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सतीश पूनिया कैसे पहुंचे पार्टी में इस मुकाम तक, जानें कौनसी जिम्मेदारी साबित हुई ‘टर्निंग प्वाइंट’

Last Updated:August 18, 2026, 16:50 IST

BJP leader Satish Poonia Success Story : बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बतौर राष्ट्रीय महासचिव शामिल किए गए सतीश पूनिया की सफलता का सफर उनकी विधानसभा चुनाव 2023 में आमेर विधानसभा क्षेत्र से हुई हार के बाद शुरू हुआ है. पूनिया की हार के बावजूद भाजपा ने उनको लगातार एक के बाद एक तीन अहम पद देकर उन पर बड़ा भरोसा जताया है. पूनिया की सफलता का ‘टर्निंग प्वॉइंट’ उनकी राजस्थान से हरियाणा में ‘एंट्री’ रही है. क्या है सतीश पूनिया की राजनीतिक सफलता का 'टर्निंग प्वाइंट'?Zoomसतीश पूनिया को बीजेपी ने एक के बाद एक तीन अहम पदों की जिम्मेदारी सौंपी है.

जयपुर. राज्यसभा सांसद एवं राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को पार्टी अध्यक्ष नीतिन नबीन की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. पहले से हरियाणा राज्य की जिम्मेदारी संभाल रहे पूनिया को अब पंजाब की भी अहम जिम्मेदारी दी गई है. पूनिया राजस्थान बीजेपी के एकमात्र ऐसे लीडर हैं जिनको पार्टी ने एक के बाद एक करके तीन अहम पद दिए हैं. पूनिया को पहले हरियाणा राज्य का प्रभारी बनाया गया था. उसके बाद पार्टी ने उनको बीते दिनों राज्यसभा पहुंचाया और अब राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है.

‘सॉफ्ट जाट लीडर’ की छवि वाले पूनिया को पार्टी में मिला यह मुकाम कोई एक दो साल की वर्किंग का नतीजा नहीं है, बल्कि यह उनकी बरसों की मेहनत का परिणाम है. राजस्थान में बीजेपी संगठन के मजबूत पिलर रहे पूनिया ने भले की चुनाव ज्यादा नहीं जीते हैं लेकिन उनका संगठनात्मक कौशल हमेशा से सराहा गया है. पूनिया की वर्किंग स्टाइल की मुरीद हुई बीजेपी ने आज उनको पार्टी में जाट समाज का सबसे बड़ा चेहरा बनाकर खड़ा कर दिया है. पूनिया को पार्टी में इस मुकाम तक पहुंचाने में जो सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉइंट रहा है वह है उनकी ‘हरियाणा’ में एंट्री है. इस बात को पूनिया खुद स्वीकार करते हैं.

हरियाणा की सफलता बनी नींव
नबीन की टीम का हिस्सा बनने के बाद पूनिया ने कहा कि यह उनके लिए खुशी का डबल धमाका है कि पार्टी ने उन इतना भरोसा किया कि कुछ महीने ही राज्यसभा सांसद बनाया और अब राष्ट्रीय महासचिव. बकौल पूनिया ने हरियाणा प्रभारी के तौर पर वहां बीजेपी की जीत उनके काम का ‘टर्निंग प्वॉइंट’ रहा है. यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव में भी पश्चिमी यूपी की जिन चालीस सीटों पर प्रचार का काम किया था उनमें से 39 में जीत मिली थी. पूनिया बोले पार्टी अब जिस भी राज्य की जिम्मेदारी सौंपेगी तो मेरी कोशिश रहेगी कि मैं वहां भी बढ़िया तरीके से काम कंरू. पूनिया ने कहा कि ये मानना कि बतौर ओबीसी नेता उनको यह पद मिला ठीक नहीं है. यह उनके काम का पुरस्कार है. बीजेपी जाति में यकीन नहीं करती है.

पूनिया शेखावाटी से आते हैं
सतीश पूनिया राजस्थान के उस क्षेत्र से आते हैं जहां के कण-कण में राजनीति समाई है. पूनिया शेखावाटी के चूरू जिले के सादुलपुर से आते हैं. राजस्थान में शेखावाटी का राजनीति में हमेशा से दबदबा रहा है. यह दबदबा केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा है बल्कि देश की राजनीति में शेखावाटी के नेताओं ने सफलता के झंडे गाड़े हैं. देश की राजनीति में छाए रहने वाले राजस्थान के बड़े नेताओं में से अधिकांश शेखावाटी के ही रहे हैं. फिर वो चाहे वो बीजेपी के दिग्गज नेता रहे पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत हो या फिर जगदीप धनखड़ या फिर केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत या चाहे कांग्रेस के चाहे शीशराम ओला. गजेन्द्र सिंह शेखावत की कर्मभूमि जोधपुर है लेकिन वे हैं मूलतया शेखावाटी के.

हार के बाद पूनिया की सफलता का नया सिलसिला शुरू हुआ हैबहरहाल विधानसभा चुनाव 2023 की हार के बाद पूनिया की सफलता का नया सिलसिला शुरू हुआ है. उनका यह नया सफर राजस्थान में बीजेपी की जाट राजनीति में कितना प्रभावी होगा यह तो आने वाला समय बताएगा. लेकिन यह तय है कि हार के बाद पूनिया की राजनीतिक सफर एक नई ऊंचाई पर जरुर पहुंच गया है. यह दीगर बात है कि इससे जाट वोटर बीजेपी से कितना प्रभावित होगा. क्योंकि बीते लोकसभा चुनाव में राजस्थान में बीजेपी को सबसे ज्यादा डेंट जो लगा था वह शेखावाटी में ही लगा था. शेखावाटी की तीनों लोकसभा सीटें सीकर, चूरू और झुंझुनूं बीजेपी के हाथ से फिसल गई थी. इन तीनों ही सीटों पर जाट सांसद चुने गए हैं. पहले भी इन सीटों पर जाट समुदाय के नेताओं का वर्चस्व रहता आया है. आने वाले लोकसभा चुनाव में इनको वापिस खींचना भी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…

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Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

August 18, 2026, 16:49 IST

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