‘मुझे नहीं पता आपने क्या लिखा है’, जब जावेद सिद्दीकी के डायलॉग सुन दंग रह गए थे सत्यजीत रे

Last Updated:May 02, 2026, 15:27 IST
भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार सत्यजीत रे की बर्थ एनिवर्सरी पर उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी खूब याद किया जाता है. फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ के दौरान लेखक जावेद सिद्दीकी पहली बार उनके साथ काम कर रहे थे. कहा जाता है कि जब 20 लोगों के बीच फिल्म के डायलॉग पढ़े गए तो कमरे में सन्नाटा छा गया. तभी सत्यजीत रे ने ऐसा जुमला कहा, जिसे जावेद सिद्दीकी जिंदगीभर नहीं भूल पाए. यही किस्सा बताता है कि ‘मानिक दा’ फिल्मों को सिर्फ देखते नहीं, महसूस भी करते थे.
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सत्यजीत रे की आज 105वीं बर्थ एनिवर्सरी है.
नई दिल्ली. भारत के महानतम फिल्मकार सत्यजीत रे की पहली फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ बनाने के पीछे का संघर्ष आज भी प्रेरणादायक है. फिल्म बनाने के लिए वे प्रोड्यूसर्स के पास नोटबुक लेकर जाते थे और अपनी जीवन बीमा पॉलिसी तक गिरवी रख दी थी. 1956 में कान फिल्म फेस्टिवल में अपनी पहली फिल्म दिखाकर उन्होंने भारतीय सिनेमा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई. हालांकि, वह अपनी हर एक फिल्म के छोटे से छोटे हिस्से को बखूबी मांजते थे.
सत्यजीत रे का सिनेमा यथार्थवादी था. इसमें मारधाड़, नाच-गाना या सपनों की दुनिया नहीं थी. उनकी फिल्मों में भूख, गरीबी, सामाजिक अन्याय और सदियों से शोषित महिलाओं की पीड़ा दिखती थी. मुंबई के व्यावसायिक सिनेमा और सत्यजीत रे के गंभीर सिनेमा में जमीन-आसमान का अंतर था. उन्होंने समाज की समस्याओं पर रचनात्मक हस्तक्षेप किया.
कैसे तैयार हुई ‘शतरंज के खिलाड़ी’
लेखक जावेद सिद्दीकी ने एक इंटरव्यू में सत्यजीत रे और उनकी फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ से जुड़ी यादें साझा की थी. उन्होंने बताया था कि ‘शतरंज के खिलाड़ी’ उनकी फिल्मी यात्रा की शुरुआत थी. उससे पहले उन्होंने कोई फिल्म नहीं लिखी थी. पत्रकारिता छोड़ने के बाद उनकी दोस्त लेखिका शमा जैदी ने बताया कि सत्यजीत रे उनसे मिलना चाहते हैं. जावेद सिद्दीकी ने पहले तो इसे मजाक समझा लेकिन बॉम्बे के होटल में गए.
6 फीट 2 इंच लंबे शख्स को देख दंग रह गए थे जावेद सिद्दीकी
वह बताते हैं, ‘सत्यजीत रे की आवाज बहुत गहरी और प्रभावशाली थी. उन्होंने खुद दरवाजा खोला. मैंने पहली बार इतने लंबे बंगाली व्यक्ति को देखा. वे करीब छह फीट दो इंच लंबे थे. सफेद खादी का कुर्ता-पजामा पहने हुए थे. उनकी व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था. सत्यजीत रे सोचते समय चश्मे की डंडी या रुमाल का कोना चबाने लगते थे. उन्होंने जावेद सिद्दीकी से कहा, ‘मुझे बताया गया है कि आप बहुत अच्छे कहानीकार हैं.’ जावेद सिद्दीकी ने जवाब दिया कि वे उर्दू में लिखते हैं. सत्यजीत रे ने कहा, ‘यह मेरी स्क्रिप्ट है, आप डायलॉग लिखिए.’ पूरी मुलाकात सिर्फ डेढ़ मिनट की थी. जावेद सिद्दीकी हैरान थे. वे शमा जैदी के पास गए और पूछा कि डायलॉग कैसे लिखे जाते हैं. डायलॉग लिखने के बाद प्रोड्यूसर सुरेश जिंदल काफी घबराए हुए थे.
‘मुझे नहीं पता आपने क्या लिखा है’
उन्होंने बताया था कि फिल्म महत्वपूर्ण थी और दुनिया उसका इंतजार कर रही थी. सुरेश जिंदल ने मुंबई के कई पढ़े-लिखे और उर्दू जानने वाले लोगों को बुलाया. 20 लोगों की एक सभा में जावेद सिद्दीकी ने पहले फ्रेम से आखिरी फ्रेम तक डायलॉग पढ़कर सुनाए. सब चुप थे. तभी सत्यजीत रे की आवाज आई, ‘मुझे नहीं पता कि आपने क्या लिखा है, लेकिन जो भी है उसकी साउंडिग जबरदस्त है. यह जुमला जावेद सिद्दीकी कभी नहीं भूल पाए.
कैमरा से लेकर म्यूजिक तक खुद संभालते थे सत्यजीत रे
सत्यजीत रे को उनके करीबी ‘मानिक दा’ कहकर पुकारते थे. वे बेहद मेहनती थे. फिल्म बनाने में वे खुद कैमरा चलाते थे, बैकग्राउंड म्यूजिक देते थे और एडिटिंग भी खुद देखते थे. छोटी-छोटी बातों पर गौर करते थे. जीवन में आए तमाम संघर्षों के बाद भी उन्होंने कभी समझौता नहीं किया. उनका सिनेमा हमेशा समाज की हकीकत पर आधारित रहा. ‘जावेद सिद्दीकी बताते हैं कि मानिक दा से उन्होंने बहुत कुछ सीखा. वे फिल्म को गहराई से महसूस करके बनाते थे. सत्यजीत रे की मेहनत, समर्पण और यथार्थवाद फिल्मकारों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा.
About the AuthorShikha Pandey
शिखा पाण्डेय पिछले 15 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक्टिव हैं. शिखा दिसंबर 2019 से न्यूज 18 हिंदी के साथ हैं और बतौर चीफ सब एडिटर के पद काम कर रही हैं. पिछले 6 सालों से वह एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही …और पढ़ें
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