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माता-पिता के खिलाफ किया केस, 2022 में दिखाया ट्रेलर, 2026 में विजय का सुपरहिट हुआ ड्रामा

Last Updated:May 08, 2026, 19:56 IST

अगर दिल में कुछ कर गुजरने की चाह हो और मन में फौलादी हौसला, तो कुछ भी नामुकिन नहीं. किसने सोचा था कि फिल्मों में नाच-गाना-एक्शन करने वाला एक एक्टर किसी दिन मुख्यमंत्री पद पर बैठने की तैयारी करेगा. एक्टर ने बिना किसी गठबंधन के 108 सीटें जीतकर बता दिया है कि उनकी सफलता के पीछे दशकों की तैयारी, समाज सेवा और उनके फैन क्लबों का हाथ रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने एक बार अपने माता-पिता पर ही कानूनी केस कर दिया था, ताकि वे अपनी शर्तों पर राजनीति में उतरें. आखिरकरा, उनकी सोची-समझी रणनीति ने बड़ी ‘खामोशी’ ने उन्हें सत्ता के शिखर तक पहुंचा दिया.

नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा था कि पर्दे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला ‘हीरो’ एक दिन तमिलनाडु की सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले लेगा? 4 मई 2026 की तारीख इतिहास में दर्ज हो गई. जब वोटों की गिनती हुई, तो न डीएमके का सूरज चमका, न एआईएडीएमके की धमक दिखी. सामने आई तो बस विजय की पार्टी ‘टीवीके’. राजनीति के दिग्गजों के बीच एक बिल्कुल नई पार्टी ने ऐसी एंट्री मारी कि सब देखते रह गए.

बिना किसी गठबंधन और बिना किसी बड़े सहारे के विजय ने 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का रिस्क लिया. चुनावी मैदान में 108 सीटें जीतना कोई मामूली बात नहीं है, खासकर तब जब आप पहली बार मैदान में उतरे हों. तमिलनाडु की जनता ने यह साफ कर दिया कि उन्हें अब कुछ नया चाहिए था. विजय ने अपनी पूरी साख दांव पर लगा दी थी और जनता ने भी उन्हें निराश नहीं किया. यह जीत सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि एक गहरी प्लानिंग की थी.

विजय रातों-रात नेता नहीं बने. उनके ‘थलापति’ बनने का सफर दशकों पुराना है. तमिलनाडु के गांव-गांव और गली-गली में उनके फैन क्लब सालों से एक्टिव थे. ये सिर्फ फिल्में देखने वाले लोग नहीं थे, बल्कि एक ऐसी फौज थी जो चुपचाप जमीन पर काम कर रही थी. जब दुनिया उन्हें सिर्फ एक सुपरस्टार समझ रही थी, तब उनके फैंस एक बड़े राजनीतिक बदलाव की नींव रख रहे थे.

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विजय का शुरुआती सफर इतना आसान नहीं था. 90 के दशक में वह अपनी पहचान बनाने के लिए काफी स्ट्रगल कर रहे थे. 1993 में आई फिल्म ‘सेंथुरापंडी’ ने उनके करियर को वो उड़ान दी, जिसकी उन्हें जरूरत थी. इसके बाद तीन दशकों तक उन्होंने पर्दे पर राज किया. लेकिन इस स्टारडम के पीछे एक सोची-समझी रणनीति भी चल रही थी, जो उन्हें आम लोगों के दिल के करीब ले गई.

विजय ने फिल्मों में हमेशा गरीबों और मजलूमों का मसीहा बनकर अपनी इमेज बनाई. रीयल लाइफ में भी उन्होंने रक्तदान शिविरों और समाज सेवा के जरिए खुद को जनता से जोड़े रखा. उनके फैन क्लब किसी राजनीतिक संगठन की तरह ही काम करते थे. लोग कह सकते हैं कि टीवीके हाल में बनी है, लेकिन हकीकत यह है कि इसकी तैयारी सालों पहले से चल रही थी.

विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘खामोशी’ रही है. जब उनकी फिल्मों पर विवाद हुए या राजनीतिक दलों ने उन पर हमले किए, तब भी उन्होंने कभी पलटकर जवाब नहीं दिया. वह सही वक्त का इंतजार कर रहे थे. उनकी यही चुप्पी विरोधियों के लिए सबसे बड़ी पहेली बनी रही. वह जानते थे कि कब बोलना है और कब सिर्फ अपने काम से जवाब देना है.

सुपरस्टार के सफर में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने सबको हिला कर रख दिया. साल 2020 में विजय के अपने माता-पिता ने उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर एक पॉलिटिकल पार्टी रजिस्टर कराने की कोशिश की. जो बेटा सालों से चुप था, उसने अचानक कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. विजय ने अपने ही माता-पिता समेत 11 लोगों पर केस कर दिया. यह एक कड़ा फैसला था, जिसने उनकी इमेज को ‘फैमिली मैन’ से बदलकर एक ‘पक्का इरादे वाला नेता’ की बना दी.

केस के जरिए विजय ने साफ मैसेज दे दिया था कि वह किसी की कठपुतली नहीं बनेंगे. उन्होंने वीएमआई को भंग किया और यह साबित किया कि वह अपनी शर्तों पर राजनीति करेंगे. 2022 के लोकल चुनावों में उनके सपोर्टरों की जीत ने ट्रेलर दिखा दिया था और 2026 में पूरी फिल्म सुपरहिट हो गई. टीवीके की यह सफलता दिखाती है कि अगर संगठन मजबूत हो और इरादे साफ, तो तख्तापलट मुमकिन है.

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