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फ्लॉप सीजन और डगमगाती कप्तानी…क्या वापसी करेंगे ऋषभ पंत? उम्मीदें कम, दबाव ज्यादा

नई दिल्ली. लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए आईपीएल का मौजूदा सीजन किसी डरावने सपने से कम नहीं रहा है. जिस टीम से खिताबी जीत की उम्मीद थी, वह आज अंक तालिका में सबसे नीचे खड़ी है. लगातार छह हार ने टीम का मनोबल पूरी तरह तोड़ दिया है. नौ मैचों में केवल दो जीत और चार अंक के साथ, लखनऊ की स्थिति ऐसी हो गई है कि उनके लिए प्लेऑफ के दरवाजे लगभग बंद नजर आ रहे हैं. लखनऊ की आखिरी जीत अप्रैल की शुरुआत में आई थी, जब उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स को लगातार मात दी थी. तब लगा था कि टीम लय पकड़ चुकी है, लेकिन उसके बाद शुरू हुआ पतन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. आत्मविश्वास की कमी टीम के खेल में साफ झलकती है.हालांकि, गणितीय रूप से लखनऊ अभी भी रेस से बाहर नहीं है. उनके पास पांच मैच बचे हैं और अगर वे उन सभी में जीत हासिल करते हैं, तो 14 अंकों तक पहुंच सकते हैं. इतिहास गवाह है कि 14 अंक कभी-कभी शीर्ष चार में जगह बनाने के लिए काफी होते हैं, लेकिन लखनऊ की राह आसान नहीं है. उनके अगले तीन मैच अंक तालिका की शीर्ष टीमों, पंजाब किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ हैं. एक और छोटी सी चूक का मतलब है सीजन का अंत.

इस पूरे संकट के केंद्र में टीम के कप्तान और लीग के सबसे महंगे खिलाड़ी ऋषभ पंत (Rishabh Pant) हैं. एक ऐसा खिलाड़ी जो अपनी आक्रामक शैली और निडर बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है. इस सीजन में अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है. नौ पारियों में केवल 204 रन, 25.50 का औसत और 128.30 का स्ट्राइक रेट. ये आंकड़े न तो ऋषभ पंत के कद के अनुरूप हैं और न ही किसी टी20 कप्तान के लिए संतोषजनक. पंत ने इस सीजन में केवल एक बार पचास का आंकड़ा पार किया है. उनकी सबसे बड़ी समस्या ‘स्टार्ट’ को बड़े स्कोर में न बदल पाना रही है. जब टीम को उनकी जरूरत होती है, वे विकेट गंवा बैठते हैं, जिसका सीधा असर टीम के मध्यक्रम पर पड़ता है.केवल बल्लेबाजी ही नहीं, उनकी कप्तानी पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

ऋषभ पंत की खराब फॉर्म सवालों के घेरे में है.

भ्रम और अनिश्चितताएक कप्तान के रूप में, पंत का लगातार बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करना टीम के लिए घातक साबित हुआ है. किसी भी मैच में एक स्थिर ओपनिंग जोड़ी का न होना, टीम की नींव को कमजोर करता रहा है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ मिली हार के बाद, जब पंत ने कहा कि ‘हमें थोड़े अच्छे भाग्य की जरूरत है,’ तो यह उनके और टीम प्रबंधन के पास किसी ठोस योजना के न होने को दर्शाता है. खेल में ‘लक’ एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन लगातार छह हार सिर्फ किस्मत का खेल नहीं हो सकती.

लैंगर का अटूट भरोसा और हकीकतटीम के मुख्य कोच जस्टिन लैंगर का ऋषभ पंत पर भरोसा अब भी अडिग है. लैंगर अक्सर अभ्यास मैचों का जिक्र करते हैं, जहां पंत अपनी पुरानी लय में नजर आते हैं. उन्होंने हाल ही में एक अभ्यास मैच का उदाहरण देते हुए कहा था, ‘हमने दो दिन पहले एक प्रैक्टिस गेम खेला था, और पं तने 30-40 गेंदों में 95 रन बनाए थेण. आप बस देखते रह जाते हैं और कहते हैं ओह, यह ऋषभ पंत का सर्वश्रेष्ठ रूप है.’

लैंगर की यह बात टीम के भीतर पंत के प्रति समर्थन को तो दिखाती है, लेकिन सवाल यह है कि अभ्यास सत्र का यह ‘जादू’ मुख्य मंच पर क्यों नहीं दिख रहा? मैच के दबाव में पंत क्यों सिमट जाते हैं? कोच का यह बयान समर्थकों के लिए सुकून देने वाला कम और चिंता बढ़ाने वाला ज्यादा है, क्योंकि प्रशंसकों को नेट्स में मारे गए शॉट्स नहीं, बल्कि आईपीएल के मैदान पर मैच जिताऊ पारियां चाहिए.

क्या वापसी संभव है?जैसे-जैसे सीजन अपने अंत की ओर बढ़ रहा है, ऋषभ पंत के कंधों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. एक कप्तान के तौर पर उन्हें न केवल अपनी बल्लेबाजी में सुधार करना होगा, बल्कि टीम के ‘बैगेज’ को छोड़कर एक स्पष्ट रणनीति के साथ उतरना होगा. प्रयोग करने का समय बीत चुका है. अब लखनऊ को अपनी बेस्ट प्लेइंग इलेवन को मैदान में उतारना होगा और व्यक्तिगत चमक के बजाय टीम के रूप में प्रदर्शन करना होगा. अगर पंत का बल्ला अगले मैचों में खामोश रहा, तो न केवल लखनऊ का प्लेऑफ का सपना टूटेगा, बल्कि बतौर लीडर उनकी साख पर भी गहरा धब्बा लग सकता है. क्या ‘विस्फोटक’ पंत फिर से लौटेंगे, या लखनऊ का यह सीजन सिर्फ ‘क्या हो सकता था’ के मलाल में बीत जाएगा? जवाब अब केवल आने वाले मैचों की पिच पर मिलेगा.

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