‘तब्बू से मुझे बहुत जलन हुई’, नेशनल अवॉर्ड हारने पर जब हीरोइन को आया गुस्सा, फिल्म देखने के बाद बदली सोच

Last Updated:June 27, 2026, 19:54 IST
साल 1997 में जब तब्बू ने फिल्म ‘माचिस’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीता था, तब ज्यादातर लोग उनकी वाहवाही कर रहे थे, मगर एक हीरोइन को उनकी जीत से बहुत घुस्सा आया और जलन हुई. दरअसल, एक्ट्रेस भी फिल्म ‘दायरा’ के लिए नॉमिनेट हुई थीं. उन्हें लगता था कि तब्बू को यह अवॉर्ड सिर्फ शबाना आजमी की भतीजी होने की वजह से मिला है. हालांकि, जब एक्ट्रेस ने खुद ‘माचिस’ देखी, तो तब्बू की शानदार परफॉर्मेंस देखकर उनका गुस्सा शांत हो गया. वे उनकी मुरीद हो गईं.
नई दिल्ली: फिल्मी सितारों के बीच एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ हमेशा से रही है. 90 के दशक की मशहूर हीरोइन ने अब तब्बू से नेशनल अवॉर्ड हारने पर अपने जज्बात बयां किए. एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी ने बताया कि जब 1997 में फिल्म ‘माचिस’ के लिए तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला था, तो उन्हें काफी गुस्सा आया था. उन्हें लगता था कि यह अवॉर्ड उन्हें फिल्म ‘दायरा’ के लिए मिलना चाहिए, लेकिन अवॉर्ड तब्बू के खाते में चला गया. (फोटो साभार: IMDb)
सोनाली कुलकर्णी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस वक्त वो खुद को रोक नहीं पाई थीं और उनके मन में तब्बू के लिए बहुत गुस्सा और जलन पैदा हो गई थी. उन्होंने एक मशहूर टॉक शो में बात करते हुए माना कि करियर के उस दौर में उन्हें हर उस इंसान से जलन होने लगती थी, जो कोई न कोई अवॉर्ड अपने नाम कर रहा होता था.<br />(फोटो साभार: Instagram@sonalikul)
सोनाली ने हंसते हुए एक और मजेदार बात बताई. उन्होंने कहा कि उस समय हारने के बाद वो खुद को तसल्ली देने के लिए अजीब-अजीब बहाने ढूंढती थीं. उन्हें लगता था कि तब्बू को यह अवॉर्ड सिर्फ इसलिए मिला क्योंकि वह बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी की भतीजी हैं और उनका ताल्लुक फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े परिवार से है.<br />(फोटो साभार: IMDb)
Add as Preferred Source on Google
सोनाली ने आगे कहा कि उस दौर में उनकी फिल्में हर साल नेशनल अवॉर्ड के फाइनल राउंड तक तो पहुंचती थीं, पर आखिरी वक्त पर उनके हाथ खाली रह जाते थे. उस समय उन्हें दूसरे छोटे-मोटे अवॉर्ड्स तो मिल रहे थे, लेकिन नेशनल अवॉर्ड जीतने की सनक उन पर इस कदर सवार थी कि जो चीज नहीं मिल रही थी, बस वही चाहिए थी. (फोटो साभार: Instagram@sonalikul)
तब्बू से मची जलन और गुस्से को शांत करने के लिए सोनाली ने आखिरकार एक तरकीब निकाली. उन्होंने तय किया कि वो तब्बू की फिल्म ‘माचिस’ खुद अपनी आंखों से देखेंगी, ताकि पता चले कि ऐसा क्या खास था. जब उन्होंने फिल्म देखी, तो उनका गुस्सा गायब हो गया और उन्हें अपनी इनसिक्योरिटी से बाहर निकलने का रास्ता मिल गया. (फोटो साभार: Instagram@sonalikul)
फिल्म देखने के बाद सोनाली के विचार पूरी तरह बदल गए. उन्होंने माना कि ‘माचिस’ में तब्बू की एक्टिंग इतनी कमाल की और जबरदस्त थी कि वो खुद उनकी मुरीद हो गईं. उन्होंने तब्बू की ‘अस्तित्व’ और ‘चांदनी बार’ जैसी कई फिल्में देखीं और हर बार उन्हें तब्बू की परफॉर्मेंस से प्यार हो गया.<br />(फोटो साभार: IMDb)
सोनाली ने अपनी मैच्योरिटी पर बात करते हुए कहा कि करियर की शुरुआत में हर कोई अपनी भावनाओं को बहुत आक्रामक तरीके से दिखाता है, क्योंकि तब सहजता की समझ नहीं होती, पर समय के साथ उन्हें थिएटर और फिल्म एक्टिंग का अंतर समझ आया और अब उन्हें इंडस्ट्री या किसी और से कोई शिकायत नहीं है.<br />(फोटो साभार: IMDb)
सोनाली वह मेन अवॉर्ड हार गईं, लेकिन उनकी काबिलियत की वजह से साल 2002 में आई मराठी शॉर्ट फिल्म ‘चैत्र’ के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल जूरी अवॉर्ड से नवाजा गया. सोनाली ने आखिरी में मुस्कुराते हुए कहा कि अब उनकी इच्छाएं बदल चुकी हैं और वो भविष्य में तब्बू के साथ स्क्रीन शेयर करने की उम्मीद रखती हैं.<br />(फोटो साभार: IMDb)
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



