है और प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है. इस मंदिर की पहचान यहां से जुड़ी धार्मिक मान्यता है. केवल सावन के महीने में ही नहीं बल्कि पूरे साल यहां सोमवार को श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है. देवलपति महादेव मंदिर लगभग 200 साल पुराना बताया जाता है. इसका निर्माण जोधपुर के राजा मानसिंह द्वारा संत खेम भारती बाबा की जीवित समाधि पर करवाया गया था. यहां पश्चिममुखी शिवलिंग विराजमान है. इस मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला और नक्काशी आकर्षण का केंद्र है.

बडलेश्वर महादेव मंदिर नागौर शहर में प्रताप सागर तालाब के पास स्थित है. यह नागौर जिले का प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. यह मंदिर नागौर रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है. महाशिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान मंदिर में विशेष रौनक रहती है और बर्फानी बाबा जैसी भव्य झांकियां भी सजाई जाती हैं. इस मंदिर में जल्दी शादी की मनोकामना पर धतुरा और बेल पत्र चढ़ाने की परम्परा है. इस मंदिर में साल में कई बार विशेष आयोजन भी होते हैं.

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नर्मदेश्वर महादेव मंदिर नागौर से मात्र 15 किलोमीटर की दूर बाराणी गांव में स्थित है. दरअसल जब इस मंदिर की स्थापना हुई उस समय महादेव को भूतश्वेर महादेव के नाम से पूजा जाता था. इसका मुख्य कारण यह था कि ग्रामीणों का मानना है कि वह भूत-प्रेत से उनकी रक्षा करते हैं. लेकिन विक्रम संवंत 1905 में यहां पर भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना कर इन्हें नर्बदश्वर महादेव के नाम से भी पूजा जाने लगा. यहां भगवान शिव के नर्मदेश्वर स्वरूप की पूजा की जाती है.

मांझवास पशुपतिनाथ मंदिर नागौर के मांझवास गांव में स्थित है. यह मंदिर नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर बना हुआ है. देशभर के श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शनार्थ पहुंचते हैं. शिवरात्रि और श्रावण में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बड़ी तादाद में रहती है. नागौर शहर से 16 किलोमीटर दूर इस मंदिर की करीब साढ़े तीन दशक पहले 1982 में योगी गणेशनाथ ने नींव रखी थी तथा करीब 15 वर्ष बाद मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई. मंदिर में प्रतिदिन चार बार आरती होती है.

पातालेश्वर महादेव मंदिर नागौर शहर के बंशीवाला परिसर में पातालेश्वर महादेव मंदिर मौजूद है. यह मंदिर करीब 1 हजार वर्ष पुराना बताया जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार यहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. मंदिर परिसर में नीचे की ओर स्थित भगवान महादेव पातालेश्वर के रूप में शिवलिंग रूप में विराजित हैं. कहते हैं कि औरंगजेब के सिपाहसलार मंदिर को तोडऩे की नीयत से पहुंचे तो थे, लेकिन वह कुछ बिगाड़ नहीं सके इसका. इस प्राचीन मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 26 सीढिय़ां उतरना होता है.

डांगावास महादेव मंदिर नागौर के मेड़ता के डांगावास में स्थित है. इस प्राचीन मंदिर को भीमशंकर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में रुके थे. तब पांडव पुत्र भीम ने यहां भगवान शिव के स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना की थी. यहां सावन के महीने में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं. शिवरात्रि पर यहां कई विशेष आयोजन भी होते हैं.

First Published :

August 16, 2026, 09:16 IST

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