Rajasthan

गिरल लिग्नाइट माइंस मजदूर आंदोलन, शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की बिगड़ी तबीयत

Last Updated:May 13, 2026, 12:58 IST

MLA Ravindra Singh Bhati News: बाड़मेर जिले में गिरल लिग्नाइट माइंस मजदूरों के आंदोलन में उनके साथ धरना स्थल पर बैठे शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की आज तबीयत बिगड़ गई. 9 दिनों से चल रहे इस आंदोलन में अभी तक कोई अधिकारी वार्ता के लिए नहीं पहुंचा है. इससे मजदूरों और ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. विधायक भाटी लगातार दिन रात आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बैठे हैं. शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की बिगड़ी तबीयत, जानें क्या हुआ?Zoomविधायक रविन्द्र सिंह भाटी को धरनास्थल पर ही ड्रिप चढ़ाई जा रही है.

बाड़मेर. बाड़मेर के गिरल में मजदूरों की मांगों के समर्थन में उनके साथ धरने पर बैठे शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की आज तबीयत बिगड़ गई है. अब धरनास्थल पर ही भाटी का इलाज करवाया जा रहा है. उनको ड्रिप चढ़ाई जा रही है. एमएलए रविन्द्र सिंह भाटी स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों संग उनकी मांगों को लेकर गिरल लिग्नाइट माइंस पर उनके साथ धरने पर बैठे हैं. लेकिन 9 दिन बीत जाने के बाद भी वार्ता के लिए एक बार भी जिले के बड़े अधिकारी वहां नहीं पहुंचे हैं. ना ही अभी तक मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है. भाटी प्रचंड गर्मी में भी ग्रामीणों के साथ पेड़ के नीचे बैठे हैं. वे धरनास्थल ही पर ही उनके साथ रात गुजार रहे हैं. इस बीच भाटी ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि ‘मांगें नहीं मानी तो वह तैयार रहे’.

दरअसल बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों का आंदोलन चल रहा है. पिछले लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे श्रमिकों के समर्थन में अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग धरनास्थल पर पहुंचने लगे हैं. धरनास्थल महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने आंदोलन को और अधिक तेज कर दिया है. श्रमिकों और ग्रामीणों के साथ शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार धरनास्थल पर मौजूद हैं. वे आंदोलनकारियों के बीच रहकर उनका हौसला अफजाई कर रहे हैं.

इलाके की ग्रामीण महिलाएं भी कर रही हैं आवाज बुलंदभाटी ने मुताबिक यह केवल श्रमिकों का आंदोलन नहीं बल्कि क्षेत्र के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. श्रमिकों और स्थानीय युवाओं के अधिकारों के लिए यह संघर्ष अंतिम दम तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी को स्थानीय लोगों की अनदेखी और शोषण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. जब तक मजदूरों को न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा. धरने में बड़ी संख्या में पहुंच रही महिलाओं ने भी श्रमिक परिवारों के समर्थन में आवाज बुलंद की है.

ये है श्रमिकों की प्रमुख मांगेंमहिलाओं का कहना है यह लड़ाई केवल रोजगार की नहीं, बल्कि परिवारों के भविष्य और सम्मान की लड़ाई है. बुजुर्ग ग्रामीणों ने भी कंपनी प्रबंधन पर स्थानीय लोगों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र के संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय निवासियों का होना चाहिए. भाटी ने मजदूरों की प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि कंपनी की ओर से निकाले गए ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली हो. इसके अलावा आठ घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, श्रमिकों को नियमानुसार वेतन और सुविधाएं उपलब्ध कराने तक आंदोलन जारी रहेगा.

मजदूरों के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगाविधायक रविंद्र सिंह भाटी ने चेतावनी दी कि यदि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि श्रमिक और ग्रामीण अब अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं. मजदूरों के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. गिरल लिग्नाइट माइंस का यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र में जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है. लगातार बढ़ती भीड़ और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी से साफ जाहिर हो रहा है कि स्थानीय लोगों में कंपनी के प्रति नाराजगी बढ़ रही है. आंदोलन स्थल पर लगातार नारेबाजी, जनसभाएं और समर्थन देने वालों का पहुंचना जारी है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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