India on UNSC : बिन वीटो सुरक्षा परिषद की सदस्यता कैसी? संयुक्त राष्ट्र में सुधार की पहल की भारत ने उधेड़ दी बखिया

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बिन वीटो सदस्यता कैसी? UNSC में सुधार की पहल की भारत ने उधेड़ी बखिया
Last Updated:April 15, 2026, 11:05 IST
India on UNSC News: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स (IGN) की बैठक में कहा कि सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार के लिए स्थायी श्रेणी का विस्तार वीटो के साथ होना जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीटो के साथ या बिना किसी नई श्रेणी का निर्माण मौजूदा चर्चा को और जटिल बना देगा.
संयुक्त राष्ट्र में सुधार को लेकर भारत ने यूएन पर निशाना साधा है. (फाइल फोटो)
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर भारत ने एक अहम रुख अपनाया है. भारत ने साफ कहा है कि स्थायी सदस्यता का विस्तार वीटो अधिकार के साथ होना चाहिए, लेकिन साथ ही G4 देशों के प्रस्ताव के तहत नए स्थायी सदस्यों को 15 साल तक वीटो अधिकार के इस्तेमाल से रोके जाने पर भी सहमति जताई है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स (IGN) की बैठक में कहा कि सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार के लिए स्थायी श्रेणी का विस्तार वीटो के साथ होना जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीटो के साथ या बिना किसी नई श्रेणी का निर्माण मौजूदा चर्चा को और जटिल बना देगा.
G4 के प्रस्ताव का समर्थन
हालांकि, भारत ने G4 समूह के प्रस्ताव का समर्थन किया है. इस प्रस्ताव के तहत नए स्थायी सदस्यों को 15 साल तक वीटो अधिकार का उपयोग नहीं करने दिया जाएगा और इसके बाद इस पर पुनर्विचार किया जाएगा. इस समूह में भारत के अलावा ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं.
G4 की ओर से ब्राजील के उप स्थायी प्रतिनिधि नॉर्बर्टो मोरेटी ने कहा कि यह प्रस्ताव लचीलापन दिखाने और सार्थक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए है. उन्होंने कहा कि वीटो को मुद्दा बनाकर सुरक्षा परिषद के पुराने ढांचे को बनाए रखना उचित नहीं है.
स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ कौन-कौन?
दरअसल, इटली और पाकिस्तान जैसे कुछ देश स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ हैं. उनका तर्क है कि ज्यादा देशों को वीटो अधिकार देने से परिषद की कार्यक्षमता और कमजोर हो सकती है.
इस पर भारत ने कहा कि 1965 में हुए आखिरी सुधार में केवल गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई थी, जिससे स्थायी सदस्यों का प्रभाव और मजबूत हो गया. ऐसे में बिना वीटो के स्थायी सदस्य जोड़ना असंतुलन को और बढ़ाएगा.
वहीं, अफ्रीकी देशों के समूह ने भी साफ किया है कि नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि उपनिवेशवाद के दौर में उन्हें इस व्यवस्था से बाहर रखा गया था.
कुल मिलाकर, भारत का यह रुख एक संतुलित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें वह स्थायी सदस्यता और वीटो की मांग भी बरकरार रखे हुए है और साथ ही वैश्विक सहमति बनाने के लिए लचीला रुख भी दिखा रहा है.
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First Published :
April 15, 2026, 10:58 IST



