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‘बहू गोरी लाना ताकि’, स्किन टोन की वजह से शर्मिंदा हुए ये 8 सितारे, सांवली सूरत के चलते झेला रिजेक्शन

Last Updated:May 08, 2026, 21:00 IST

कई सितारों ने अपार सफलता के बावजूद भेदभाव का सामना किया है. प्रियंका चोपड़ा और शिल्पा शेट्टी पर ग्लोबल स्तर पर रेसिस्ट कमेंट किए गए. वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी और दिव्येंदु भट्टाचार्य जैसे कलाकारों ने फिल्म इंडस्ट्री में सांवले रंग के चलते रिजेक्शन झेला. सोनम कपूर और ऋचा चड्ढा को भी फॉरेन ट्रिन के दौरान खराब अनुभव हुए.

नई दिल्ली: ग्लैमर की चकाचौंध से भरी फिल्मी दुनिया बाहर से जितनी हसीन दिखती है, अंदर से कभी-कभी उतनी ही कड़वी भी होती है. अक्सर हमें लगता है कि सेलिब्रिटीज की लाइफ तो एकदम परफेक्ट होती है, लेकिन सच तो यह है कि इन सितारों ने भी अपने करियर और निजी जिंदगी में रंगभेद (Racism) का सामना किया है. प्रियंका चोपड़ा से लेकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी तक, कई बड़े सितारों ने खुलकर बताया है कि कैसे उनके टैलेंट से ज्यादा उनकी स्किन टोन और लुक्स पर बातें बनाई गईं.

ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा आज भले ही दुनिया पर राज कर रही हैं, लेकिन उनका शुरुआती सफर आसान नहीं था. अमेरिका में पढ़ाई के दौरान, महज 15 साल की उम्र में उन्हें बुरी तरह चिढ़ाया जाता था. प्रियंका ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोग उन्हें ‘ब्राउनी’ कहकर पुकारते थे और कहते थे कि अपने देश वापस जाओ. इन बातों ने उनके आत्मविश्वास को इस कदर तोड़ दिया था कि वह खुद को छिपाने की कोशिश करने लगी थीं.

सोनम कपूर आहुजा ने भी विदेश यात्राओं के दौरान रंगभेद का सामना करने की बात कबूली है. सोनम का मानना है कि बाहर के देशों में लोगों का भारतीयों को लेकर एक अलग ही नजरिया होता है. वे स्किन टोन देखते ही फैसला सुना देते हैं कि हम रूढ़िवादी होंगे. सोनम ने बड़े पते की बात कही कि सिर्फ विदेशी ही नहीं, हम खुद भी गोरी चमड़ी देखकर लोगों को जज करते हैं. यह सब जानकारी और समझ की कमी की वजह से होता है.

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ऋचा चड्ढा ने भी एक बार अपना बुरा अनुभव बयां किया था. जॉर्जिया से निकलते वक्त एक पासपोर्ट कंट्रोल ऑफिसर ने उनके साथ बहुत बदतमीजी की थी. ऋचा ने बताया कि उस ऑफिसर ने उनका पासपोर्ट डेस्क पर पटक दिया और अपनी भाषा में कुछ बड़बड़ाते हुए उन पर चिल्लाई. यह घटना दिखाती है कि रंगभेद सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बर्ताव में भी साफ झलकता है.

रंगभेद की जब भी बात आती है, शिल्पा शेट्टी का ‘बिग ब्रदर’ वाला वाकया जरूर याद आता है. साल 2007 में एक इंटरनेशनल रियलिटी शो में शिल्पा को उनके देश और रंग की वजह से सताया गया था. शिल्पा ने हार मानने के बजाय डटकर मुकाबला किया और अंत में शो जीता. उन्होंने साबित कर दिया कि एक भारतीय महिला कितनी मजबूत हो सकती है. आज वह गर्व से कहती हैं कि उन मुश्किलों ने ही उन्हें एक निडर इंसान बनाया है.

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की एक्टिंग का लोहा पूरी दुनिया मानती है, लेकिन उन्हें भी अक्सर रंग के नाम पर भेदभाव झेलना पड़ा. नवाज कहते हैं कि हमारे समाज में गोरेपन को लेकर एक अलग ही सनक है. लोग घर में ही कहते हैं कि बहू गोरी लाना ताकि बच्चे काले न हों. नवाज का मानना है कि सिनेमा में भी अक्सर ‘हीरो’ का मतलब ‘गोरा-चिट्ठा’ ही समझा जाता है, जो एक बहुत बड़ी गलतफहमी है.

‘पंचायत’ फेम विनोद सूर्यवंशी ने तो यहां तक बताया कि उन्हें भिखारी के रोल के लिए भी इसलिए रिजेक्ट कर दिया गया, क्योंकि उन्हें ‘रिच लुक’ वाला बंदा चाहिए था. एक बार तो उन्हें घर के नौकर का रोल मिला और वह सेट पर पहुंच भी गए, लेकिन क्रिएटिव डायरेक्टर ने उन्हें सिर्फ इसलिए पैक-अप करने को कह दिया क्योंकि उनका रंग सांवला था. यह सुनकर वाकई हैरानी होती है कि इंडस्ट्री में टैलेंट से ऊपर रंग को रखा जाता है.

दिब्येंदु भट्टाचार्य जैसे मंझे हुए कलाकार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक विज्ञापन की शूटिंग से ठीक तीन दिन पहले उन्हें सिर्फ इसलिए रिप्लेस कर दिया गया क्योंकि मेकर्स को ‘काले एक्टर्स’ नहीं चाहिए थे. दिब्येंदु का कहना है कि यह समस्या समाज में बहुत गहरी जमी हुई है.

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