‘जिंदगी मेरी जैसी मत करना’, अगर न होता ये पाकिस्तानी पहलवान, एक्टर नहीं बनते दारा सिंह, 1 रोल ने बनाया भगवान

Last Updated:May 16, 2026, 21:25 IST
दारा सिंह पहलवानी के लिए ही बने थे. फिल्मों से उनका दूर-दूर तक नाता नहीं था. दुनिया भर में रेसलिंग से लोकप्रिय होने के बाद तमाम फिल्ममेकर्स उनके आगे-पीछे घूमते थे. मगर उनका मन पहलवानी में ही रमता था. अगर वे पाकिस्तान के महान गामा पहलवान से न मिले होते, तो शायद रेसलिंग की रिंग में ही जिंदगी गुजार देते. रुस्तम-ए-हिंद गामा पहलवान की एक बात ने उनकी सोच ऐसी बदल दी कि वे धड़ाधड़ फिल्में साइन करने लगे. दारा सिंह को भगवान हनुमान और भीम के किरदारों ने इतना मशहूर बनाया कि वे घर-घर पूजे जाने लगे. उनके बेटे विंदू ने खुद यह इमोशनल किस्सा सुनाया था.
नई दिल्ली: गामा पहलवान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा पहलवान था. जब तक जवानी थी, तब तक दुनिया भर में अपनी कुश्ती के लिए मशहूर रहे. मगर जिंदगी के आखिरी कुछ सालों में उनका बुरा हाल हुआ. वे इतने निर्बल हो गए थे कि चेहरे पर बैठी मक्खी भी नहीं उड़ा पाते थे. घर की भी हालत खस्ता थी. दारा सिंह को जब उनकी माली हालत के बारे में पता चला, तो वे गामा पहलवान के घर उनसे मिलने पहुंचे. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज
यह वह दौर था जब दारा सिंह का रेसलिंग की दुनिया में बोलबाला था. उन्हें फिल्मों के बहुत ऑफर आते थे, पर वह उन्हें स्वीकार नहीं करते थे. दारा सिंह के बेटे विंदू दारा सिंह ने एक इंटरव्यू में पिता से गामा पहलवान की मुलाकात का किस्सा सुनाया था. वे बोले थे, ‘डैडी के पास फिल्मों के बड़े ऑफर आते थे, पर वह ऑफर कभी स्वीकार नहीं करते थे. वह सिर्फ रेसलिंग करना चाहते थे.’ (फोटो साभार: Instagram@darasinghofficial)
दारा सिंह रेसलिंग की वजह से हिट हुए थे, इसलिए जब वह गामा पहलवान से मिलने पहुंचे, तो उन्होंने उन्हें पहचान लिया. विंदू दारा ने गामा से डैडी का मुलाकात का किस्सा सुनाते हुए कहा, ‘वे जब गामा के पास पहुंचे, तो देखा कि गामा अपनी नाक पर बैठी मक्खी भी नहीं उड़ा पा रहे हैं. किसी ने बोला कि दारा सिंह मिलने आया है पहलवान जी.’ (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)
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विंदू दारा सिंह इमोशनल होते हुए बोले, ‘गामा पहलवान ने फिर सिर ऊपर किया और डैडी को देखा. वे बहुत खुश हुए. उन्होंने कहा- आजा दारा आ जा, गामा का हाल देख ले. वर्ल्ड का सबसे स्ट्रॉन्ग आदमी ऐसे पड़ा है. वे फिर दारा को अपने तजुर्बे से बोले, ‘मेरी एक बात याद रखना, जब तक जवानी है, तब तक पहलवानी है. उसके बाद कुछ नहीं.’ (फोटो साभार: Instagram@darasinghofficial)
गामा पहलवान ने दारा सिंह से आगे कहा था, ‘जिंदगी अपनी मेरी जैसी मत करना.’ गामा पहलवान का हाल देखकर दारा सिंह उस प्लैशबैक में चले गए जब प्रोड्यूसर उन्हें साइन करने की कोशिश कर रहे हैं, मगर वह नहीं कर रहे. वे सोचने लगे कि मैं सिर्फ कुश्ती लड़ रहा हूं. कहीं मेरा गामा जैसा हाल न हो जाए. (फोटो साभार: Instagram@darasinghofficial)
दारा सिंह ने गामा से विदा लेते वक्त उनकी तकिये के नीचे पैसे रख दिए और अपना ध्यान रखने के लिए कहा. विंदू दारा सिंह ने बताया कि पिता वहां से सीख लेकर निकले और जैसे ही बॉम्बे आए, पिक्चरें साइन करनी शुरू कर दी. जितने भी पहलवान इंडिया में थे, उन्हें फिल्मों में डाल दिया, ताकि वह ज्यादा पैसे कमा सकें और उनके घर भी चल सकें. (फोटो साभार: Instagram@darasinghofficial)
दारा सिंह ने 1952 की फिल्म ‘संगदिल’ से एक्टर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. वे कई सालों तक स्टंट फिल्म एक्टर के तौर पर काम करते रहे. वे पहली बार लीड रोल में 1962 की फिल्म ‘किंग कॉन्ग’ में नजर आए. उन्होंने फिर एक्ट्रेस मुमताज के साथ 16 फिल्मों में काम किया. वे उस दौर के सबसे महंगे बी ग्रेड एक्टर बन गए थे. दारा सिंह को उस वक्त एक फिल्म के चार लाख रुपये मिलते थे. (फोटो साभार: Instagram@darasinghofficial)
दारा सिंह ने रेसलिंग के बाद फिल्मों से खूब नाम कमाया. उन्होंने 100 से ज्यादा हिंदी और पंजाबी फिल्मों में काम किया था. वे ज्यादातर दमदार हीरो, धार्मिक किरदारों में नजर आए. उन्हें 1976 की फिल्म ‘बजरंगबली’ में भगवान हनुमान के रोल के लिए याद किया जाता है. उन्होंने रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भी भगवान हनुमान का रोल निभाया था, जिससे वह घर-घर पूजे जाने लगे. (फोटो साभार: Instagram@darasinghofficial)
दारा सिंह खेल जगत की पहली शख्सियत थे, जिन्हें राज्यसभा सदस्य के लिए नॉमिनेट किया गया था. उन्हें भारत सरकार ने 1996 में पद्म श्री से सम्मानित किया था. उनका जन्म 19 नवंबर 1928 में पंजाबी सिख परिवार में हुआ था. उस वक्त देश में ब्रिटिश सरकार का शासन था. दारा सिंह रेसलिंग की दुनिया में अजय रहे. उन्होंने जिस तरह किंग कॉन्ग को रेसलिंग में धूल चटाई थी, उसे लोग आज भी याद करते हैं. (फोटो साभार: IMDb)
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